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NIRF की रैकिंग में मुंह के बल धड़ाम गिरी पंजाब यूनिवर्सिटी, इस वजह से देखिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 04 Apr 2017 04:46 PM IST
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Punjab University Professor Arun Kumar Grover
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नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की रैकिंग में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ मुंह के बल धड़ाम से गिरी। इसके पीछे कई कारण रहे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सोमवार को पर के आधार उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग जारी कर दी। इसमें पीयू को 43.13 अंकों के साथ 33वां रैंक मिला। जबकि पिछले साल इसी रैंकिंग फ्रेमवर्क में पीयू का 76.2 अंकों के साथ 12वां रैंक था।
ओवरऑल केटेगरी में पीयू 43.13 अंकों के साथ 54वें स्थान पर रही। रैंकिंग में पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण साल भर गर्माने वाला वित्तीय संकट का मामला रहा। सोमवार को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली में यह रैंकिंग जारी की। यूनिवर्सिटी के साथ कॉलेज, इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट, फार्मेसी और मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की भी रैंकिंग जारी की गई है। मैनेजमेंट में तो चंडीगढ़ का कोई इंस्टीट्यूट टॉप-100 की सूची में जगह ही नहीं बना पाया।
पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालाजी (पेक) का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा। पेक 37.44 अंकों के साथ 85वें रैंक पर रहा। जबकि 2016 में पेक का 38 रैंक था। इस तरह से पेक का भी शर्मनाक प्रदर्शन रहा। फार्मेसी केटेगरी में पीयू के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज ने नाक बचा ली। इस इंस्टीट्यूट को 69.59 अंकों के साथ तीसरा रैंक मिला।
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सभी केटेगरी में टॉप-10 में जगह बनाने वाला चंडीगढ़ का यह एक मात्र संस्थान है। हालांकि पिछले साल इस इंस्टीट्यूट को दूसरा रैंक मिला था। जो इस बार तीसरे पर खिसक गया। मोहाली का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च मोहाली 73.18 अंकों के साथ दूसरे रैंक पर रहा।
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ओवरऑल केटेगरी में पीयू 43.13 अंकों के साथ 54वें स्थान पर रही। रैंकिंग में पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण साल भर गर्माने वाला वित्तीय संकट का मामला रहा। सोमवार को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली में यह रैंकिंग जारी की। यूनिवर्सिटी के साथ कॉलेज, इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट, फार्मेसी और मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की भी रैंकिंग जारी की गई है। मैनेजमेंट में तो चंडीगढ़ का कोई इंस्टीट्यूट टॉप-100 की सूची में जगह ही नहीं बना पाया।
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पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालाजी (पेक) का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा। पेक 37.44 अंकों के साथ 85वें रैंक पर रहा। जबकि 2016 में पेक का 38 रैंक था। इस तरह से पेक का भी शर्मनाक प्रदर्शन रहा। फार्मेसी केटेगरी में पीयू के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज ने नाक बचा ली। इस इंस्टीट्यूट को 69.59 अंकों के साथ तीसरा रैंक मिला।
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सभी केटेगरी में टॉप-10 में जगह बनाने वाला चंडीगढ़ का यह एक मात्र संस्थान है। हालांकि पिछले साल इस इंस्टीट्यूट को दूसरा रैंक मिला था। जो इस बार तीसरे पर खिसक गया। मोहाली का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च मोहाली 73.18 अंकों के साथ दूसरे रैंक पर रहा।
तीन कॉलेज टॉप-100 सूची में
पीयू स्टूडेंट काउंसिल
- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ के तीन कॉलेज टॉप-100 सूची में जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज फॉर गर्ल्स-11 46.54 अंकों के साथ 32वें रैंक पर रहा। एसडी कॉलेज-32 44.56 अंकों के साथ 41वें रैंक और डीएवी कॉलेज फॉर वुमन-36 38.84 अंकों के साथ 74वें रैंक पर रहा। दिल्ली का मिरांडा कॉलेज 69.39 अंकों के साथ देश भर में पहले रैंक पर रहा।
इन पैमानों पर परखा गया
टीचिंग एंड लर्निंग रिसोर्सेस
रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रेक्टिस
ग्रेजुएशन आउटकम
आउटरिच एंड इनक्ल्यूसिविटी
अनुभव या धारणा
इन पैमानों पर परखा गया
टीचिंग एंड लर्निंग रिसोर्सेस
रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रेक्टिस
ग्रेजुएशन आउटकम
आउटरिच एंड इनक्ल्यूसिविटी
अनुभव या धारणा
यह रहे रैंकिंग गिरने के कारण
