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चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में कंपार्टमेंट की परीक्षा संपन्न, कोरोना के डर से कई छात्रों ने नहीं दिए एग्जाम
Sat, 10 Oct 2020 01:20 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 01:20 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
सरकारी स्कूलों में 9वीं और 11वीं की चल रही कंपार्टमेंट परीक्षा शुक्रवार को संपन्न हो गई। सभी सरकारी स्कूलों ने परीक्षार्थियों के अनुसार अपने स्तर पर परीक्षा आयोजित करवाई थी। जिन स्कूलों में परीक्षा देने वाले विद्यार्थी ज्यादा थे उन्होंने दो शिफ्ट में परीक्षा का आयोजन करवाया। शुक्रवार तक भी कई विद्यार्थी शिक्षकों के संदेश और फोन के बाद भी परीक्षा देने नहीं पहुंचे थे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा नहीं देने वाले विद्यार्थियों पर सोमवार को फैसला लिया जाएगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि इन विद्यार्थियों को एक ओर विकल्प दिया जाएगा या नहीं। हालांकि सरकारी स्कूलों के प्रमुखों ने बताया कि उन्होंने विद्यार्थियों को कई बार फोन लगाया, कई स्कूल में शिक्षकों ने ग्रुप डी कर्मचारी को विद्यार्थियों के घर भी भेजा। लेकिन कोरोना के डर के कारण विद्यार्थी स्कूल नहीं आए, वहीं कुछ विद्यार्थियों ने परीक्षा नहीं देने का कारण स्वास्थ्य ठीक नहीं होने को बताया।
विद्यार्थियों के परिजनों को देना होगा शपथपत्र
जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा नहीं दी है और कक्षा दोहराना चाहते हैं, उनके परिजनों को स्कूल को शपथपत्र देना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी रविंदर कौर ने बताया कि बिना अंडरटेकिंग उसी कक्षा में दाखिला नहीं मिलेगा। उन्होंने बताया कि कुछ अभिभावकों ने लिखित में दिया है कि वे अपने बच्चे को उसी कक्षा में दोबारा पढ़ाना चाहते हैं।
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विद्यार्थियों में सामाजिक दूरी रखना हो रहा था मुश्किल
यूटी कैडर एजुकेशन एंप्लाइज के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि परीक्षा के समय एक दिन उनकी भी अनुशासन में ड्यूटी लगी। परीक्षा देने स्कूल में आने वाले विद्यार्थियों के बीच तय सामाजिक दूरी रखना मुश्किल हो रहा था। विद्यार्थी कभी एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रख रहे थे तो कभी बार बार मास्क उतार रहे थे। ऐसे में अगर स्कूल खोले जाते हैं तो विद्यार्थियों के बीच संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ जाएगा। छोटे बच्चों को दूर-दूर रखना बहुत मुश्किल है।
प्रवासी मजदूरों के बच्चे लौटे घर
लॉकडाउन के बाद प्रवासी मजदूरों के बच्चे अपने अभिभावकों के साथ अपने घर यूपी/बिहार लौट गए थे। 9वीं और 11वीं के कंपार्टमेंट वाले कई विद्यार्थियों ने शिक्षकों को बताया कि वे शहर में मौजूद ही नहीं है। इस समय वे अपने गांव हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने शहर छोड़ने वाले विद्यार्थियों का स्कूलों से डाटा भी मांगा था।
9वीं और 11वीं में 4550 विद्यार्थियों की आई थी कंपार्टमेंट
शिक्षा विभाग की ओर से 20 अप्रैल को 9वीं और 11वीं की परीक्षा का नतीजा घोषित किया गया। इस बार कोरोना वायरस के चलते किसी भी स्टूडेंट्स को फेल नहीं किया गया था। सभी को 30-30 नंबर ग्रेस मार्कस के रूप में दिए गए थे। इसके बावजूद नौवीं क्लास में 4000 के करीब स्टूडेंट्स और 11वीं क्लास में 550 स्टूडेंट्स की कंपार्टमेंट आई थी।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा नहीं देने वाले विद्यार्थियों पर सोमवार को फैसला लिया जाएगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि इन विद्यार्थियों को एक ओर विकल्प दिया जाएगा या नहीं। हालांकि सरकारी स्कूलों के प्रमुखों ने बताया कि उन्होंने विद्यार्थियों को कई बार फोन लगाया, कई स्कूल में शिक्षकों ने ग्रुप डी कर्मचारी को विद्यार्थियों के घर भी भेजा। लेकिन कोरोना के डर के कारण विद्यार्थी स्कूल नहीं आए, वहीं कुछ विद्यार्थियों ने परीक्षा नहीं देने का कारण स्वास्थ्य ठीक नहीं होने को बताया।
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विद्यार्थियों के परिजनों को देना होगा शपथपत्र
जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा नहीं दी है और कक्षा दोहराना चाहते हैं, उनके परिजनों को स्कूल को शपथपत्र देना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी रविंदर कौर ने बताया कि बिना अंडरटेकिंग उसी कक्षा में दाखिला नहीं मिलेगा। उन्होंने बताया कि कुछ अभिभावकों ने लिखित में दिया है कि वे अपने बच्चे को उसी कक्षा में दोबारा पढ़ाना चाहते हैं।
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विद्यार्थियों में सामाजिक दूरी रखना हो रहा था मुश्किल
यूटी कैडर एजुकेशन एंप्लाइज के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि परीक्षा के समय एक दिन उनकी भी अनुशासन में ड्यूटी लगी। परीक्षा देने स्कूल में आने वाले विद्यार्थियों के बीच तय सामाजिक दूरी रखना मुश्किल हो रहा था। विद्यार्थी कभी एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रख रहे थे तो कभी बार बार मास्क उतार रहे थे। ऐसे में अगर स्कूल खोले जाते हैं तो विद्यार्थियों के बीच संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ जाएगा। छोटे बच्चों को दूर-दूर रखना बहुत मुश्किल है।
प्रवासी मजदूरों के बच्चे लौटे घर
लॉकडाउन के बाद प्रवासी मजदूरों के बच्चे अपने अभिभावकों के साथ अपने घर यूपी/बिहार लौट गए थे। 9वीं और 11वीं के कंपार्टमेंट वाले कई विद्यार्थियों ने शिक्षकों को बताया कि वे शहर में मौजूद ही नहीं है। इस समय वे अपने गांव हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने शहर छोड़ने वाले विद्यार्थियों का स्कूलों से डाटा भी मांगा था।
9वीं और 11वीं में 4550 विद्यार्थियों की आई थी कंपार्टमेंट
शिक्षा विभाग की ओर से 20 अप्रैल को 9वीं और 11वीं की परीक्षा का नतीजा घोषित किया गया। इस बार कोरोना वायरस के चलते किसी भी स्टूडेंट्स को फेल नहीं किया गया था। सभी को 30-30 नंबर ग्रेस मार्कस के रूप में दिए गए थे। इसके बावजूद नौवीं क्लास में 4000 के करीब स्टूडेंट्स और 11वीं क्लास में 550 स्टूडेंट्स की कंपार्टमेंट आई थी।