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चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल कर रहे मनमानी, ट्रांसफर सर्टिफिकेट लिए हफ्ते से भटक रहे स्टूडेंट्स
Fri, 09 Aug 2019 10:48 AM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 09 Aug 2019 10:48 AM IST
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सरकारी स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ की कालोनी नंबर-4 के स्कूल में पढ़ने वाले कई स्टूडेंट्स पिछले एक हफ्ते से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को शिक्षक यह कहकर ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) जारी कर रहे हैं कि स्कूल बंद होने वाला है। स्टूडेंट्स को अन्य स्कूलों में दाखिला लेने को कहा गया है, लेकिन पेरेंट्स ने आरोप लगाया कि अन्य कोई स्कूल बच्चों को दाखिला नहीं दे रहा है, जिससे सैकड़ों बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
कॉलोनी नंबर 4 स्थित सरकारी स्कूल 10वीं तक है। पिछले करीब 15 दिनों से स्कूल में नाम मात्र पढ़ाई हो रही है। इसके पीछे कई कारण हैं, क्योंकि 20 से 31 जुलाई तक स्कूल की कई कक्षाओं में स्टेट ऑफिस और हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों ने कब्जा जमाए रखा। दूसरा, कालोनी के शिफ्ट होने के बाद स्कूल के आधे स्टूडेंट्स मलोया शिफ्ट हो गए, इनके साथ कई टीचर्स व स्कूल के फर्नीचर को भी शिफ्ट कर दिया गया। जिससे बाकी बचे स्टूडेंट्स को ठीक से नहीं पढ़ाया जा रहा। तीसरा, स्कूल के बंद होने की खबरों के बाद से स्कूल के ज्यादातर टीचर्स टीसी देने व अन्य कामों में व्यस्त रहते हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि बुधवार को एक रूम में दो-दो कक्षाओं (चौथी व पांचवीं) को बिठाया गया था। स्कूल का ज्यादातर फर्नीचर मलोया भेज दिया गया है, ऐसे में यह बच्चे नीचे दरी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। पैरेंट्स का कहना है कि जो परिवार अभी कालोनी में रह रहे हैं, उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उनकी मांग है कि स्कूल को बंद न किया जाए। क्योंकि इस स्कूल में सिर्फ कालोनी नहीं बल्कि विकास नगर, दड़वा, हल्लोमाजरा आदि जगहों से भी बच्चे पढ़ने आते हैं। वहीं, पिछले कई दिनों से स्कूल में मिड-डे मील का खाना भी नहीं आ रहा है। कारण है कि स्कूल ने बर्तनों को मलोया भेज दिया। अब यहां के बच्चों के लिए बर्तन ही नहीं है।
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कॉलोनी नंबर 4 स्थित सरकारी स्कूल 10वीं तक है। पिछले करीब 15 दिनों से स्कूल में नाम मात्र पढ़ाई हो रही है। इसके पीछे कई कारण हैं, क्योंकि 20 से 31 जुलाई तक स्कूल की कई कक्षाओं में स्टेट ऑफिस और हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों ने कब्जा जमाए रखा। दूसरा, कालोनी के शिफ्ट होने के बाद स्कूल के आधे स्टूडेंट्स मलोया शिफ्ट हो गए, इनके साथ कई टीचर्स व स्कूल के फर्नीचर को भी शिफ्ट कर दिया गया। जिससे बाकी बचे स्टूडेंट्स को ठीक से नहीं पढ़ाया जा रहा। तीसरा, स्कूल के बंद होने की खबरों के बाद से स्कूल के ज्यादातर टीचर्स टीसी देने व अन्य कामों में व्यस्त रहते हैं।
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अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि बुधवार को एक रूम में दो-दो कक्षाओं (चौथी व पांचवीं) को बिठाया गया था। स्कूल का ज्यादातर फर्नीचर मलोया भेज दिया गया है, ऐसे में यह बच्चे नीचे दरी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। पैरेंट्स का कहना है कि जो परिवार अभी कालोनी में रह रहे हैं, उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उनकी मांग है कि स्कूल को बंद न किया जाए। क्योंकि इस स्कूल में सिर्फ कालोनी नहीं बल्कि विकास नगर, दड़वा, हल्लोमाजरा आदि जगहों से भी बच्चे पढ़ने आते हैं। वहीं, पिछले कई दिनों से स्कूल में मिड-डे मील का खाना भी नहीं आ रहा है। कारण है कि स्कूल ने बर्तनों को मलोया भेज दिया। अब यहां के बच्चों के लिए बर्तन ही नहीं है।
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डीईओ के आदेश भी नहीं मान रहे स्कूल के प्रिंसिपल
कॉलोनी नंबर 4 के शिफ्ट होने के बाद डीईओ अनुजीत कौर ने शहर के सभी स्कूलों को आदेश जारी किए थे कि कालोनी नंबर 4 से जो भी स्टूडेंट्स दाखिले के लिए जाएगा, उसे दाखिला देना जरूरी है, लेकिन पैरेंट्स की मानें तो स्कूल दाखिला देने से इंकार कर रहे हैं। कई लोग स्कूल दर स्कूल भटक रहे हैं। एक परिजन ने आरोप लगाया कि एक स्कूल ने दाखिले के लिए 5 हजार रुपयों की मांग कर दी। कई स्कूल सीट फुल होने की बात कह रहे हैं तो कई अंग्रेजी मीडियम होने की बात कह स्टूडेंट्स को लौटा दे रहे हैं।
कहां पढ़ेंगे पंडित दीन दयाल उपाध्याय कांप्लेक्स के बच्चे?
सैकड़ों लोगों के मकान पेंडिंग हैं, जो वर्तमान में कालोनी में ही रह रहे हैं। साथ ही स्कूल के पीछे हाउसिंग बोर्ड की पंडित दीन दयाल उपाध्याय कांप्लेक्स भी है। जो लीगल है और कालोनी टूटने के बाद भी वहीं रहेगा। इस कालोनी में 300 के करीब फ्लैट्स हैं। यहां के बच्चे भी कालोनी नंबर 4 के सरकारी स्कूल में ही पढ़ते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि स्कूल के बंद होने के बाद यहां के बच्चे कहां पढ़ेंगे।
कहां पढ़ेंगे पंडित दीन दयाल उपाध्याय कांप्लेक्स के बच्चे?
सैकड़ों लोगों के मकान पेंडिंग हैं, जो वर्तमान में कालोनी में ही रह रहे हैं। साथ ही स्कूल के पीछे हाउसिंग बोर्ड की पंडित दीन दयाल उपाध्याय कांप्लेक्स भी है। जो लीगल है और कालोनी टूटने के बाद भी वहीं रहेगा। इस कालोनी में 300 के करीब फ्लैट्स हैं। यहां के बच्चे भी कालोनी नंबर 4 के सरकारी स्कूल में ही पढ़ते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि स्कूल के बंद होने के बाद यहां के बच्चे कहां पढ़ेंगे।
टीसी फॉर्म में स्कूल कर रहा गड़बड़ी
स्कूल की ओर से जारी किए जा रहे ट्रांसफर सर्टिफिकेट में स्कूल छोड़ने के कारण के कॉलम में ‘ऑन पैरेंट्स रिक्वेस्ट’ लिखा जा रहा है, जबकि स्कूल बंद करने का फैसला विभाग का है। इसके साथ ही 7 अगस्त को जारी किए गए टीसी पर 3 अगस्त की तारीख लिखी गई है।
पिछले 4 दिनों से स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। बेटी 10वीं में पढ़ती है, परीक्षाएं आने वाली हैं, लेकिन अभी दाखिले के लिए चक्कर काट रहे हैं। पहले हल्लोमाजरा स्कूल में गया, वहां एक टीचर ने 5 हजार रुपये मांगे। बहलाना के स्कूल में भी दाखिला के लिए गए।
- राजेश, अभिभावक
मेरे तीन बच्चे हैं, कालोनी के स्कूल में एक मैडम ने कहा कि कल से बच्चों को मत भेजना। एसएलसी लेने से मना किया तो पुलिस बुला ली। धमकी देने लगे। हम कालोनी में ही रह रहे हैं, हमारे बच्चों को यहां से क्यों निकाला जा रहा है।
- अमित शर्मा, अभिभावक
जब तक बच्चे हैं, स्कूल को बंद नहीं किया जाएगा। स्कूल में आने वाले बच्चों की संख्या के आधार पर स्कूल को चालू या बंद करने का फैसला लिया जाएगा।
- रुबिंदरजीत सिंह बराड़, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन, चंडीगढ़ (यूटी)
पिछले 4 दिनों से स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। बेटी 10वीं में पढ़ती है, परीक्षाएं आने वाली हैं, लेकिन अभी दाखिले के लिए चक्कर काट रहे हैं। पहले हल्लोमाजरा स्कूल में गया, वहां एक टीचर ने 5 हजार रुपये मांगे। बहलाना के स्कूल में भी दाखिला के लिए गए।
- राजेश, अभिभावक
मेरे तीन बच्चे हैं, कालोनी के स्कूल में एक मैडम ने कहा कि कल से बच्चों को मत भेजना। एसएलसी लेने से मना किया तो पुलिस बुला ली। धमकी देने लगे। हम कालोनी में ही रह रहे हैं, हमारे बच्चों को यहां से क्यों निकाला जा रहा है।
- अमित शर्मा, अभिभावक
जब तक बच्चे हैं, स्कूल को बंद नहीं किया जाएगा। स्कूल में आने वाले बच्चों की संख्या के आधार पर स्कूल को चालू या बंद करने का फैसला लिया जाएगा।
- रुबिंदरजीत सिंह बराड़, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन, चंडीगढ़ (यूटी)