पंजाब यूनिवर्सिटी हॉस्टल की गर्ल्स ने किया विरोध प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
वित्तीय संकट
पंजाब यूनिवर्सिटी में वित्तीय संकट इस कदर रहा कि स्टाफ की सेलरी तक समय पर नहीं मिल पाई। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के दखल से एग्जामिनेशन फीस से जुटाई गई राशि से सेलरी दी गई। बाद में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ही यूजीसी ने ग्रांट जारी की। इस मुद्दे पर पीयू टीचिंग और नॉन टीचिंग एसोसिएशन लगातार इस मुद्दे पर पीयू प्रशासन को घेरती रही। अभी तक भी प्रदर्शन चल रहे हैं।
आय के स्त्रोत नहीं होना
पीयू आय के स्त्रोत सीमित हैं। इस बार भी करीब 244 करोड़ रुपये घाटे का बजट पेश किया गया है। आय बढ़ाने के लिए एमएचआरडी लगातार पीयू प्रशासन पर दबाव बनाती रही है। पिछले साल भी घाटे का ही बजट पेश किया गया था। आय और मिलने वाली ग्रांट का अंतर लगातार बढ़ा है।
11 गुणा फीस बढ़ोत्तरी
पीयू ने घाटे को कम करने और आय बढ़ाने का बोझ स्टूडेंट्स पर डाल दिया। 11 गुणा फीस एक साथ बढ़ा दी। पीयू केइतिहास में पहली बार इतनी बढ़ोत्तरी हुई है। एमबीए की फीस 9400 से बढ़कर सीधी 1 लाख पहुंच गई। दूसरे कोर्सेज की फीस भी इसी तरह से बढ़ी। बीए, बीकॉम की 2200 से बढ़कर 10 हजार हो गई।
स्टाफ की कमी
पीयू में टीचिंग और नॉन टीचिंग दोनों ही केटेगरी में स्टाफ की बड़ी कमी है। शिक्षकों केसौ से अधिक पद रिक्त हैं। नॉन टीचिंग रिक्त पदों की संख्या तो इससे भी अधिक है। एमएचआरडी ने नए पद सेंक्शन करने पर रोक लगा रखी है। रिक्त सेंक्शन पदों पर भी भर्ती नहीं हो पा रही है। आउटसोर्स के सहारे अधिकतर काम चल रहा है।
पंजाब यूनिवर्सिटी में वित्तीय संकट इस कदर रहा कि स्टाफ की सेलरी तक समय पर नहीं मिल पाई। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के दखल से एग्जामिनेशन फीस से जुटाई गई राशि से सेलरी दी गई। बाद में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ही यूजीसी ने ग्रांट जारी की। इस मुद्दे पर पीयू टीचिंग और नॉन टीचिंग एसोसिएशन लगातार इस मुद्दे पर पीयू प्रशासन को घेरती रही। अभी तक भी प्रदर्शन चल रहे हैं।
आय के स्त्रोत नहीं होना
पीयू आय के स्त्रोत सीमित हैं। इस बार भी करीब 244 करोड़ रुपये घाटे का बजट पेश किया गया है। आय बढ़ाने के लिए एमएचआरडी लगातार पीयू प्रशासन पर दबाव बनाती रही है। पिछले साल भी घाटे का ही बजट पेश किया गया था। आय और मिलने वाली ग्रांट का अंतर लगातार बढ़ा है।
11 गुणा फीस बढ़ोत्तरी
पीयू ने घाटे को कम करने और आय बढ़ाने का बोझ स्टूडेंट्स पर डाल दिया। 11 गुणा फीस एक साथ बढ़ा दी। पीयू केइतिहास में पहली बार इतनी बढ़ोत्तरी हुई है। एमबीए की फीस 9400 से बढ़कर सीधी 1 लाख पहुंच गई। दूसरे कोर्सेज की फीस भी इसी तरह से बढ़ी। बीए, बीकॉम की 2200 से बढ़कर 10 हजार हो गई।
स्टाफ की कमी
पीयू में टीचिंग और नॉन टीचिंग दोनों ही केटेगरी में स्टाफ की बड़ी कमी है। शिक्षकों केसौ से अधिक पद रिक्त हैं। नॉन टीचिंग रिक्त पदों की संख्या तो इससे भी अधिक है। एमएचआरडी ने नए पद सेंक्शन करने पर रोक लगा रखी है। रिक्त सेंक्शन पदों पर भी भर्ती नहीं हो पा रही है। आउटसोर्स के सहारे अधिकतर काम चल रहा है।
पीयू अफसरों ने दी सफाई
पीयू स्टूडेंट काउंसिल
- फोटो : अमर उजाला
कुछ हद तक पैसों की कमी भी रैंकिंग गिरने का कारण हो सकती है। वित्तीय संकट से पीयू साल भर जूझती रही। जिससे छवि राष्ट्रीय स्तर पर खराब हुई। पैसों की वजह से रिसर्च और टीचिंग का प्रभावित होना लाजिमी है। लेकिन उन्हें नहीं लगता कि पीयू का रिसर्च वर्क बेहतर नहीं रहा है। कई आयाम रिसर्च और टीचिंग में कायम किए हैं। पीयू प्रशासन को अपनी कमियों पर नए सिरे से काम करना होगा।
- प्रो. डा. प्रोमिला पाठक, प्रेजिडेंट, पुटा।
बजट नहीं मिलने से एजुकेशन और रिसर्च बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। बिना पैसों के काम में गुणवत्ता नहीं आ सकती। पीयू एक ऐतिहासिक यूनिवर्सिटी है। इस तरह से रैंकिंग नीचे आएगी तो यूनिवर्सिटी का भविष्य अंधकार मय है। नॉन टीचिंग स्टाफ यूनिवर्सिटी को बढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत करता है। लेकिन इस सब का कोई फायदा नहीं है। एमएचआरडी और पंजाब सरकार को चाहिए कि वह माली हालत से उबारने में पीयू का सहयोग दे।
- दीपक कौशिक, प्रेसिडेंट, पीयू नॉन टीचिंग एसोसिएशन।
- प्रो. डा. प्रोमिला पाठक, प्रेजिडेंट, पुटा।
बजट नहीं मिलने से एजुकेशन और रिसर्च बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। बिना पैसों के काम में गुणवत्ता नहीं आ सकती। पीयू एक ऐतिहासिक यूनिवर्सिटी है। इस तरह से रैंकिंग नीचे आएगी तो यूनिवर्सिटी का भविष्य अंधकार मय है। नॉन टीचिंग स्टाफ यूनिवर्सिटी को बढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत करता है। लेकिन इस सब का कोई फायदा नहीं है। एमएचआरडी और पंजाब सरकार को चाहिए कि वह माली हालत से उबारने में पीयू का सहयोग दे।
- दीपक कौशिक, प्रेसिडेंट, पीयू नॉन टीचिंग एसोसिएशन।