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बड़ा फैसलाः पंजाब यूनिवर्सिटी के अंतिम वर्ष के छात्रों को बकाया चुकाने के बाद ही मिलेगी डिग्री
Fri, 09 Oct 2020 02:00 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2020 02:00 PM IST
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- फोटो : पेक्सेल्स
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पंजाब विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को मार्कशीट या डिग्री तभी देगा जब वह अनापत्ति प्रमाण पत्र दिखाएंगे। यह प्रमाण पत्र छात्रावास, लाइब्रेरी व विभाग से लेना होगा। जानकारों का कहना है कि कई छात्रों पर पीयू का बकाया है जो उन्हें देना होगा। उसके बाद ही उन्हें लिखित में परिणाम मिल सकेगा। पीयू के परिणाम आने की तैयारी चल रही है। इसी सप्ताह में किसी न किसी विषय का रिजल्ट आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कोरोना के कारण इस बार अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं हो रही थीं। यूजीसी ने भी कई बार अपनी गाइड लाइन में बदलाव किया। इस कारण पीयू की भी परीक्षा की योजना पूरी तरह नहीं बन पा रही थी। जब यूजीसी ने सितंबर माह में परीक्षाएं खत्म करवाने के आदेश जारी किए तो पीयू ने अपनी तैयारी शुरू की और 17 सितंबर से ऑनलाइन परीक्षाएं शुरू करवाईं।
उस दौरान प्रवेश पत्र उन विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहे थे, जिन पर पीयू का बकाया था। पीयू का मानना था कि यदि इन विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र दे दिया तो फिर जरूरी नहीं कि बकाया वापस मिले। छात्रों का दबाव पड़ा तो पीयू ने कहा कि प्रवेश पत्र वह छात्रों के लिए जारी कर रहे हैं, लेकिन रिजल्ट से पहले यह बकाया चुकाना होगा। छात्र इसके लिए राजी हो गए थे। अब रिजल्ट जारी होना शुरू हो गया है, लेकिन तमाम विद्यार्थियों ने अभी तक विभागों व छात्रावासों से बकाया नहीं लिया।
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सूत्रों का कहना है कि पीयू ने भी साफ कर दिया है कि बकाया भुगतान न होगा तब तक लिखित रिजल्ट नहीं मिलेगा। बकाया में शुल्क के अलावा किताबें या अन्य चीजें हो सकती हैं। मालूम हो कि अंतिम वर्ष की परीक्षा में पीयू व उससे संबद्ध 196 कॉलेजों के लगभग 80 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। पीयू कैंपस के विद्यार्थियों की संख्या तीन हजार से अधिक रही। इनमें से 800 से अधिक छात्रों पर पीयू का बकाया बताया जा रहा है। वहीं कॉलेजों के विद्यार्थियों पर भी कॉलेजों का बकाया है।
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कोरोना के कारण इस बार अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं हो रही थीं। यूजीसी ने भी कई बार अपनी गाइड लाइन में बदलाव किया। इस कारण पीयू की भी परीक्षा की योजना पूरी तरह नहीं बन पा रही थी। जब यूजीसी ने सितंबर माह में परीक्षाएं खत्म करवाने के आदेश जारी किए तो पीयू ने अपनी तैयारी शुरू की और 17 सितंबर से ऑनलाइन परीक्षाएं शुरू करवाईं।
