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केंद्र ने कहा था गरीब सवर्णों को आरक्षण दो, पंजाब यूनिवर्सिटी दो साल में नहीं दे पाई लाभ  

Fri, 29 Jan 2021 10:28 AM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 29 Jan 2021 10:28 AM IST
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Chandigarh : Panjab University could not implement Poor upper class reservation Bill
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी न तो कैंपस में गरीब सवर्ण आरक्षण का लाभ विद्यार्थियों का दे पाई और न ही इससे संबद्ध 196 कॉलेजों में। इस आरक्षण के जरिए लगभग 62 हजार सीटें विद्यार्थियों की शिक्षण संस्थानों में बढ़नी थी जो नहीं बढ़ पाई। यानी एक साल में 62 हजार विद्यार्थी, जो दाखिला लेते और पढ़ाई करते वह नहीं कर पाए। दो साल से यह प्रकरण लटका हुआ है। इस तरह लगभग 1.25 लाख विद्यार्थियों को नुकसान हो गया।

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केंद्र सरकार ने जनवरी 2019 में गरीब सवर्ण आरक्षण बिल को पास कर दिया था। यह आरक्षण 10 फीसदी था। इसका लाभ नौकरियों के अलावा शिक्षण संस्थानों में गरीब सवर्ण विद्यार्थियों को मिलना था। इसके आदेश केंद्र सरकार की ओर से मिले तो पंजाब यूनिवर्सिटी ने भी इसके लिए बैठक की और तय किया कि विश्वविद्यालय में इन विद्यार्थियों के लिए 10 फीसदी व कॉलेज में 25 फीसदी सीटें बढ़ाएंगे। बैठक तो हुई, लेकिन फैसला लागू नहीं हो पाया।
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कॉलेजों में संसाधनों का अभाव बताकर इस प्रकरण को पीयू ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। केंद्र सरकार के इस महत्वपूर्ण फैसले का लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल सका। इस प्रस्ताव के पास होने के बाद शिक्षण संस्थानों में गरीब सवर्ण विद्यार्थी पहुंचे भी, लेकिन उन्हें लाभ नहीं मिल सका।
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1500 से अधिक शिक्षकों की आवश्यकता होगी
पीयू ने आरक्षण लागू करते समय इस बात पर मंथन किया था कि विद्यार्थियों के बढ़ने से उन्हें सुविधाएं भी देनी होंगी। इन सुविधाओं पर काम करना चाहिए था, लेकिन नहीं हो पाया। लगभग 62 हजार सीटें जब शिक्षण संस्थानों में बढ़ेंगी तो कम से कम 1500 शिक्षकों की आवश्यकता होगी। इसके बारे में पीयू को सोचना था लेकिन इस पर भी निर्णय नहीं हो पाया।

950 से अधिक चाहिए थे कर्मचारी
आरक्षण लागू करने के लिए पीयू व संबद्ध कॉलेजों को 950 से अधिक कर्मचारियों की जरूरत थी, लेकिन इस दिशा में भी पीयू ने कोई कार्रवाई नहीं की। कर्मचारियों की भर्तियों के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए। स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाने की भी योजना थी, जो नहीं हो पाई।


जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पीयू आगे नहीं बढ़ाना चाह रही। दो साल में संसाधनों की संख्या पीयू व शिक्षण संस्थानों में बढ़ जानी चाहिए थी। फर्नीचर आदि की व्यवस्था हो जानी चाहिए थी। हालांकि पीयू प्रथम चरण में कुछ कॉलेजों में यह लागू करना चाहती थी ताकि व्यवस्थाओं का पता लग सके। वह काम भी नहीं हो पाया।  

किसी कारण यह इस साल लागू नहीं हो पाया है। अगले साल इसे लागू कर दिया जाएगा। - आरके सिंगला, डीयूआई  (डीन ऑफ यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन)

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