फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Students seeking information about Industrial Design course in Punjab Engineering College

चंडीगढ़: पेक में अब आ रहे हैं इंडस्ट्रियल डिजाइन पढ़ने वाले, छात्रों की कम संख्या की वजह से बंद करना पड़ा था कोर्स

Thu, 04 Nov 2021 01:04 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 04 Nov 2021 01:04 PM IST
सार

एक उत्पाद को बेहतर बनाने के लिए जो कला लागू होती है, उसके बारे में इस कोर्स में पढ़ाया जाता है। कला और विज्ञान का मिश्रण करते हुए विद्यार्थी बाजार और ग्राहक दोनों के लिए फायदेमंद उत्पाद डिजाइन तैयार करता है। डिजाइन हर उत्पाद को चाहिए। हर उद्योग को चाहिए, यानी इसका क्षेत्र विस्तृत है। क्योंकि बिना डिजाइन के न उद्योग आगे बढ़ सकते और न वह ग्राहकों की पसंद बन सकते। ऐसे में यह कोर्स अपने में बहुत महत्व रखता है। मुंबई, बंगलूरू, हरियाणा, गुजरात समेत कई प्रदेशों के शिक्षण संस्थानों में यह कोर्स दौड़ रहा है। शुरुआत में प्लेसमेंट का पैकेज छह लाख सालाना रहता है।

विज्ञापन
Students seeking information about Industrial Design course in Punjab Engineering College
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज

विस्तार

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) में एमटेक इंडस्ट्रियल डिजाइन कोर्स बंद हो गया है लेकिन कुछ विद्यार्थी इस कोर्स में दाखिला लेने पेक पहुंच रहे हैं। हालांकि, उन्हें आश्वासन यही दिया गया कि यह कोर्स बंद हो चुका है। इसका दोबारा संचालन अब आसान नहीं है, क्योंकि पेक का पहला अनुभव अच्छा नहीं रहा।

विज्ञापन


ऐसे खड़ा हुआ विभाग
पेक ने एमटेक इंडस्ट्रियल डिजाइन कोर्स का शुभारंभ वर्ष 2017-18 में किया था। इस कोर्स की शुरुआत सही रही। 18 सीटों में से 15 सीटों पर दाखिले हुए। कोर्स की दो साल की फीस 3.03 लाख रुपये रखी गई। स्नातक के बाद इस कोर्स में विद्यार्थियों को एडमिशन लेना था। शुरुआत ठीक होने के बाद अगले साल वर्ष 2018-19 में इस कोर्स में महज तीन ही छात्रों ने एडमिशन के लिए अप्लाई किया।
विज्ञापन

इसके कारण कोर्स का संचालन मुश्किल हो गया।

शर्त थी कि कम से कम 50 फीसदी सीटें भरने पर ही कोर्स संचालित किया जा सकता है। इससे बुरा हाल अगले वर्षों में हो गया। वर्ष 2019-20 में एक भी छात्र ने एडमिशन के लिए आवेदन नहीं किया। चालू सत्र 2020-21 में दाखिले के लिए फिर पेक ने कोशिश की, लेकिन इसके लिए भी आवेदन पेक को नहीं मिले। 

विज्ञापन
विज्ञापन

तीन साल से लगातार इस कोर्स में छात्रों की रुचि न होने के कारण पेक को इस कोर्स को बंद करने का निर्णय लिया और सीनेट के सामने इस हकीकत को रखा। सीनेट ने इस पर मुहर लगा दी। संगरूर के रहने वाले छात्र विनोद सिंह, करतार सिंह दो दिन पहले पेक पहुंचे थे। वह इस कोर्स के बारे में जानकारी लेने गए थे। एक अधिकारी ने बताया कि कोर्स यह बंद हो चुका है। दोबारा संचालन होगा या नहीं, यह पता नहीं।

इसलिए फ्लॉप हुआ कोर्स

  • कोर्स संचालन से पहले पेक को एक सर्वे करना चाहिए था। विद्यार्थियों की रुचि भी देखी जानी चाहिए थी।
  • कोर्स का प्रचार-प्रसार होना चाहिए था। इसके लिए ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यमों का प्रयोग होना था।
  • विद्यार्थियों को यह बताना था कि डिजाइन का बाजार बहुत बड़ा है। प्लेसमेंट भी अच्छा है।
  • यह बताया जाता कि प्रतिस्पर्धा इस क्षेत्र में कम होने के कारण नौकरी आसानी से मिलती है।
  • सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को इस कोर्स के फायदों के बारे में बताना चाहिए था।
  • सरकारी सिस्टम है। प्रचार-प्रसार करने में आनाकानी की गई और उसका हश्र सामने है। निजी कॉलेज होता तो यह कोर्स दौड़ रहा होता।

यहां खुले हैं नौकरी के रास्ते

  • किसी भी उद्योग में डिजाइनर का पद मिल सकता है
  • औद्योगिक डिजाइन इंजीनियर बना जा सकता है
  • मॉडलिंग, परीक्षण और उत्पादन में इसके प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है
  • अनुसंधान के संचालन में परियोजना डिजाइन करनी होती है, वहां इसके लिए प्रशिक्षित होना चाहिए
  • किसी भी शिक्षण संस्थानों में व्याख्याता बना जा सकता है
  • कंपनियों में बिजनेस डायरेक्टर, प्रोजेक्ट मैनेजर, लेक्चरर आदि की नियुक्तियां इन्हीं विद्यार्थियों से होती है
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed