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पंजाब यूनिवर्सिटी के 60 विभाग यौन शोषण के मामलों को लेकर गंभीर नहीं, नहीं किए इंतजाम
Wed, 25 Dec 2019 02:23 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Dec 2019 02:23 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पिछले सालों में सेक्सुअल हरासमेंट के प्रकरण सामने आने के बावजूद पंजाब यूनिवर्सिटी के विभाग गंभीर नहीं हैं। वास्तविकता यह है कि 60 विभागों के नोटिस बोर्ड पर इसकी जानकारी तक नहीं है। अब आतंरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से इन विभागों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है।
इससे पूर्व भी नोटिस दिए गए थे, लेकिन कुछ विभागों ने ही इस पर अमल किया। कुछ माह पहले दिए गए नोटिस में आईक्यूएसी ने कहा था कि देश के कई शिक्षण संस्थानों में ऐसे केस सामने आ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखकर जागरूकता के लिए हर शिक्षण संस्थान में इसका साहित्य, शिकायत प्रकोष्ठ के नाम व मोबाइल नंबर आदि लगाने थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
डेंटल इंस्टीट्यूट के एक डॉक्टर पर लगे थे आरोप
वर्ष 2018 में पीयू के डेंटल इंस्टीट्यूट में एक डॉक्टर पर सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगे थे। यह मुद्दा विद्यार्थियों ने प्रमुखता से उठाया और विरोध प्रदर्शन भी किए। इसके बाद जांच हुई और आखिरकार कड़ी कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को नौकरी से निकाला गया। कुछ शिकायतें इस बीच और आईं। पीयू की ही एक महिला अधिकारी के बेटे पर भी सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगे थे। कुछ प्रकरण सामने आने के बाद पीयू प्रशासन गंभीर दिखा लेकिन विभागों में इसको लेकर जागरूकता नहीं आई।
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डेंटल इंस्टीट्यूट समेत कुछ विभागों ने किया पालन
मामले सामने आने के बाद विभागों को आदेश दिए गए कि सेक्सुअल हरासमेंट को गंभीर हों और इससे जुड़ा साहित्य, कमेटी, फोन नंबर, शिकायत प्रकोष्ठ, की जाने वाली कार्रवाई आदि के बारे में जानकारी नोटिस बोर्ड पर लगाएं। आदेश देने के बाद इसका अनुपालन देखा गया। पाया कि डेंटल इंस्टीट्यूट समेत कुछ विभागों ने ही यह गाइड लाइन अपने नोटिस बोर्ड पर चस्पा की हैं बाकी विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं दिखे। अब इन विभागों को नोटिस फिर से देने की तैयारी की जा रही है।
आयोजित किए थे सेमिनार
पीयू में सोशल विभाग की ओर से लंबे समय तक सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर कार्यशालाओं का आयोजन किया गया था। हर विभाग में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया। शिक्षकों को भी गाइड लाइन बताई गई थीं। इसके बाद भी इस पर अमल नहीं हो पाया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यूजीसी के आदेशों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
कुछ विभागों में सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर सूचनाएं चस्पा की हैं, जिन्होंने नहीं लगाई हैं उन्हें चिट्ठी भेजकर सूचना लगाने को कहा जाएगा।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी
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इससे पूर्व भी नोटिस दिए गए थे, लेकिन कुछ विभागों ने ही इस पर अमल किया। कुछ माह पहले दिए गए नोटिस में आईक्यूएसी ने कहा था कि देश के कई शिक्षण संस्थानों में ऐसे केस सामने आ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखकर जागरूकता के लिए हर शिक्षण संस्थान में इसका साहित्य, शिकायत प्रकोष्ठ के नाम व मोबाइल नंबर आदि लगाने थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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डेंटल इंस्टीट्यूट के एक डॉक्टर पर लगे थे आरोप
वर्ष 2018 में पीयू के डेंटल इंस्टीट्यूट में एक डॉक्टर पर सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगे थे। यह मुद्दा विद्यार्थियों ने प्रमुखता से उठाया और विरोध प्रदर्शन भी किए। इसके बाद जांच हुई और आखिरकार कड़ी कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को नौकरी से निकाला गया। कुछ शिकायतें इस बीच और आईं। पीयू की ही एक महिला अधिकारी के बेटे पर भी सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगे थे। कुछ प्रकरण सामने आने के बाद पीयू प्रशासन गंभीर दिखा लेकिन विभागों में इसको लेकर जागरूकता नहीं आई।
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डेंटल इंस्टीट्यूट समेत कुछ विभागों ने किया पालन
मामले सामने आने के बाद विभागों को आदेश दिए गए कि सेक्सुअल हरासमेंट को गंभीर हों और इससे जुड़ा साहित्य, कमेटी, फोन नंबर, शिकायत प्रकोष्ठ, की जाने वाली कार्रवाई आदि के बारे में जानकारी नोटिस बोर्ड पर लगाएं। आदेश देने के बाद इसका अनुपालन देखा गया। पाया कि डेंटल इंस्टीट्यूट समेत कुछ विभागों ने ही यह गाइड लाइन अपने नोटिस बोर्ड पर चस्पा की हैं बाकी विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं दिखे। अब इन विभागों को नोटिस फिर से देने की तैयारी की जा रही है।
आयोजित किए थे सेमिनार
पीयू में सोशल विभाग की ओर से लंबे समय तक सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर कार्यशालाओं का आयोजन किया गया था। हर विभाग में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया। शिक्षकों को भी गाइड लाइन बताई गई थीं। इसके बाद भी इस पर अमल नहीं हो पाया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यूजीसी के आदेशों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
कुछ विभागों में सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर सूचनाएं चस्पा की हैं, जिन्होंने नहीं लगाई हैं उन्हें चिट्ठी भेजकर सूचना लगाने को कहा जाएगा।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी