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नई शिक्षा नीति, भारतीय शिक्षा प्रणाली से लॉर्ड मैकाले के प्रभाव को खत्म करने वाली हैः प्रो नागेश
Thu, 27 Aug 2020 11:54 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 11:54 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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नई शिक्षा नीति भारतीय शिक्षा प्रणाली से मैकाले के प्रभाव को खत्म करने वाली है। मिश्रित शिक्षा, प्रौद्योगिकी का उपयोग, भारतीय केंद्रित दृष्टिकोण और अंत: विषय प्रकृति राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण हैं। यह बात भौतिक वैज्ञानिक एवं यूजीसी सदस्य प्रो. नागेश ठाकुर ने कही। वे बुधवार को पीयू में सेंटर फॉर मेडिकल फिजिक्स की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन पर आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रो. नागेश ठाकुर ने बताया कि नई शिक्षा नीति में सुधार किए गए सुधार न केवल परिवर्तनकारी हैं, बल्कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली के व्यापक बदलाव का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सुधार नई शिक्षा नीति के अभिन्न अंग के रूप में आते हैं और इस नीति की दृष्टि को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उनका विचार था कि यह शिक्षा नीति भारत में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और इसे भारत केंद्रित नीति बनाने में सहायक होगी। यह पहला मौका है जब शिक्षा को जीडीपी का 6% हिस्सा देने की बात की गई है। उन्होंने कहा कि कई बदलावों की आवश्यकता है, जो नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए मौलिक हैं।
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प्रो. राजकुमार बोले- शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए एजेंडा तैयार कर रही पीयू
वेबिनार में सबसे पहले सेंटर अध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। शिक्षा नीति का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक्सेस, इक्विटी, क्वालिटी, अफोर्डेबिलिटी और एकाउंटेबिलिटी के आधार भूत स्तंभों पर बनी है। यूआईएचटीएम के प्रो प्रशांत गौतम ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और मुख्य अतिथि का परिचय दिया।
मुख्य अतिथि पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने देश में शिक्षा के सभी हितधारकों से अनुरोध किया कि वह अपने बच्चों के लिए बेहतर कल और भविष्य के लिए एक बेहतर भारतीय समाज बनाने के लिए नई शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य के लिए काम करने के लिए एकजुट हों।पंजाब विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए एक एजेंडा तैयार कर रहा है और यह कामना की, कि विश्वविद्यालय इस संबंध में सबसे आगे बढ़ेगा।
आखिर में यूआईसीईटी आयोजन समिति के सदस्य डॉ. संजीव गौतम ने सभी प्रतिभागियों को आभार जताया।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रो. नागेश ठाकुर ने बताया कि नई शिक्षा नीति में सुधार किए गए सुधार न केवल परिवर्तनकारी हैं, बल्कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली के व्यापक बदलाव का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सुधार नई शिक्षा नीति के अभिन्न अंग के रूप में आते हैं और इस नीति की दृष्टि को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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उनका विचार था कि यह शिक्षा नीति भारत में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और इसे भारत केंद्रित नीति बनाने में सहायक होगी। यह पहला मौका है जब शिक्षा को जीडीपी का 6% हिस्सा देने की बात की गई है। उन्होंने कहा कि कई बदलावों की आवश्यकता है, जो नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए मौलिक हैं।
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प्रो. राजकुमार बोले- शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए एजेंडा तैयार कर रही पीयू
वेबिनार में सबसे पहले सेंटर अध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। शिक्षा नीति का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक्सेस, इक्विटी, क्वालिटी, अफोर्डेबिलिटी और एकाउंटेबिलिटी के आधार भूत स्तंभों पर बनी है। यूआईएचटीएम के प्रो प्रशांत गौतम ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और मुख्य अतिथि का परिचय दिया।
मुख्य अतिथि पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने देश में शिक्षा के सभी हितधारकों से अनुरोध किया कि वह अपने बच्चों के लिए बेहतर कल और भविष्य के लिए एक बेहतर भारतीय समाज बनाने के लिए नई शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य के लिए काम करने के लिए एकजुट हों।पंजाब विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए एक एजेंडा तैयार कर रहा है और यह कामना की, कि विश्वविद्यालय इस संबंध में सबसे आगे बढ़ेगा।
आखिर में यूआईसीईटी आयोजन समिति के सदस्य डॉ. संजीव गौतम ने सभी प्रतिभागियों को आभार जताया।