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...तो इसलिए नहीं बढ़ रहा पीयू में छात्र संघ चुनाव में वोट प्रतिशत, कई कारण आए सामने

Thu, 05 Sep 2019 01:06 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 05 Sep 2019 01:06 PM IST
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Vote Percentage in Punjab University Student Council Elections
छात्र संघ चुनाव प्रचार करते नेता - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ के लगभग प्रत्येक कॉलेज में चार हजार से सात हजार तक स्टूडेंट्स पढ़ते हैं, लेकिन छात्रसंघ चुनावों में हर कॉलेज से सिर्फ दो से तीन हजार स्टूडेंट्स ही वोट करते हैं। इसमें भी लड़कियों की हिस्सेदारी काफी कम होती है। ऐसा किसी एक में नहीं बल्कि हर कॉलेज में होता है। इस बारे में जब कॉलेज के छात्रों से बात की गई तो कई कारण सामने निकल कर आए।
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कई छात्रों ने कहा कि कोई भी कॉलेज खुद पूरे मन से चुनाव का आयोजन नहीं करता। कई बार ऐसा देखने को मिला है कि टीचर खुद क्लासरूम में चुनाव को समय बर्बाद बता कर इससे दूर रहने को कहते हैं। फ्रेशर स्टूडेंट्स को जैसा बताया जाता है, वह वैसा ही करते हैं इसलिए वह वोट देने नहीं पहुंचते। छात्रों ने कहा, कॉलेजों को चुनाव एक त्योहार की तरह कराना चाहिए, इससे वोट प्रतिशत में इजाफा हो सकता है।
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क्या कहते हैं स्टूडेंट्स...

कम वोटिंग का जिम्मेदार ही कॉलेज प्रशासन
कॉलेज में स्टूडेंट्स 7000 हैं, लेकिन वोट देने सिर्फ तीन हजार के आसपास आते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण खुद कॉलेज हैं। यहां छात्रसंघ चुनाव को बोझ समझा जाता है, जिसे कालेज प्रशासन किसी तरह से संपन्न करा कर बचना चाहता है। टीचर्स खुद मना करते हैं, तो वोट प्रतिशत कैसे बढ़ेगा।
- नंदिनी, बीएससी सेकेंड ईयर

टीचर ही करते हैं मना तो कैसे बढ़ेगी लड़कियों की हिस्सेदारी
चुनाव के माध्यम से छात्र नेता सभी स्टूडेंट्स से मिलते हैं। कॉलेज के सीनियर टीचर ही स्टूडेंट्स को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने से रोकते हैं। कॉलेजों को यह सबकुछ समय बर्बाद करना लगता है। कैंपेनिंग नहीं करने दिया जाता। ग्रुप डिस्कशन नहीं करने देते, ऐसे चुनाव का क्या फायदा। शायद इसलिए ही लड़कियों की हिस्सेदारी कम है।
- अमीशा, बीएससी सेकेंड ईयर

स्टूडेंट चुनाव की गलत इमेज बनाई
लड़कियों को ऐसा बताया जाता है कि चुनाव ठीक नहीं होते। इस दौरान मारपीट की घटनाएं होती हैं। चुनाव की इमेज की ऐसी बनाई गई कि लड़कियां इससे दूर रहती हैं। कालेज को चुनाव कराने के लिए पर्याप्त माहौल दिया जाना चाहिए। छात्र नेताओं पर कॉलेज जानबूझ कर बेवजह के बंदिशें लगा दिए जाते हैं।
- अंशुल, बीबीए फाइनल ईयर

कॉलेजों में चुनाव त्योहार की तरह कराएं  
कालेजों में होने वाले चुनाव को लेकर गलतफहमी फैलाई गई है। लड़कियों की हिस्सेदारी तबतक नहीं बढ़ेगी, जबतक कालेज उन्हें चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते। कालेजों को चुनाव एक त्योहार की तरह कराना चाहिए लेकिन यहां उल्टा बोझ समझा जाता है। इस इमेज को बदलना होता, तभी बदलाव संभव है।
- तेजवंत सिंह, बीए सेकेंड ईयर

समस्या नहीं होती है हल, इसलिए कम होती है वोटिंग
वोटिंग प्रतिशत कम होने का सबसे बड़ा कारण स्टूडेंट्स में जागरूकता की कमी है। इसलिए वह इलेक्शन में रुचि नहीं लेते। इलेक्शन लड़ रहे कुछ केडिंडेट्स इलेक्शन के समय तो बहुत बड़ी बड़ी बातें करते हैं, लेकिन पूरा साल उन मुद्दों पर कोई कार्य नहीं होता यह भी वोटिंग न करने का एक कारण है।
- तेजस्वनी, जीसीजी-42

वोटिंग के दिन क्लास न होने से कम होती है वोटिंग
इलेक्शन के दिन कोई क्लास नहीं लगती। दूर से आने वाले स्टूडेंट उस दिन छुट्टी पर रहते हैं। इसलिए वोटिंग कम होती है। इलेक्शन को लेकर स्टूडेंट्स में जागरूकता की काफी कमी है। मुझे लगता है स्टूडेंट्स को इलेक्शन लड़ रहे प्रतिभागियों को जागरूक करना चाहिए ,ताकि वह अपने राइट को समझ सके।
- सुनिति, जीसीजी-42
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