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पीयू के 40 से अधिक शिक्षकों ने दर्ज कराई आपत्ति, बोले- वेतन कटा तो लेंगे कानूनी प्रक्रिया का सहारा

Tue, 23 Jul 2019 02:06 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 23 Jul 2019 02:06 PM IST
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teachers against membership fees extended by puta, chandigarh
डेमो पिक
पुटा की ओर से बढ़ाए गए ढाई गुना सदस्यता शुल्क मामले में 40 से अधिक शिक्षकों ने पीयू के एफडीओ कार्यालय को सूचना दी है कि उनका सदस्यता शुल्क वेतन से न काटा जाए। इनके अलावा कुछ शिक्षकों ने मौखिक फोन के जरिये भी ऑब्जेक्शन दर्ज कराया है। कुछ शिक्षकों ने यह भी कहा है कि वेतन उनका है, उन्हें पूरा मिलना चाहिए, किसी को कटौती करनी है तो वह हमसे अनुमति लें। यदि वेतन कटा तो फिर कानूनी प्रक्रिया अपनाएंगे।
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वहीं दूसरी ओर पुटा का कहना है कि शिक्षकों ने ऑब्जेक्शन दर्ज नहीं कराया है। पुटा का सदस्यता शुल्क वेतन से काटने को लेकर जिन शिक्षकों को कोई आपत्ति है उन्हें सोमवार की सुबह साढ़े नौ बजे तक दर्ज करानी थी। सूत्रों का कहना है कि 40 शिक्षकों ने लिखित में दिया है। कई ने मौखिक भी विभाग को बताया है। इसके अलावा कुछ टीचरों ने मेल तो कुछ ने मैसेज के जरिये एफडीओ कार्यालय को इस बारे में अवगत कराया है।
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बताया जा रहा है कि जिन शिक्षकों ने आपत्ति दर्ज कराई है उनका वेतन नहीं काटा जाएगा। उनसे पुटा के सदस्य मिलेंगे और कारण जानेंगे। उन्हें संतुष्ट करेंगे। उन्हें सदस्यता लेनी है तो वह कैश भी दे सकते हैं। फिलहाल शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ शिक्षक वेतन कटने पर कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने की तैयारी कर रहे हैं। पुटा सचिव प्रो. जेके गोस्वामी कहते हैं कि शिक्षकों ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।
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शिक्षकों की एक सुर में मांग, पहले हिसाब दो, फिर शुल्क लो
कई शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने पुटा से पुरानी रकम का हिसाब माना है। कितनी रकम खर्च हुई और कितनी बची है, इसका हिसाब दे दिया जाए। यदि पुटा के पास पैसे नहीं हैं तो शिक्षक 500 शुल्क की बजाय 700 रुपये भी देने को तैयार हैं लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर पुटा हिसाब देने में क्यों हिचक रही है। इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए। 
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