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निजी स्कूल कर रहे सरेआम हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Tue, 29 Mar 2016 08:43 AM IST
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- फोटो : file photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों पर रोक के आदेशों की अनदेखी की जा रही है। हाईकोर्ट अगले सत्र से सभी कक्षाओं में एनसीईआरटी की किताबें लागू करवाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने मामले में सीबीएसई को चार हफ्ते में इस संबंध में रिपोर्ट भी पेश करने को कहा था। लेकिन इसके बावजूद निजी स्कूलों की ओर से अब भी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों से कहा जा रहा है।
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उधर, अप्रैल 2016 में शुरू हो रहे नए सत्र के लिए निजी स्कूलों ने पिछले साल से चल रहीं प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें खरीदने के लिए कह रहे हैं। कुछ स्कूल खुद ही बुक सेट बेच रहे हैं तो बाकी स्कूलों ने दुकानों से साथ सांठगांठ कर रखी है। उधर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेचने वाले शहर के नामी विक्रेता ने कहा कि कोई भी स्कूल एक साथ इतने बड़े स्तर पर किताबों में बदलाव नहीं कर सकता। उन्होंने माना कि अभी पुराने सिलेबस के हिसाब से ही किताबें बेची जा रही हैं। लेकिन 10वीं और 12वीं कक्षाओं को छोड़ प्राइवेट स्कूलों ने अन्य के रिजल्ट घोषित कर दिए हैं।
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300 का सेट पांच हजार से अधिक में
शहर के निजी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवाकर मोटा कमीशन वसूल रहे हैं। एनसीईआरटी की छठी से 8वीं क्लास का बुक सेट 300 से 500 रुपये में आसानी से मिल जाता है। लेकिन प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों का सेट पांच से छह हजार में आता है। सेक्टर-32 स्थित एक प्राइवेट स्कूल में छठी क्लास की किताबों का सेट 4838 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। शहर के कान्वेंट स्कूल भी अपनी मर्जी से किताबों का चयन करते हैं। एंट्री लेवल की किताबों का सेट दो हजार में मिल रहा है।
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सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही लागू
शहर के सभी सरकारी स्कूलों में सीबीएसई के निर्देशों पर सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही सिलेबस में लगवाई गई हैं। जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग पहली से आठवीं क्लास तक गरीब विद्यार्थियों को खुद ही किताबें उपलब्ध कराता है। करीब 50 हजार विद्यार्थियों को शिक्षा विभाग हर साल निशुल्क किताबें सरकारी स्कूल के बच्चों को देता है।
केंद्र सरकार के नियमों के तहत सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जानी चाहिए। निजी स्कूल मोटी कमाई करने के चक्कर में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवाते हैं। गरीब अभिभावकों के लिए पांच से छह हजार की किताबें खरीदना बहुत मुश्किल है। यूटी प्रशासन को प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
- स्वर्ण सिंह कंबोज, यूटी कैडर एजुकेशनल इंप्लाइज यूनियन, चंडीगढ़।
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने विभाग को नहीं सीबीएसई को नोटिस जारी किया है। अपने स्तर पर शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। सीबीएसई से नोटिस मिलने पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
- रूबिंदजरजीत सिंह बराड़, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन, यूटी।
मैं इस संबंध में पूरी जानकारी लेकर ही कुछ बता सकूंगा।
- सर्वजीत सिंह, शिक्षा सचिव, यूटी।