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कोरोना महामारीः फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षाएं होंगी, पंजाब यूनिवर्सिटी ने फिर शुरू की तैयारियां
Sun, 02 Aug 2020 12:37 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2020 12:37 PM IST
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यूजीसी की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद पीयू फाइनल ईयर की परीक्षा कराने की तैयारी में फिर जुट गई है। प्लान तैयार किया जा रहा है कि सितंबर में कैसे-कैसे परीक्षाएं करवाई जाएंगी। साथ ही दूसरे राज्यों के छात्रों को कैसे बुलाया जाएगा या फिर वहीं पर परीक्षाएं होंगी। इसके बारे में विस्तृत प्लान तैयार हो रहा है। यूजीसी ने छात्रों से कहा है कि वे किसी दूसरे चक्करों में न पड़ें, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। परीक्षा देकर ही उनका भविष्य बेहतर बन पाएगा।
जानकारी के अनुसार यूजीसी ने पिछले दो माह में दो बार फाइनल ईयर की परीक्षाओं को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। इसमें प्रथम व दूसरे ईयर के छात्रों को तो आधार बनाकर प्रमोट करने के लिए कह दिया लेकिन फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाने के निर्देश दिए गए। कहा गया कि सितंबर के आखिरी तक विश्वविद्यालय अपने स्तर पर परीक्षाएं करवा लें।
एनएसयूआई परीक्षा के खिलाफ थी इसलिए छात्र संगठन पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने परीक्षा न कराने के आदेश दिए। साथ ही पीयू से भी जवाब मांगा। यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा। कुछ छात्रों ने याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की थी। उनका जवाब यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट में दिया है। साथ ही वहीं से रास्ता साफ हुआ है कि परीक्षाएं होनी चाहिएं।
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यूजीसी का सुप्रीम कोर्ट में तर्क
यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि 209 विश्वविद्यालयों ने आसानी से बिना रुकावट के छात्रों की परीक्षाएं करा ली हैं। सैकड़ों विश्वविद्यालय परीक्षाएं करवाने के लिए तैयार हैं। यूूजीसी का जवाब भारी होने के कारण अब पीयू परीक्षा कराने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों का कहना है कि यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे परीक्षाएं कराने का खाका पूरी तरह तैयार कर लें ताकि कोई कमी न रहने पाए। वहीं छात्रों को भी यूजीसी ने कहा है कि वे पढ़ाई करें। इधर-उधर के चक्कर में न रहें।
यूजीसी की यह बात छात्रों के पास पहुंची तो अब वे पढ़ाई करने की तैयारी में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि 60 फीसदी छात्रों ने प्रमोट के इंतजार में पढ़ाई करना बंद कर दिया था। कुछ छात्रों में असमंजस चल रही थी। यह असमंजस तो अभी भी है लेकिन यूजीसी ने फिर साफ कर दिया कि वह परीक्षाएं लेगी। यूजीसी के फैसले के बाद विश्वविद्यालय इसमें कोताही नहीं बरतेंगे। पीयू प्रशासन पहले ही कह चुका है कि वह यूजीसी के आदेश के मुताबिक कार्य कर रहा है।
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जानकारी के अनुसार यूजीसी ने पिछले दो माह में दो बार फाइनल ईयर की परीक्षाओं को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। इसमें प्रथम व दूसरे ईयर के छात्रों को तो आधार बनाकर प्रमोट करने के लिए कह दिया लेकिन फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाने के निर्देश दिए गए। कहा गया कि सितंबर के आखिरी तक विश्वविद्यालय अपने स्तर पर परीक्षाएं करवा लें।
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एनएसयूआई परीक्षा के खिलाफ थी इसलिए छात्र संगठन पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने परीक्षा न कराने के आदेश दिए। साथ ही पीयू से भी जवाब मांगा। यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा। कुछ छात्रों ने याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की थी। उनका जवाब यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट में दिया है। साथ ही वहीं से रास्ता साफ हुआ है कि परीक्षाएं होनी चाहिएं।
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यूजीसी का सुप्रीम कोर्ट में तर्क
यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि 209 विश्वविद्यालयों ने आसानी से बिना रुकावट के छात्रों की परीक्षाएं करा ली हैं। सैकड़ों विश्वविद्यालय परीक्षाएं करवाने के लिए तैयार हैं। यूूजीसी का जवाब भारी होने के कारण अब पीयू परीक्षा कराने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों का कहना है कि यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे परीक्षाएं कराने का खाका पूरी तरह तैयार कर लें ताकि कोई कमी न रहने पाए। वहीं छात्रों को भी यूजीसी ने कहा है कि वे पढ़ाई करें। इधर-उधर के चक्कर में न रहें।
यूजीसी की यह बात छात्रों के पास पहुंची तो अब वे पढ़ाई करने की तैयारी में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि 60 फीसदी छात्रों ने प्रमोट के इंतजार में पढ़ाई करना बंद कर दिया था। कुछ छात्रों में असमंजस चल रही थी। यह असमंजस तो अभी भी है लेकिन यूजीसी ने फिर साफ कर दिया कि वह परीक्षाएं लेगी। यूजीसी के फैसले के बाद विश्वविद्यालय इसमें कोताही नहीं बरतेंगे। पीयू प्रशासन पहले ही कह चुका है कि वह यूजीसी के आदेश के मुताबिक कार्य कर रहा है।