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चंडीगढ़ शिक्षा विभाग का फैसला, 11वीं कक्षा के दाखिले में इस साल भी लागू नहीं होगा यूटी पूल कोटा
Sat, 20 Apr 2019 03:18 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 20 Apr 2019 03:18 PM IST
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चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में 11वीं के दाखिले में यूटी पूल कोटा लागू नहीं होगा। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के दाखिले के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। यूटी के शिक्षा विभाग की ओर से पिछले साल यह प्रस्ताव तैयार किया गया था कि शहर के सरकारी स्कूलों में ग्यारहवीं कक्षा में 85 फीसदी सीटें चंडीगढ़ में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए आरक्षित होंगी। शहर के कालेजों की तरह सरकारी स्कूलों में भी यूटी पूल कोटा सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव था। शिक्षा विभाग के सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने कहा है कि इस साल भी पहले की तरह ही दाखिले होंगे।
विभाग द्वारा एक सर्वे कराने के बाद यह पता चला कि शहर के सरकारी स्कूलों में पहले से ही 80 से 85 प्रतिशत छात्र चंडीगढ़ के ही हैं, ऐसे में यूटी पूल कोटा की जरूरत नहीं है। शहर के कॉलेजों में दाखिले के लिए यूटी पूल है। इसके तहत चंडीगढ़ से 10वीं व 12वीं करने वालों के लिए शहर के कॉलेजों की 85 फीसदी सीटें होती हैं। बाकी 15 फीसदी पर यूटी के बाहर के विद्यार्थियों को दाखिला मिलता है। स्कूलों में वर्ष 2018 में यह कह कह इसे लागू नहीं किया गया था कि इसे अगले शिक्षा सत्र (2019-20) से लागू किया जाएगा।
इस साल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चुनाव आचार संहिता का हवाला देते हुए कहा कि मई तक दाखिले को लेकर कोई नई नीति नहीं अपनाई जा सकती है। इसलिए इस साल भी ग्यारहवीं में यूटी पूल कोटा लागू नहीं होगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्कूलों में करीब 80 फीसदी विद्यार्थी पहले ही चंडीगढ़ से हैं। ऐसे में यूटी के स्टूडेंट्स के लिए अलग से 85 फीसदी कोटा लागू करने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि चंडीगढ़ में रहने वाले अभिभावक लंबे समय से स्कूलों में यूटी पूल की मांग कर रहे हैं।
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शिक्षा विभाग का फैसला, इस बार सिर्फ दो काउंसलिंग
सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया जून में शुरू होती है। यह प्रक्रिया अगस्त के अंत तक चलती है। इस बार शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। एजुकेशन सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने बताया कि इस साल 11वीं में दाखिला के लिए सिर्फ दो ही काउंसिलिंग आयोजित की जाएंगी। पिछले साल सात बार काउंसलिंग करने की जरूरत पड़ी थी।
काउंसलिंग देर तक चलने से छात्रों की पढ़ाई काफी प्रभावित होती है। गौरतलब है कि शहर में 40 सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं, जिनमें ग्याहरवीं कक्षा के लिए करीब 13,500 सीटें है। उसके लिए हर वर्ष करीब 16 हजार से ज्यादा आवेदन पत्र जमा होते हैं हैं। ऐसे में सीटों के भरने के बाद 2,500 विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो दाखिला पाने से वंचित रह जाते हैं। ग्यारहवीं कक्षा में दाखिला लेने के लिए मोहाली, पंचकूला और जीरकपुर के विद्यार्थी भी यहां आते हैं।
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विभाग द्वारा एक सर्वे कराने के बाद यह पता चला कि शहर के सरकारी स्कूलों में पहले से ही 80 से 85 प्रतिशत छात्र चंडीगढ़ के ही हैं, ऐसे में यूटी पूल कोटा की जरूरत नहीं है। शहर के कॉलेजों में दाखिले के लिए यूटी पूल है। इसके तहत चंडीगढ़ से 10वीं व 12वीं करने वालों के लिए शहर के कॉलेजों की 85 फीसदी सीटें होती हैं। बाकी 15 फीसदी पर यूटी के बाहर के विद्यार्थियों को दाखिला मिलता है। स्कूलों में वर्ष 2018 में यह कह कह इसे लागू नहीं किया गया था कि इसे अगले शिक्षा सत्र (2019-20) से लागू किया जाएगा।
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इस साल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चुनाव आचार संहिता का हवाला देते हुए कहा कि मई तक दाखिले को लेकर कोई नई नीति नहीं अपनाई जा सकती है। इसलिए इस साल भी ग्यारहवीं में यूटी पूल कोटा लागू नहीं होगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्कूलों में करीब 80 फीसदी विद्यार्थी पहले ही चंडीगढ़ से हैं। ऐसे में यूटी के स्टूडेंट्स के लिए अलग से 85 फीसदी कोटा लागू करने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि चंडीगढ़ में रहने वाले अभिभावक लंबे समय से स्कूलों में यूटी पूल की मांग कर रहे हैं।
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शिक्षा विभाग का फैसला, इस बार सिर्फ दो काउंसलिंग
सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया जून में शुरू होती है। यह प्रक्रिया अगस्त के अंत तक चलती है। इस बार शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। एजुकेशन सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने बताया कि इस साल 11वीं में दाखिला के लिए सिर्फ दो ही काउंसिलिंग आयोजित की जाएंगी। पिछले साल सात बार काउंसलिंग करने की जरूरत पड़ी थी।
काउंसलिंग देर तक चलने से छात्रों की पढ़ाई काफी प्रभावित होती है। गौरतलब है कि शहर में 40 सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं, जिनमें ग्याहरवीं कक्षा के लिए करीब 13,500 सीटें है। उसके लिए हर वर्ष करीब 16 हजार से ज्यादा आवेदन पत्र जमा होते हैं हैं। ऐसे में सीटों के भरने के बाद 2,500 विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो दाखिला पाने से वंचित रह जाते हैं। ग्यारहवीं कक्षा में दाखिला लेने के लिए मोहाली, पंचकूला और जीरकपुर के विद्यार्थी भी यहां आते हैं।