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अब इस यूनिवर्सिटी से एक साल में होगी MPhil, पढ़ें खास खबर
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Thu, 19 Jan 2017 02:50 PM IST
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एमफिल करने का सपना संजोए बैठे विद्यार्थियों को नई सौगात मिली है। अब विद्यार्थी डेढ़ साल की बजाय मात्र एक साल में एमफिल कर सकेंगे। एमडीयू के मानविकी संकाय की मीटिंग में बुधवार को नए सिलेबस की मंजूरी दे दी गई है, जो नए सत्र से लागू कर दिया जाएगा।
दरअसल, एमडीयू में अभी तक अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और पत्रकारिता व जनसंचार विषयों में डेढ़ वर्ष का एमफिल था, जिसमें छह-छह महीने के तीन सेमेस्टर थे। गत वर्ष यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) ने एमफिल के मानकों में बदलाव करते हुए एमफिल कोर्स को एक साल कर दिया था।
हालांकि सत्र के बीच में यह संभव नहीं हो सका, लेकिन अब एमडीयू में नए नियमानुसार इन विषयों में एमफिल कोर्स को एक साल का कर दिया दिया गया है। बुधवार को मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सुरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक वर्ष के एमफिल को मंजूरी दे दी गई है।
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एक वर्षीय एमफिल में छह-छह माह के दो सेमेस्टर होंगे। पिछले दिनों सभी विषयों के पीजी बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद अब मानविकी संकाय से अनुमति दी गई है।
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दरअसल, एमडीयू में अभी तक अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और पत्रकारिता व जनसंचार विषयों में डेढ़ वर्ष का एमफिल था, जिसमें छह-छह महीने के तीन सेमेस्टर थे। गत वर्ष यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) ने एमफिल के मानकों में बदलाव करते हुए एमफिल कोर्स को एक साल कर दिया था।
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हालांकि सत्र के बीच में यह संभव नहीं हो सका, लेकिन अब एमडीयू में नए नियमानुसार इन विषयों में एमफिल कोर्स को एक साल का कर दिया दिया गया है। बुधवार को मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सुरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक वर्ष के एमफिल को मंजूरी दे दी गई है।
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एक वर्षीय एमफिल में छह-छह माह के दो सेमेस्टर होंगे। पिछले दिनों सभी विषयों के पीजी बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद अब मानविकी संकाय से अनुमति दी गई है।
परीक्षा संबंधी बदलाव भी किए गए हैं
कॉलेज में स्टूडेंट्स
यूनिवर्सिटी की प्रक्रिया के तहत अब इसे एकेडमिक काउंसिल की बैठक में भेजा जाएगा। एक वर्षीय एमफिल होने के बाद विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा। इसके अलावा प्रज्ञा, पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री और आचार्य पाठ्यक्रम के अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी गई है।
नए अध्यादेश में प्रवेश और परीक्षा से संबंधित कुछ बदलाव किए गए हैं। इस मौके पर हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रामरती, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. पूनम दत्ता, शैक्षणिक शाखा के अधीक्षक एमएल बतरा और शैक्षणिक शाखा की रेनू आदि मौजूद रहे।
नए मानकों के बाद एमडीयू में सीटें भी हो जाएंगी कम
पिछले दिनों यूजीसी की तरफ से एमफिल और पीएचडी के कई अन्य नए मानक भी तय किए गए थे। नए मानकों के अनुसार एक प्रोफेसर को एमफिल की तीन और पीएचडी की आठ सीटें आवंटित हो सकती हैं।
एसोसिएट प्रोफेसर को एमफिल की दो और पीएचडी की छह सीटें तो असिस्टेंट प्रोफेसर को एमफिल की एक और पीएचडी की चार सीटें आवंटित हो सकती हैं।
नए अध्यादेश में प्रवेश और परीक्षा से संबंधित कुछ बदलाव किए गए हैं। इस मौके पर हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रामरती, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. पूनम दत्ता, शैक्षणिक शाखा के अधीक्षक एमएल बतरा और शैक्षणिक शाखा की रेनू आदि मौजूद रहे।
नए मानकों के बाद एमडीयू में सीटें भी हो जाएंगी कम
पिछले दिनों यूजीसी की तरफ से एमफिल और पीएचडी के कई अन्य नए मानक भी तय किए गए थे। नए मानकों के अनुसार एक प्रोफेसर को एमफिल की तीन और पीएचडी की आठ सीटें आवंटित हो सकती हैं।
एसोसिएट प्रोफेसर को एमफिल की दो और पीएचडी की छह सीटें तो असिस्टेंट प्रोफेसर को एमफिल की एक और पीएचडी की चार सीटें आवंटित हो सकती हैं।