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प्रशासन ने नहीं सुनी तो पीएम को लिखा पत्र- 'बच्चे की फीस भरनी है, किडनी बेचने की अनुमति दें'
Tue, 26 May 2020 02:16 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2020 02:16 PM IST
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चंडीगढ़ में हर रोज परिजन प्राइवेट स्कूलों की तरफ से की जा रही मनमानी को लेकर प्रशासन को शिकायतें कर रहे हैं। लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से परिजनों के हित में अभी तक कोई फैसला नहीं दिया गया है। इसी से परेशान होकर परिजन अतुल वोहरा ने चंडीगढ़ के गवर्नर वीपी सिंह बदनौर के माध्यम से प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में पीएम से बच्चों की लगातार बढ़ रही फीस भरने के लिए किडनी बेचने की अनुमति मांगी है।
अतुल वोहरा ने बताया कि उनका बेटा सेंट जोसेफ में सातवीं में पढ़ता है। स्कूल की तरफ से स्कूल पैड पर पूरे साल की महीने के हिसाब से फीस डिटेल डाल दी है। स्कूल प्रशासन की ओर से उनसे पांच महीने की फीस मांगी जा रही है। एक महीने की फीस 6 हजार चार सौ 41 रुपये है, इस हिसाब से पांच महीने की कुल फीस 32 हजार के पास हो जाती है।
पिछले तीन महीने से कोरोना लॉकडाउन के कारण मुझे सैलरी नहीं मिली है। घर की खराब आर्थिक हालत में फीस जमा करने के लिए इतनी बड़ी राशि कहां से आएगी। स्कूल प्रिंसिपल मोनिका चावला से इस संबंधी बात करने के लिए फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया।
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रिटायर्ड मां की तनख्वाह से चल रहा घर खर्च
अतुल ने बताया उनकी मां रिटायर्ड टीचर हैं। घर की खराब आर्थिक हालात में उन्हें मकान के किराए के लिए अपनी मां से रुपये लेने पड़ रहे हैं। वह एक प्राइवेट कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। कंपनी की ओर से पिछले तीन महीने से उन्हें सैलरी नहीं दी गई है। उनके दो कोर्ट में केस चल रहे हैं एक घर का और दूसरा फीस बढ़ोतरी के खिलाफ।
एडवोकेट भी उन्हें फोन करके फीस मांगते है, इतने सारे खर्चे बिना तनख्वाह के वह कैसे पूरे करें। उन्होंने छह साल पहले लोअर कोर्ट में फीस बढ़ोतरी को लेकर केस किया था, जोकि अब हाइकोर्ट में चला गया है। लेकिन इस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं आया है। जिसके कारण उन्हें पीएम को पत्र लिखना पड़ रहा है।
प्रशासन स्कूलों के हक में दे रहा फैसले
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से आम जनता को खर्चे में पहले ही कोई राहत नहीं दी गई है। दूसरी फीस लेने के फैसले में भी वह प्राइवेट स्कूलों की तरफदारी करने में लगा है। परिजनों को स्कूल की ट्यूशन फीस देने के आदेश से पहले प्रशासन को परिजनों के बारे में भी सोचना चाहिए था। जिन परिजनों को तनख्वाह नहीं मिल रही है, वह एक साथ तीन महीनों की फीस कैसे जमा करवाएंगे। वहीं स्कूलों में फीस भी बढ़ा दी है, इस पर भी शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
अफसर स्कूलों को भेजें शो केस नोटिस
शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई करने की बजाय उनकी तरफदारी करने में लगा है। परिजनों की सभी शिकायतें पेंडिंग पड़ी हैं, विभाग की तरफ से एक भी शिकायत का निपटारा करते हुए स्कूलों को शो केस नोटिस नहीं भेजा गया है। जिसके कारण विभाग के प्रति परिजनों का विश्वास कम हो गया है।
- नितिन गोयल, अध्यक्ष, चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन
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अतुल वोहरा ने बताया कि उनका बेटा सेंट जोसेफ में सातवीं में पढ़ता है। स्कूल की तरफ से स्कूल पैड पर पूरे साल की महीने के हिसाब से फीस डिटेल डाल दी है। स्कूल प्रशासन की ओर से उनसे पांच महीने की फीस मांगी जा रही है। एक महीने की फीस 6 हजार चार सौ 41 रुपये है, इस हिसाब से पांच महीने की कुल फीस 32 हजार के पास हो जाती है।
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पिछले तीन महीने से कोरोना लॉकडाउन के कारण मुझे सैलरी नहीं मिली है। घर की खराब आर्थिक हालत में फीस जमा करने के लिए इतनी बड़ी राशि कहां से आएगी। स्कूल प्रिंसिपल मोनिका चावला से इस संबंधी बात करने के लिए फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया।
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रिटायर्ड मां की तनख्वाह से चल रहा घर खर्च
अतुल ने बताया उनकी मां रिटायर्ड टीचर हैं। घर की खराब आर्थिक हालात में उन्हें मकान के किराए के लिए अपनी मां से रुपये लेने पड़ रहे हैं। वह एक प्राइवेट कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। कंपनी की ओर से पिछले तीन महीने से उन्हें सैलरी नहीं दी गई है। उनके दो कोर्ट में केस चल रहे हैं एक घर का और दूसरा फीस बढ़ोतरी के खिलाफ।
एडवोकेट भी उन्हें फोन करके फीस मांगते है, इतने सारे खर्चे बिना तनख्वाह के वह कैसे पूरे करें। उन्होंने छह साल पहले लोअर कोर्ट में फीस बढ़ोतरी को लेकर केस किया था, जोकि अब हाइकोर्ट में चला गया है। लेकिन इस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं आया है। जिसके कारण उन्हें पीएम को पत्र लिखना पड़ रहा है।
प्रशासन स्कूलों के हक में दे रहा फैसले
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से आम जनता को खर्चे में पहले ही कोई राहत नहीं दी गई है। दूसरी फीस लेने के फैसले में भी वह प्राइवेट स्कूलों की तरफदारी करने में लगा है। परिजनों को स्कूल की ट्यूशन फीस देने के आदेश से पहले प्रशासन को परिजनों के बारे में भी सोचना चाहिए था। जिन परिजनों को तनख्वाह नहीं मिल रही है, वह एक साथ तीन महीनों की फीस कैसे जमा करवाएंगे। वहीं स्कूलों में फीस भी बढ़ा दी है, इस पर भी शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
अफसर स्कूलों को भेजें शो केस नोटिस
शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई करने की बजाय उनकी तरफदारी करने में लगा है। परिजनों की सभी शिकायतें पेंडिंग पड़ी हैं, विभाग की तरफ से एक भी शिकायत का निपटारा करते हुए स्कूलों को शो केस नोटिस नहीं भेजा गया है। जिसके कारण विभाग के प्रति परिजनों का विश्वास कम हो गया है।
- नितिन गोयल, अध्यक्ष, चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन