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Hindi News ›   Chandigarh ›   Interview of Director of Punjab Engineering College Prof. Dheeraj Sanghi 

साक्षात्कार : पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक की टीस, फैकल्टी भर्ती के लिए और काम करना था  

Wed, 31 Mar 2021 03:49 PM IST
निवेदिता वर्मा कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 31 Mar 2021 03:49 PM IST
सार

  • पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक प्रो. धीरज सांघी दे चुके हैं इस्तीफा 
  • संस्थान में अपने सफर और शिक्षण को लेकर अमर उजाला से खास बातचीत
  • एक अप्रैल से आईआईटी कानपुर में देंगे सेवाएं

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Interview of Director of Punjab Engineering College Prof. Dheeraj Sanghi 
पेक के निदेशक प्रो. धीरज सांघी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के निदेशक प्रो. धीरज सांघी का बुधवार को संस्थान में आखिरी शैक्षणिक दिन है। प्रो. धीरज सांघी ने कुछ समय पहले ही पेक के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। एक अप्रैल से वह अपने पुराने संस्थान आईआईटी कानपुर में सेवा देंगे। इसके बाद अप्रैल के तीसरे हफ्ते में वहां से इस्तीफा देकर जयपुर स्थित निजी यूनिवर्सिटी जेके लक्ष्मीपत के कुलपति का पदभार संभालेंगे।

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प्रो. धीरज सांघी ने पेक के दो वर्ष के सफर, लक्ष्यों और शिक्षण व्यवस्था को लेकर अमर उजाला के साथ बातचीत की। उन्होंने बताया कि किसी भी शिक्षण संस्थान की उन्नति के लिए शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात और बजट सबसे अहम मानक है। 
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प्रश्न : पेक का आपका दो वर्ष का सफर कैसा रहा। इसमें सबसे यादगार लम्हे आपके लिए कौन-से रहे हैं?
प्रो. सांघी :
मैं 28 जनवरी 2019 को पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज संस्थान के निदेशक के रूप में इससे जुड़ा। इसमें सबसे प्यारी यादें जो मैं अपने साथ लेकर जा रहा हूं, वो एलुमनी रिलेशन है। हमने यूएस में एलुमनी मीट आयोजित की, वहां कार्यरत पेक के विद्यार्थियों को संस्थान से जोड़ा। पिछले वर्ष कोरोना से पहले 70-80 और उसके बाद के दशक के एलुमनी की मीट आयोजित की। दो वर्षों में पेक के एलुमनी के साथ रिश्ते बहुत मजबूत हुए हैं। इसका फायदा हमें कोरोना के दौरान हुआ। जिन विद्यार्थियों को कंपनियों ने लॉकडाउन के कारण नौकरी नहीं दी थी, एलुमनी से बातचीत करके उन्होंने हमारे विद्यार्थियों को नौकरियां उपलब्ध करवाईं।

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प्रश्न : अगर आपको थोड़ा और समय पेक में मिले तो कोई एक काम जो आपको लगता है अधूरा है और मुझे पूरा करना है?
प्रो. सांघी :
फैकल्टी भर्ती। मैं पिछले साल से पंजाब इंजीनियरिंग कालेज में फैकल्टी भर्ती के लिए प्रयास कर रहा हूं। कोरोना महामारी के कारण यह बीच में ही अटक गया। मेरे पास विकल्प था कि ऑनलाइन साक्षात्कार कर भर्ती करवा ली जाए, लेकिन मैं ऑनलाइन व्यवस्था पर ज्यादा विश्वास नहीं करता। स्टाफ की भर्ती मुलाकात करके ही बेहतर हो सकती है। इस काम का पूरा नहीं होने का मुझे अफसोस रहेगा।

प्रश्न : पेक की रैंकिंग को आगे बढ़ाने के क्या पैमाने हैं। किन खामियों की वजह से रैंकिंग प्रभावित हो रही है?
प्रो. सांघी :
स्वत्व अधिकार। पेक को एनआईटी और आईआईटी जितने स्वत्व अधिकार नहीं प्राप्त है। हमें शिक्षक भर्ती के लिए चंडीगढ़ प्रशासन को लिखना पड़ता है। वे आगे गृह मंत्रालय से इसकी मांग करते हैं। शिक्षकों की भर्ती के पद एमएचए की तरफ से तय किए जाते हैं। इतने लंबे प्रकरण के कारण समय पर शिक्षक भर्ती नहीं हो पाती, मांगें लंबित ही पड़ी रहती है। आईआईटी में 10 विद्यार्थियों पर एक, एनआईटी में 12 विद्यार्थियों पर एक और पेक में लगभग 22 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक है। शिक्षक और विद्यार्थियों की संख्या में अनुपात का यह अंतर रैंकिंग को सबसे अधिक प्रभावित करता है। मुझे लगता है कि रैंकिंग से ज्यादा यह शिक्षा की गुणवत्ता को अधिक प्रभावित करता है।
 

प्रश्न  : आप पेक को एनआईटी के समान दर्जा दिलवाना चाहते थे। आपका यह प्रोजेक्ट कहां तक पहुंचा?
प्रो. सांघी :
मैं पेक को केंद्रीय तकनीकी संस्थानों के अनुरूप दर्जा दिलवाना चाहता था। चाहे वो एनआईटी हो या एनआईटी के समान दर्जा प्राप्त कोई अन्य संस्थान। इसका बड़ा कारण यह था कि इससे हमें अपना स्टाफ भर्ती करने की स्वायत्तता मिल जाती। अभी पेक में शिक्षण के अलावा गैर-शैक्षणिक अफसरों की बहुत कमी है। पेक में नियमित कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में कोई शिक्षण संस्थान कैसे आगे बढ़ सकेगा।

प्रश्न : शैक्षणिक संस्थान को व्यवसायोन्मुख बनाने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं?
प्रो. सांघी :
शैक्षणिक संस्थान को व्यवसायोन्मुख नहीं बना सकते हैं। हम वहां के विद्यार्थियों को उनके काम में कुशल बना सकते हैं। इसके लिए हमें नौकरी पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय विद्यार्थी को जो पढ़ाया जा रहा है, वह उसे कितना समझ रहा है, इस पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। अभी हम विद्यार्थियों को व्यवसायोन्मुख कोर्स डिग्रियां देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि हमें शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर बल देना चाहिए। हमारे ज्यादातर विद्यार्थी नकल करके कोर्स पूरा कर लेते हैं। इस बारे में पता होने के बावजूद शिक्षक कोई कार्रवाई नहीं करते। यही हमारे शैक्षणिक संस्थानों की कमजोरी है। विद्यार्थी ने जो पढ़ा है, नौकरी के साक्षात्कार में वह उसका ही जवाब देने में नाकाम रहता है।

प्रश्न : पेक की उन्नति में आपको क्या खामियां लगती है, जिनमें सुधार पर पेक शैक्षणिक क्षेत्र में अच्छा नाम बन सकता है?
प्रो. सांघी :
किसी भी शैक्षणिक संस्थान की उन्नति के लिए उसमें शिक्षा की गुणवत्ता अहम मानक है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए पर्याप्त शिक्षक भर्ती, विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए अधिक बजट, विद्यार्थियों के लिए सीखने का माहौल पैदा करना, अंकों को थोपने के बजाय सीखने और सिखाने की प्रक्रिया पर अधिक बल देना इत्यादि प्रयास किए जा सकते हैं।

प्रश्न : आपका पेक में पांच वर्ष का कार्यकाल था, बीच में ही इस्तीफा देने का क्या कारण रहा ?
प्रो. सांघी :
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में परिवर्तन की दर बहुत धीमी है। मैं शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव को लेकर कुछ काम करना चाहता था, लेकिन यहां मुझे लग रहा है कि वह पूरा नहीं हो पाएगा, इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया। अब मैं एक अप्रैल से आईआईटी कानपुर में ज्वाइन कर रहा हूं। उसके बाद अप्रैल के अंतिम दिनों में जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी, जयपुर के कुलपति के तौर पर ज्वाइन करूंगा। इस शहर में मेरा सफर काफी यादगार रहा है कि बच्चों की पढ़ाई के चलते आगामी कुछ महीने यहां आना-जाना भी बना रहेगा।
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