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पंजाब यूनिवर्सिटी में शासन सुधार पर शुरू हुआ काम, 10 को होगी बैठक, शिक्षकों ने बनाए अपने प्रस्ताव  

Thu, 04 Mar 2021 03:56 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 04 Mar 2021 03:56 PM IST
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Work started on governance reform in Panjab University of Chandigarh
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

पंजाब विश्वविद्यालय में शासन सुधार पर काम शुरू हो गया है। 10 मार्च को इसके लिए पहली शासन सुधार के लिए बनाई गई समिति की उच्च स्तरीय बैठक होगी। इससे पहले पीयू के तमाम शिक्षकों ने शासन सुधार के जरिए अपने-अपने प्रस्ताव तैयार किए हैं, जो समिति के पूछने पर उनके सामने रखे जाएंगे।

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सबसे बड़ी मांग यही निकलकर आ रही है कि सीनेट में 91 सदस्यों की संख्या को घटाकर 40 तक लाया जाए और इसमें भी 60 फीसदी सीटें शिक्षकों से भरी जाएं यानी कैंपस का बोलबाला हो। 
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सीनेट का कार्यकाल हो दो साल का
पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट का कार्यकाल चार साल का होता है। कई शिक्षकों ने कहा, सीनेट का कार्यकाल दो साल का होना चाहिए। साथ ही एक सदस्य को दो ही कार्यकाल तक चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि अन्य लोगों को भी सीनेट में पहुंचने का अवसर मिल सके। चुनाव लड़ने का नियम केवल जीते हुए सदस्य के लिए लागू होना चाहिए, जबकि हारने वाला सदस्य कभी भी चुनाव लड़ सकता है।
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सीनेट में चंडीगढ़ व बाहर के अधिकारियों के लिए आठ से दस सीटें निर्धारित हैं। शिक्षक इनकी संख्या भी पांच तक लाने की मांग कर रहे हैं। नेताओं का बोलबाला भी सीनेट में कम से कम हो। शिक्षकों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों के विकास के बारे में सबसे अधिक कैंपस के लोग ही सोच सकते हैं और उनके दुख को बखूबी समझेंगे। 

पढ़े-लिखे सीनेट में पहुंचेंगे तो हर मुद्दे को गहराई से समझेंगे
सीनेट स्नातक वर्ग के चुनाव 15 सीटों के लिए होते हैं। राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा आदि राज्यों में बूथ बनाए जाते हैं। एक तो पैसा अधिक खर्च होता है और समय भी लगता है। शासन सुधार में इस बिंदु को शामिल किया जाना चाहिए कि इसकी सीटें घटाकर 6 तक लाई जाएं। यह छह सीटें तीन भागों में बांटी जानी चाहिए। दो स्नातक वर्ग, दो परास्नातक व दो सीटें पीएचडी धारकों के लिए हों। शिक्षकों का मानना है कि पीएचडी धारकों की संख्या देशभर में बहुत है। ऐसे में पढ़े-लिखे लोग सीनेट में पहुंचेंगे। हर मुद्दे को गहराई से समझेंगे।

हर फैकल्टी से दो शिक्षक चुने जाएं
शिक्षक मानते हैं कि इंजीनियरिंग विभाग अपने आप में काफी बड़ा है। यहां लगभग 100 शिक्षकों का स्टाफ है। ऐसे में यहां से दो संकाय सदस्य चुनकर सीनेट में पहुंचे। डेंटल कॉलेज का प्रावधान भी ऐसे ही किया जाए। जितने संकाय पीयू में हैं, उतने ही सदस्य चुनकर सीनेट में पहुंचे। इससे हर संकाय का प्रतिनिधित्व होगा और शिक्षकों की संख्या अधिक से अधिक होगी। पीयू की बेहतरी के लिए शिक्षक सोचेंगे।

डीन विषय विशेषज्ञ हों, योग्यता हो प्रोफेसर
अब तक डीन का चुनाव होता आ रहा है। 10 संकायों के लिए डीन चुने जाते हैं। इस चुनाव में कोई भी व्यक्ति हिस्सा ले सकता है। चाहे वह संकाय के बारे में जानकारी रखता हो या नहीं। ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि डीन का कार्य अपने में महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में डीन जो भी चुने जाएं वह विषय विशेषज्ञ हों और उनकी योग्यता कम से कम प्रोफेसर की हो ताकि वह विभाग को बखूबी जान सकें। कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, मेडिकल, एनीमल हस्बेंडरी, कानून, शिक्षा आदि संकायों के डीन पीयू में चुने जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि शासन सुधार में सबसे बड़ा बदलाव डीन के चयन को लेकर ही होगा।

सिंडीकेट सदस्यों की संख्या हो आठ तक
यह भी बात कैंपस के शिक्षकों से निकलकर आ रही है कि वह सिंडीकेट का विस्तार नहीं चाहते। उनका मानना है कि सिंडीकेट में सदस्यों की संख्या अधिक से अधिक 8 से 10 ही रहे। इसमें छह सदस्य शिक्षक हों। यह सदस्य सीनेट में न चुने गए हों। यानी सीनेट से अलग होने चाहिए। बाकी चार सदस्य भी वह रखे जाएं, जो सीनेट में चुनकर न गए हों। शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों का सीनेट में जाना ठीक भी माना जा रहा है और कुछ लोग इसे सही भी नहीं मान रहे।
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