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पीयू वीसी बोले- लॉकडाउन में भी खुले ज्ञान अर्जन के रास्ते, इस समय नए माध्यमों से जुड़ने का अवसर

Wed, 15 Apr 2020 12:35 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 15 Apr 2020 12:35 PM IST
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Knowledge acquisition avenues are also open in lockdown, this time to connect new media, punjab university
फाइल फोटो
देश में कोरोना महामारी के चलते विकट परिस्थितियां उत्पन्न हो रखी हैं। इस वजह से भयंकर अनिश्चितता का माहौल है। हम में से कोई यह नहीं जानता कि हालात सामान्य होने में कितना वक्त और लगेगा। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए कोई कार्य योजना तैयार करने में सबसे बड़ी बाधा भी यह अनिश्चितता ही बनती है। इस स्थिति से आज सभी क्षेत्र जूझ रहे हैं। शिक्षा का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है।
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देश के करोड़ों विद्यार्थियों के सामने आज यह सवाल है कि उनके स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय कब खुलेंगे, कब उनकी परीक्षाएं होगीं, कब नतीजे आएंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं का क्या होगा और कब अगली कक्षाओं में प्रवेश होंगे। इनमें से बहुत से सवालों के जवाब एकदम से नहीं दिए जा सकते। लेकिन एक बात है जो निश्चित है- वह यह कि कक्षाएं न लगने और लॉकडाउन के बावजूद ज्ञान अर्जित करने के अनके रास्ते खुले हुए हैं। यह ठीक है कि कक्षाओं का कोई विकल्प नहीं हो सकता है लेकिन आज ऐसे बहुत से साधन हैं जिनसे जुड़कर हम उनकी भरपाई जरूर कर सकते हैं, अपने पाठ्यक्रमों को जारी रख सकते हैं।
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यही वजह है कि मानव संसाधन मंत्रालय से लेकर यूजीसी और विश्वविद्यालयों से लेकर स्कूलों तक ने ऑनलाइन शिक्षा के माध्यमों को अपनाने पर जोर दिया है। पीयू वीसी प्रोफेसर राजकुमार ने भी इस संबंध में सभी विभागों और संबद्ध कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं। यह बात बिल्कुल तय है कि हर चुनौती या समस्या अपने साथ नए अवसर और संभावनाएं भी लेकर आती है। हां, यदि परिस्थितियां अभूतपूर्व और अप्रत्याशित हों तो उनके समाधान भी अभूतपूर्व ही ढूंढने होंगे।
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मैंने स्वयं कभी ऑनलाइन कक्षाएं नहीं ली थी, लेकिन अब रोजाना कक्षा लेने में कोई दिक्कत नहीं आ रही है। हमने अपने विद्यार्थियों से भी यही कहा है कि वे विश्वविद्यालय के खुलने के इंतजार में न रहे और परीक्षाओं के लिए तैयार रहें। यकीन मानिए कम से कम ज्ञान अर्जन के लिए लॉकडाउन कोई बाधा नहीं है, बशर्ते हमारे अंदर हमेशा कुछ न कुछ नया सीखना का जज्बा बना रहे। मुझे लगता है कि यह अवसर भविष्य में शिक्षण क्षेत्र में बड़े बदलावों के लिए एक जमीन भी तैयार करेगा।
- प्रो. गुरमीत सिंह, हिंदी विभाग अध्यक्ष, पीयू, चंडीगढ़
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