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चंडीगढ़ः पंजाब यूनिवर्सिटी में साल के अंतिम दिन भी बंदरों का आतंक, डरे-सहमे रहे छात्र

Tue, 01 Jan 2019 04:15 AM IST
ajay kumar रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 01 Jan 2019 04:15 AM IST
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Students troubled by monkeys at Punjab University in chandigarh
पंजाब यूनिवर्सिटी

 देश की पुरानी यूनिवर्सिटी में से एक पंजाब यूनिवर्सिटी में बंदरों का आतंक यहां के विद्यार्थियों से लेकर शिक्षकों के लिए सिरदर्दी बन गई है। आलम यह है कि बंदर कैंपस से लेकर रूम तक हर जगह नजर आते हैं। यही हाल सोमवार को साल के अंतिम दिन नजर आया। स्टूडेंट सेंटर में जो विद्यार्थी अपनी यादों को ताजा करने पहुंचे, वे यहां बैच पर बंदर के लंच टेबल पर आतंक को देख डर के मारे भागते नजर आए। ये बंदर इस कदर स्टूडेंट सेंटर में आजादी से घूमते नजर आए, जैसे इन्हें किसी का खौफ नहीं। दोपहर के समय सेंटर में लंच कर रहे विद्यार्थियों की प्लेट छीनकर ये खाते हुए नजर आए। 

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पूरे साल बंदरों से विद्यार्थी एवं स्टाफ रहा परेशान 
2018 में पंजाब यूनिवर्सिटी के शिक्षकों से लेकर विद्यार्थी सभी कैंपस में बंदरों की संख्या बढ़ने व इनके आतंक से परेशान नजर आए। जून महीने में यूआइईटी की काउंसिलिंग में लगे स्टाफ के लिए खाना तैयार कर रही लेबर 15 से 20 बंदरों के झुंड ने हमला बोल दिया था। लॉ ऑडिटोरियम में काम कर रहे ये लोग किसी तरह जान बचाकर वहां से भागे। 

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Students troubled by monkeys at Punjab University in chandigarh
पंजाब यूनिवर्सिटी

बंदरों का उत्पात यहीं नहीं रुका। करीब एक घंटे तक बंदरों ने स्टूडेंट सेंटर पर जमकर उत्पात मचाया था। वहां खाना खा रहे कई स्टूडेंट्स पर भी बंदर झपटे थे। इससे पहले भी हॉस्टल नंबर- 5 में जाते एक मेस कर्मी को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इसके बावजूद किसी भी सिक्योरिटी या प्रशासनिक अधिकारी ने मामले का संज्ञान नहीं लिया। वहीं, फार्मास्यूटिकल साइंस विभाग, लीगल स्टडीज, यूबीएस और लॉ विभाग के पास भी बंदरों की संख्या भी दोबारा से बढ़ गई है। 

चार लाख में रखे बंदर भगाने के स्पेशलिस्ट, बेअसर
पीयू प्रशासन ने चार लाख में एक साल के बंदर भगाने के लिए चार एक्सपर्ट रखे थे, लेकिन इनका कोई अता-पता नहीं है। वहीं इस बार हॉस्टल नंबर 5 के कर्मी को बंदरों ने गंभीर घायल भी कर दिया था। 2018 में कुछ महीनों ही 6 से 8 मामले मंकी बाइट के केस आ चुके हैं। इसके बाद भी हालात में सुधार नहीं हो रहा है।  

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