कोरोना ने बढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी की टेंशन, अगस्त तक नहीं लगी लगाम तो मुश्किल होंगी सीटें भरनी

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 22 May 2020 11:12 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी
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कोरोना वायरस यदि अगस्त तक चलता रहा तो इस बार पीयू के सामने कोर्सेज की सीटें भरना बड़ी चुनौती होगी। दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों को आसानी से नहीं लाया जा सकेगा। साथ ही पंजाब, हिमाचल, हरियाणा के विद्यार्थी भी यहां तक बमुश्किल पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि यह विद्यार्थी अपने आसपास के ही विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में दाखिला ले सकते हैं। ऐसे में पीयू को अपनी रणनीति को बदलना होगा। साथ ही नए तरीके अपनाने होंगे ताकि जब भी दाखिले हों तो कम से कम सीटें पीयू में खाली रहें।
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इन राज्यों से सर्वाधिक विद्यार्थी पहुंचते हैं पीयू
पीयू में सर्वाधिक विद्यार्थी चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से आते हैं। इनके अलावा राजस्थान, दिल्ली, लद्दाख, जम्मू कश्मीर आदि प्रदेशों से हजारों विद्यार्थी हर साल दाखिले के लिए आवेदन करते हैं। पीयू प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर एडमिशन करता है। प्रमुख कोर्स में तो सीटें फुल हो जाती हैं। इनमें यूआईएलएस, यूआईपीएस, यूआईएचटीएम, बीएससी ऑनर्स, एमएससी फिजिक्स, रसायन विज्ञान, बॉटनी, बायोलॉजी आदि कोर्स शामिल हैं।
आर्ट में दाखिले के लिए सीटें हर साल खाली रहती हैं। साथ ही यूआईईटी की भी कुछ विंग में सीटें खाली रहती हैं। कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा संचालित एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री में भी बहुतायत में विद्यार्थी नहीं आता है। यह तब की स्थिति है जब सामान्य माहौल रहा है। यानी पिछले वर्षों का डेटा है। जानकारों का कहना है कि पीयू में हर साल 150 से 250 सीटें खाली रह जाती हैं जो कई कोर्स की हैं।

ऑनलाइन कोर्सेज के जरिये विद्यार्थियों को लुभा रहा पीयू
इस समय कोविड का प्रकोप चल रहा है। सभी शिक्षण संस्थानों पर ताला लगा है। अभी खुलने के भी आसार नहीं हैं। देश में लगातार कोविड के आंकड़े बढ़ रहे हैं। ऐसे में उम्मीद नहीं है कि लॉकडाउन खुलेगा या फिर शिक्षण संस्थान खुलेंगे। ऑनलाइन पढ़ाई ही एक जरिये है जो विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। हालांकि पीयू ऑनलाइन कोर्सेज के जरिये भी विद्यार्थियों को आकर्षित करने की कोशिश में लगा है।

सूत्रों का कहना है कि पीयू पंजाब व आसपास के राज्यों से तो कुछ विद्यार्थी एडमिशन के लिए ले सकता है। लेकिन राजस्थान, जम्मू, दिल्ली, लद्दाख समेत कई प्रदेशों से विद्यार्थियों को लाना आसान नहीं होगा। सूत्रों का कहना है कि पीयू पुराने ढर्रे पर चला तो सीटें भरना आसान नहीं होगा। यदि सीटें बड़ी संख्या में खाली रहीं तो पीयू के खजाने में पैसे भी कम आएंगे। ऐसे मेेें पीयू का आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

विदेशी विद्यार्थियों की आस कम
पीयू में स्कॉलरशिप आदि के जरिये विदेशी विद्यार्थी शिक्षा पाने आते हैं। इनकी सीटें भी हर कोर्स में दो से चार या छह से दस तक होती हैं। इन विद्यार्थियों के जरिये पीयू को अच्छी फीस भी मिल जाती है। अब पूरी दुनिया में कोविड का प्रकोप है। हर कोई अपने घर में रहना चाहता है। सूत्रों का कहना है कि इसी कारण विदेशी विद्यार्थी पीयू तक नहीं पहुंच पाएंगे। इसके लिए भी पीयू को कुछ रास्ते निकालने होंगे।
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