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देश को मंत्री, सांसद और नामी हस्तियां देने वाली पीयू बेहाल, विशेष रिपोर्ट

Sun, 25 Dec 2016 09:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 25 Dec 2016 09:02 PM IST
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special report on financial crisis and condition of punjab university chandigarh
Punjab University Professor Arun Kumar Grover
जिस पंजाब यूनिवर्सिटी से पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सांसद किरण खेर, अभिनेता अनुपम खेर जैसे दिग्गजों ने तालीम ली। जहां चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस जेएस खेहर और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसी प्रमुख हस्तियों पढ़ा चुकी हैं। वही पीयू आज फंड के लिए मोहताज है और ऐतिहासिक महत्व रखने वाली यूनिवर्सिटी की  छवि निरंतर धूमिल हो रही है।
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वर्तमीन में पीयू अपनी फैकल्टी और स्टाफ की सैलरी तक नहीं दे पा रही है। एक महीना निकलता है तो अगले महीने की मुश्किल आ खड़ी होती है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के हस्तक्षेप ने पीयू को महीने भर की राहत दिलाते हुए 44 करोड़ का बजट जारी करवा दिया। लेकिन इसमें भी सिर्फ दिसंबर की सैलरी ही दी जा सकेगी।
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इस वित्त वर्ष के जनवरी से मार्च तक बचे तीन महीनों की सैलरी कैसे दी जाएगी यह अभी भी पहेली बनी हुई है। ऊपर से यूजीसी ने और बजट देने से साफ इनकार भी कर दिया है। कोई ठोस नीति नहीं बनने तक पीयू का आगे भी यही हाल रहने वाला है।
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स्टूडेंट्स पर बोझ डालने की तैयारी

special report on financial crisis and condition of punjab university chandigarh
पंजाब यूनिवर्सिटी
पीयू प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए हैं। कुछ नहीं सूझा तो अब स्टूडेंट्स को ही इसकी ढाल बनाने की तैयारी हो गई है। पीयू प्रशासन फीस को सीधा 10 गुणा तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर चुका है। अगली सिंडीकेट की मीटिंग में इस प्रस्ताव पर मुहर लगना भी तय माना जा रहा है।

यानी, अब जो स्टूडेंट किसी कोर्स के लिए 5 हजार रुपये फीस अदा कर रहा है, नए प्रस्ताव के बाद यही फीस बढ़कर सीधे 50 हजार रुपये हो जाएगी। स्टूडेंट्स यूनियन का मत है कि इतनी महंगी शिक्षा होने पर कमजोर वर्ग के स्टूडेंट के लिए पीयू के दरवाजे बंद हो जाएंगे। खास वर्ग के संपन्न स्टूडेंट ही पढ़ सकेंगे।

सैलरी का सबसे ज्यादा बोझ
पीयू पर सैलरी का सबसे ज्यादा बोझ है। अधिकतर बजट प्रति वर्ष सैलरी के मद में ही खर्च हो जाता है। इस बार तो हालात ऐसे हैं कि तीन महीने की सैलरी देने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
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