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पंजाब यूनिवर्सिटी नए शैक्षिक कोर्स शुरू करने को लेकर असमंजस में, मौजूदा सीटें भरना ही चुनौती

Mon, 06 Apr 2020 04:00 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 06 Apr 2020 04:00 PM IST
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Confusion about starting new courses in new academic session in punjab university
Punjab University
कोरोना के कारण पीयू का शैक्षिक सत्र लेट होगा। ऐसे में पीयू से सामने मुख्य कोर्सेज की सभी सीटों को भरना चुनौती होगा। नए कोर्सेज का संचालन इस साल होगा या नहीं, इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि पीयू केवल मुख्य कोर्सेज की सीटों को भरने पर पूरा ध्यान दे रहा है। साथ ही कुछ विभागों ने अपने कोर्स संचालन के लिए प्रोजेक्ट तैयार किए थे, लेकिन वह संबंधित कमेटियों से अभी पास नहीं हो पाए। माना जा रहा है कि यह नए कोर्स अब वर्ष 2021 में ही संचालित हो सकेंगे।
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पीयू में 78 विभाग हैं। इन विभागों में लगभग 16 हजार स्टूडेंट्स शिक्षा पाते हैं। कोर्सेज की संख्या भी सैकड़ों में है। एक विभाग के पास तीन से चार कोर्सेज संचालित हैं। सूत्रों का कहना है कि पीयू हर साल पांच से सात नए कोर्सेज शुरू करता है, लेकिन उनमें सीटें खाली रह जाती हैं। एक तो जागरूकता की कमी है और दूसरा इन कोर्सेज का प्रचार-प्रसार पीयू नहीं कर पाता है। इसके अलावा मुख्य कोर्सेज में भी दर्जनों सीटें खाली रह जाती हैं। पीयू हर साल इन सीटों को भरने के लिए कोशिश करता है, लेकिन यह तमन्ना पूरी नहीं हो पाती। इसके कारण पीयू को आर्थिक हानि भी होती है।
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इस साल नए कोर्स के संचालन के लिए 20 से अधिक विभागों ने प्रोजेक्ट तैयार किए थे। फाइलें बनकर तैयार हो गई थीं। इसी बीच यह प्रस्ताव कमेटियों के मध्य जाते और सिंडिकेट मेें पास होते, लेकिन कोरोना के कारण बैठकें नहीं हो पाईं और यह प्रस्ताव लटक गए। हालांकि पांच से सात विभागों ने सतर्कता दिखाई और उन्होंने कोर्सेज संचालन के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। अब इन कोर्सेज का संचालन होगा या नहीं, इस पर फाइनल निर्णय नहीं हो पा रहा है।
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विभागाध्यक्षों के लिए सीटें भरना चुनौती
वीसी प्रो. राजकुमार ने चालू शैक्षिक सत्र में पिछले साल कहा था कि मुख्य कोर्सेज में खाली सीटों को भरने के लिए विभाग अध्यक्ष रास्ता निकालें। इसको लेकर वीसी प्रो. राजकुमार ने बैठकें भी सभी विभाग अध्यक्षों के साथ कीं। इन बैठकों का असर अब दिखाना होगा। क्योंकि विभाग अध्यक्षों को यह सीटें भरने के लिए अधिक जोर लगाना पड़ेगा। उनके लिए यह सीटें भरना चुनौती भी होगी। हालांकि वह पहले से ही तैयारियों में जुटे हुए हैं।
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