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पीयू में पुटा चुनाव दोबारा कराने के लिए डीसी से मांगी अनुमति, खालिद ग्रुप ने कहा- फिर छिपाए तथ्य

Mon, 28 Sep 2020 01:17 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 28 Sep 2020 01:17 PM IST
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appeal to chandigarh dc to conduct puta election in punjab university
Punjab University
चंडीगढ़। पुटा चुनाव दोबारा कराने की अनमुति के लिए पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल, सचिव प्रो. जेके गोस्वामी व चुनाव अधिकारी प्रो. विजय नागपाल ने डीसी को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि चुनावी अनुमति देने के लिए पहले भी पत्र लिखा गया था, लेकिन जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अनुमति देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। साथ ही इस प्रकरण को लेकर वह मिलना भी चाहते हैं।
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उसके लिए समय दिया जाए। उधर, डीसी को पत्र भेजे जाने के बाद खालिद-सिद्धू ग्रुप ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि डीसी को भेजे गए पत्र में अधूरी जानकारी दी गई। तथ्य फिर छिपाए गए। जब प्रशासन अपने स्तर से जांच करेगा तो फिर गड़बड़ियां मिलेंगी और चुनाव स्थगित होगा। इससे पहले प्रशासन को हर बात खुलकर बतानी चाहिए थी।
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ये है डीसी को लिखा गया पत्र
प्रो. राजेश गिल, प्रो. जेके गोस्वामी व प्रो. विजय नागपाल की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस चुनाव में एमएचए की एसओपी का पूरा ध्यान रखेंगे और सभी गाइडलाइन का पालन करेंगे। पुटा चुनाव शिक्षकों के लिए जरूरी है। उन्होंने पत्र में कहा है कि बिहार के चुनाव के लिए भी अनुमति हो गई है।
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ऐसे में पुटा का चुनाव भी करवाने को अनुमति दी जाए। आपसे मिलकर चुनावी प्रक्रिया के बारे में भी सभी जानकारी देनी है। इसके लिए उन्हें मिलने को समय दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि चुनाव के समय कोई सरकारी अधिकारी भी उनकी ओर से तैनात किया जा सकता है।

ये हैं खालिद ग्रुप के सवाल
खालिद-सिद्धू ग्रुप ने कहा है कि पुटा के लेटरहेड पर पत्र पूर्व पदाधिकारियों ने डीसी को भेजा गया है। उसी में चुनाव अधिकारी का नाम भी शामिल कर दिया। अनुमति लेने की यह कौनसी प्रक्रिया है। पत्र चुनाव अधिकारी की ओर जाना चाहिए था या फिर पूर्व पदाधिकारियों की ओर से। पूर्व में तमाम लोग आते हैं। उनसे भी राय-मशविरा किया जाता तो और प्रभावी होता। चुनाव पिछली बार स्थगित करने के कारण यह बताए गए कि कुछ शिक्षकों का पत्र मिला था। उसमें कोरोना से असुरक्षा बताई गई थी।


डीसी को अब जो पत्र भेजा गया है उसमें इस बात का जिक्र करना चाहिए था कि पिछली बार चुनाव इस कारण स्थगित करना पड़ा था ताकि प्रशासन सभी तथ्यों की मॉनीटरिंग पहले ही कर ले और उनके मन में कोई सवाल न खड़े हों। जब कुछ शिक्षक कोरोना से पीड़ित हैं तो उसकी जानकारी देनी चाहिए थी ताकि चुनाव फिर से स्थगित करने की नौबत न आए। डीसी को पत्र के जरिए यह भी बताना चाहिए था कि उनसे अनुमति ली गई थी, लेकिन वहां से जवाब आने से पहले ही चुनाव की तिथियां घोषित कर दी गई थीं।
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