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यूजीसी की गाइडलाइन जारी, पंजाब यूनिवर्सिटी में मैनपावर ऑडिट हुआ तो खत्म होंगे दर्जनों पद

Wed, 01 Jan 2020 03:07 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 01 Jan 2020 03:07 PM IST
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Dozens of teachers' posts will end if manpower audit is done in punjab university
Punjab University
पंजाब विश्वविद्यालय तीन साल से मैनपावर ऑडिट नहीं करवा पा रहा है। इसका कारण माना जा रहा है कि जैसे ही ऑडिट हुआ तो पीयू के विभागों व कार्यालय में दो साल से खाली चल रहे पद स्वत: खत्म हो जाएंगे। बताया जाता है कि पीयू के 50 से अधिक शिक्षकों के पद कई साल से खाली चल रहे हैं। कर्मचारियों के भी इतने ही पद रिक्त बताए जा रहे हैं। यह नियमों के मुताबिक समाप्त हो जाएंगे।
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यूजीसी ने पिछले वर्षों में आदेश जारी किए थे कि हर साल मैनपावर ऑडिट होना चाहिए। इससे विभागों में खाली पड़े पदों के मुताबिक नियुक्तियां हो सकें और जिस पद की जरूरत नहीं है तो उसे खत्म कर दूसरे विभाग में पद स्वीकृत किया जा सके। यूजीसी ने कहा है कि यदि किसी विभाग या कार्यालय में कोई शिक्षक का पद हो या फिर कर्मचारी का, यदि दो साल से खाली पड़ा है तो वह मैनपावर ऑडिट के आंकड़ों के जरिये स्वत: ही खत्म हो जाएगा। जिस विभाग में जरूरत है, उसे वह पद स्वीकृत कर दिया जाएगा।
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स्टूडेंट फेकल्टी अनुपात होना था ठीक
यूजीसी ने यह नियम इसलिए शुरू किया था कि स्टूडेंट फेकल्टी अनुपात काफी कम है। इसकी पूर्ति केलिए मैनपावर ऑडिट जरूरी है। सूत्रों का कहना है कि पीयू में भी इसके लिए कमेटी बनाई गई, लेकिन वह काम नहीं कर पा रही है। विज्ञान वर्ग केकई विभाग ऐसे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में पद खत्म हो जाएंगे। उन्हें बचाने के लिए मैनपावर ऑडिट नहीं करवाया जा रहा है। कर्मचारियों के भी पद कई खाली हैं। यह भी कहा जा रहा है कि कुछ विभाग खाली पदों पर गेस्ट फेकल्टी रखे हैं, ऐसे में उनका काम चल रहा है और उस पद को भरा हुआ दिखाया जा रहा है, जबकि रैंकिंग के दौरान स्टूडेंट फेकल्टी अनुपात परमानेंट शिक्षकों का देखा जाता है।
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फिर रैंकिंग गिरने के आसार
पीयू की रैंकिंग हर साल गिर रही है। उसका कारण यही है कि मानकों पर काम नहीं किया जा रहा है। मैनपावर ऑडिट अब तक नहीं किया गया। इसके चलते स्टूडेंट फेकल्टी अनुपात पूरा नहीं हो पा रहा है। इसी बिंदु पर पीयू को सबसे कम अंक मिलते हैं। परसेप्शन भी पीयू का यहां ठीक नहीं है। इस बिंदु पर भी अंक कम मिल रहे हैं। हालांकि, पीयू परसेप्शन सुधार के लिए कदम उठाने की बात कर रहा है। नए साल में इसमें बड़ा बदलाव दिखने के वादे किए जा रहे हैं।
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