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पंजाब यूनिवर्सिटीः सिटिंग सीनेटरों का किला ढहाना आसान नहीं, नए उम्मीदवारों को करना होगा चमत्कार

Tue, 28 Jul 2020 12:48 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 28 Jul 2020 12:48 PM IST
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Punjab University Senate Elections Challange for New Candidates
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
इस बार पीयू सीनेट का चुनाव दिलचस्प होने वाला है। सिटिंग सीनेटर भी मैदान में हैं। उनका किला ढहाने के लिए उम्मीदवार रणनीति पर रणनीति बना रहे हैं, लेकिन सिटिंग सीनेटरों की कला को जान पाना आसान नहीं है। साथ ही उनके साथ गोयल ग्रुप है। इसलिए विपक्षियों को अपनी रणनीति को चेंज करना होगा। इसके लिए आए दिन बैठकें हो रही हैं।
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साइंस वर्ग में प्रो. रजत संधीर के सामने डटे हैं प्रो. एमसी सिद्धू
प्रोफेसर वर्ग से पिछले सीनेट चुनाव में प्रो. रजत संधीर मैदान में उतरे थे। वह साइंस वर्ग से आते हैं। उन्होंने प्रो. एसके तोमर को हराया था। प्रो. रजत संधीर की विज्ञान वर्ग के शिक्षकों में ही नहीं बल्कि कैंपस के सभी शिक्षकों में पैठ है। इस बार वह फिर से मैदान में हैं। अब तक विपक्षी ग्रुप भाजपा की ओर से कंडीडेट खड़ा नहीं किया गया है, लेकिन निर्दलीय एक उम्मीदवार प्रो. एमसी सिद्धू हैं। प्रो. सिद्धू सीनेट के पूर्व सदस्य रह चुके हैं।
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साथ ही पुटा में सचिव भी रहे हैं। राजनीति का उन्हें भी बखूबी अनुभव है। किसी भी सभा का माहौल बदलने की कला में वह माहिर हैं। हैरत तो इस बात की है कि उन्होंने सीनेट का चुनाव निर्दलीय ही जीता था। उनके पास अपने खुद के 70 से अधिक वोट हैं। साइंस वर्ग से इस बार चुनाव कांटे का होगा। जीत-हार भी अधिक वोटों से नहीं होगी। हालांकि भाजपा अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। उसके बाद मुकाबला त्रिकोणीय होगा।
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डॉ. प्रवीन गोयल व डॉ. सुमन मोर में कांटे की टक्कर
एसोसिएट व असिस्टेंट कंस्टीट्यूएंसी से यूआईईटी विभाग से वर्तमान सीनेटर डॉ. प्रवीन गोयल मैदान में हैं। वह प्रो. केशव मल्होत्रा ग्रुप से आते हैं। प्रो. केशव फिलहाल गोयल ग्रुप से ही जुड़े है। प्रो. मल्होत्रा की पकड़ सभी शिक्षकों पर है। साथ ही सीनेटर डॉ. प्रवीन गोयल ने भी चार साल सीनेट में कई मुद्दे उठाए हैं। ऐसे में वह दमदारी के साथ मैदान में हैं। उनके खिलाफ मैदान में पर्यावरण अध्ययन विभाग से चेयरपर्सन डॉ. सुमन मोर खड़ी हैं।


भाजपा ग्रुप ने इन्हें समर्थन दिया है। डॉ. सुमन की भी कैंपस में एक अलग छवि है। असिस्टेंट प्रोफेसर उनको सम्मान देते हैं। वह किसी भी मुद्दे पर निर्णय लेने में देरी नहीं करती हैं। साथ ही महिला शिक्षकों का साथ भी उनके साथ है। वह वार्डन भी रही हैं। इसके अलावा उनके पास कैंपस को आगे ले जाने का बेहतरीन विजन भी है। फिलहाल दोनों ही उम्मीदवार जबरदस्त हैं। यहां भी टक्कर कांटे की होगी।
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