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पंजाब यूनिवर्सिटी में गेस्ट फैकल्टी को नहीं मिला मई का वेतन, एक्सटेंशन पर भी मुहर नहीं लगी
Tue, 23 Jun 2020 02:58 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 02:58 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी की गेस्ट फैकल्टी इस समय दोहरे तनाव में है। एक तो उनका एक्सटेंशन नहीं किया गया और दूसरा मई माह का वेतन भी नहीं मिला। उनके साथ समझौता यही हुआ है कि शैक्षणिक सत्र जब तक रहता है, तब तक सेवाएं ली जाएंगी और वेतन दिया जाएगा। गेस्ट फैकल्टी का तर्क है कि जब परीक्षाएं अभी नहीं हुई और न ही रिजल्ट जारी हुआ तो फिर कैसे शैक्षिक सत्र खत्म हो सकता है। उन्होंने पीयू के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि पहले उन्हें मई माह का वेतन दिया जाए।
200 से अधिक गेस्ट शिक्षक कर रहे काम
आंकड़ों को देखें तो पीयू में शिक्षकों की संख्या 1500 से अधिक है। इसमें 200 से अधिक शिक्षक गेस्ट फैकल्टी से हैं। इन्हीं शिक्षकों की बदौलत कई कक्षाएं चलती हैं। यह मेहनत पूरी करते हैं। जानकारों का कहना है कि इन शिक्षकों ने जिन विद्यार्थियों को पढ़ाया है, उनका रिजल्ट भी बेहतर आया है।
यह अपने नाम पर दाग नहीं लगने देना चाहते, लेकिन पीयू उन्हें सुविधाएं देने में हिचक रहा है। पीयू में हर साल गेस्ट फैकल्टी काम करती है। शैक्षणिक सत्र जैसे ही समाप्त हुआ तो उन्हें एक या दो माह का वेतन नहीं दिया जाता और उसके बाद उनका रिनुअल कर दिया जाता है। यह लगातार फिर काम करना शुरू कर देते हैं। परीक्षाएं करवाने से लेकर परीक्षा की कॉपियां भी यह चेक करते हैं।
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बिना वेतन कैसे चलाएंगे परिवार का खर्चा
गेस्ट फैकल्टी के कुछ शिक्षकों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, नौकरी आगे भी करनी है इसलिए अधिक विरोध नहीं कर सकते, लेकिन हक के लिए तो कुछ करना पड़ेगा। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षाएं करवाने, कॉपियां जब तक चेक होती हैं तब तक शैक्षणिक सत्र को पीयू को रखना चाहिए था। लॉकडाउन में अचानक उनकी सेवाएं लेना बंद कर दिया और वेतन भी मई माह का नहीं दिया। उन्होंने कहा है कि कम से कम मई व जून माह का वेतन देना चाहिए था।
क्योंकि नया शैक्षणिक सत्र सितंबर से शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में मई से लेकर सितंबर तक पांच माह बिना वेतन के वह परिवार कैसे चलाएंगे। पिछले कई साल में दो माह का वेतन नहीं मिलता था, जैसे-तैसे वह काम चला लेते थे। उनका तर्क है कि पीयू उनकी तरफ देखे और मई का वेतन जारी करे ताकि परिवार को वह पाल सकें। मालूम हो कि पीयू ने कांट्रैक्ट टीचर आदि से भी काम लेना फिलहाल बंद कर दिया है। उनका कहना है कि शिक्षण कार्य अभी नहीं हो रहा है।
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200 से अधिक गेस्ट शिक्षक कर रहे काम
आंकड़ों को देखें तो पीयू में शिक्षकों की संख्या 1500 से अधिक है। इसमें 200 से अधिक शिक्षक गेस्ट फैकल्टी से हैं। इन्हीं शिक्षकों की बदौलत कई कक्षाएं चलती हैं। यह मेहनत पूरी करते हैं। जानकारों का कहना है कि इन शिक्षकों ने जिन विद्यार्थियों को पढ़ाया है, उनका रिजल्ट भी बेहतर आया है।
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यह अपने नाम पर दाग नहीं लगने देना चाहते, लेकिन पीयू उन्हें सुविधाएं देने में हिचक रहा है। पीयू में हर साल गेस्ट फैकल्टी काम करती है। शैक्षणिक सत्र जैसे ही समाप्त हुआ तो उन्हें एक या दो माह का वेतन नहीं दिया जाता और उसके बाद उनका रिनुअल कर दिया जाता है। यह लगातार फिर काम करना शुरू कर देते हैं। परीक्षाएं करवाने से लेकर परीक्षा की कॉपियां भी यह चेक करते हैं।
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बिना वेतन कैसे चलाएंगे परिवार का खर्चा
गेस्ट फैकल्टी के कुछ शिक्षकों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, नौकरी आगे भी करनी है इसलिए अधिक विरोध नहीं कर सकते, लेकिन हक के लिए तो कुछ करना पड़ेगा। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षाएं करवाने, कॉपियां जब तक चेक होती हैं तब तक शैक्षणिक सत्र को पीयू को रखना चाहिए था। लॉकडाउन में अचानक उनकी सेवाएं लेना बंद कर दिया और वेतन भी मई माह का नहीं दिया। उन्होंने कहा है कि कम से कम मई व जून माह का वेतन देना चाहिए था।
क्योंकि नया शैक्षणिक सत्र सितंबर से शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में मई से लेकर सितंबर तक पांच माह बिना वेतन के वह परिवार कैसे चलाएंगे। पिछले कई साल में दो माह का वेतन नहीं मिलता था, जैसे-तैसे वह काम चला लेते थे। उनका तर्क है कि पीयू उनकी तरफ देखे और मई का वेतन जारी करे ताकि परिवार को वह पाल सकें। मालूम हो कि पीयू ने कांट्रैक्ट टीचर आदि से भी काम लेना फिलहाल बंद कर दिया है। उनका कहना है कि शिक्षण कार्य अभी नहीं हो रहा है।