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उस दौरान प्रवेश पत्र उन विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहे थे, जिन पर पीयू का बकाया था। पीयू का मानना था कि यदि इन विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र दे दिया तो फिर जरूरी नहीं कि बकाया वापस मिले। छात्रों का दबाव पड़ा तो पीयू ने कहा कि प्रवेश पत्र वह छात्रों के लिए जारी कर रहे हैं, लेकिन रिजल्ट से पहले यह बकाया चुकाना होगा। छात्र इसके लिए राजी हो गए थे। अब रिजल्ट जारी होना शुरू हो गया है, लेकिन तमाम विद्यार्थियों ने अभी तक विभागों व छात्रावासों से बकाया नहीं लिया।
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सूत्रों का कहना है कि पीयू ने भी साफ कर दिया है कि बकाया भुगतान न होगा तब तक लिखित रिजल्ट नहीं मिलेगा। बकाया में शुल्क के अलावा किताबें या अन्य चीजें हो सकती हैं। मालूम हो कि अंतिम वर्ष की परीक्षा में पीयू व उससे संबद्ध 196 कॉलेजों के लगभग 80 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। पीयू कैंपस के विद्यार्थियों की संख्या तीन हजार से अधिक रही। इनमें से 800 से अधिक छात्रों पर पीयू का बकाया बताया जा रहा है। वहीं कॉलेजों के विद्यार्थियों पर भी कॉलेजों का बकाया है।
प्रमाण पत्र कहां मिलेगा, कई को पता ही नहीं
अनापत्ति प्रमाण पत्र कहां-कहां मिलेगा इसका विद्यार्थियों को ज्ञान ही नहीं। छात्रावास, पुस्तकालय व विभाग का बकाया किसी छात्र पर है तो वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि उन्हें एक ही जगह तीनों के लिए प्रमाण पत्र कहां से मिलेंगे। कुछ छात्र छात्रावास जा रहे हैं तो कुछ विभाग। तमाम विद्यार्थियों को पता नहीं है कि अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना है या नहीं।
यूजीसी के निर्देश का किया पालन
पीयू यूजीसी के निर्देश के मुताबिक ही सभी निर्णय ले रही है। चाहे वह परीक्षा का हो या फिर वाइवा आदि का। पीयू के कई विभागों में छात्रों के वाइवा लिए गए हैं। प्रायोगिक परीक्षाएं कोरोना के कारण नहीं हो पाई। हालांकि यूजीसी ने भी इसके लिए हरी झंडी नहीं दी है। वहीं वाइवा के लिए शिक्षकों ने अलग-अलग तरीके निकाले हैं। विद्यार्थियों को दिए गए असाइनमेंट के आधार पर अंक मिलेंगे। तमाम विद्यार्थियों ने यह जमा भी कर दिए हैं। कुछ विद्यार्थियों का आरोप है कि वाइवा के अंक देने में खेल हो रहा है। इसमें सुधार होना चाहिए। कहा कि विभाग के अिधिकारियों को इसको लेकर पत्र दिया जाएगा।
रिजल्ट के समय विद्यार्थियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करना होगा। यदि पीयू का छात्रों पर बकाया है तो जब तक वह जमा नहीं करते तब तक मार्कशीट या डिग्री नहीं मिलेगी।
- रेनुका बी सलवान, डीपीआर, पीयू
यूजीसी के निर्देश का किया पालन
पीयू यूजीसी के निर्देश के मुताबिक ही सभी निर्णय ले रही है। चाहे वह परीक्षा का हो या फिर वाइवा आदि का। पीयू के कई विभागों में छात्रों के वाइवा लिए गए हैं। प्रायोगिक परीक्षाएं कोरोना के कारण नहीं हो पाई। हालांकि यूजीसी ने भी इसके लिए हरी झंडी नहीं दी है। वहीं वाइवा के लिए शिक्षकों ने अलग-अलग तरीके निकाले हैं। विद्यार्थियों को दिए गए असाइनमेंट के आधार पर अंक मिलेंगे। तमाम विद्यार्थियों ने यह जमा भी कर दिए हैं। कुछ विद्यार्थियों का आरोप है कि वाइवा के अंक देने में खेल हो रहा है। इसमें सुधार होना चाहिए। कहा कि विभाग के अिधिकारियों को इसको लेकर पत्र दिया जाएगा।
रिजल्ट के समय विद्यार्थियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करना होगा। यदि पीयू का छात्रों पर बकाया है तो जब तक वह जमा नहीं करते तब तक मार्कशीट या डिग्री नहीं मिलेगी।
- रेनुका बी सलवान, डीपीआर, पीयू