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पंजाब यूनिवर्सिटी की कैंटीन में बैन हुआ जंक फूड, पर मिलेंगे दक्षिण भारतीय और गुजराती व्यंजन

Fri, 05 Oct 2018 01:18 PM IST
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 05 Oct 2018 01:18 PM IST
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South Indian and Gujrati Food in Punjab University Chandigarh Canteen
south indian food
अब पंजाब यूनिवर्सिटी की कैंटीन में डोसा, इडली, ढोकला, उत्पम आदि का स्वाद मिलेगा। जंक फूड के विकल्प के रूप में विश्वविद्यालय प्रशासन कैंटीन में अब इन खाद्य पदार्थों को बनवाने जा रहा है। साउथ इंडिया व गुजरात के अधिकांश फूड अब पीयू की कैंटीन में मिलेंगे। यह शरीर को नुकसान भी नहीं पहुंचाएंगे। साथ ही पिज्जा आदि से सस्ते भी होंगे। यूजीसी की गाइडलाइन के बाद पीयू में जंक फूड पर बैन लगा दिया गया है। इससे कोल्ड ड्रिंक, पिज्जा, बर्गर, चिप्स, आलू टिक्की आदि बंद हो गए हैं, ऐसे में स्टूडेंट्स के सामने कम भूख में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की कमी हो गई थी।
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इसका विकल्प तलाशने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने बैठक की और विकल्प बनाने का जिम्मा यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट को सौंपा गया। सूत्रों का कहना है कि इस इंस्टीट्यूट में 20 से अधिक विशेषज्ञ यह सब तय कर रहे हैं। चुनौती ये है कि सूची में वह चीजें शामिल की जाएं जिस पर उंगली न उठे और शरीर को भी नुकसान न पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि सूची लगभग तय हो गई है। इस पर मुहर लगना बाकी है। वहीं स्टूडेंट्स को भी इंतजार है कि उन्हें नया क्या खाने को मिलेगा।
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ये होंगे नए खाद्य पदार्थ
 साउथ इंडियन
- डोसा
- वड़ा
- इडली
- उत्पम
- पूड़ी-भाजी
- पाव भाजी

गुजराती फूड
- ढोकला
- खमन
- थेपला
- काठी रोल

इसलिए किया चयन
- फ्रेश खाद्य पदार्थ हैं
- कम ऑयल में तैयार होंगे
- हाई कैलोरी नहीं होगी
- पिज्जा आदि से सस्ते  
- शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे
- शुगर नहीं के बराबर प्रयोग होगी

रिफाइंड प्रयोग भी कम होगा
रिफाइंड प्रयोग पर भी कैंटीन में बैन लगाए जाने की तैयारी है। हालांकि आलू आदि फ्राई करने की इजाजत होगी। इसकी जगह मस्टर्ड ऑयल का इस्तेमाल किए जाने की योजना है। रिफाइंड से होने वाले नुकसान के भी तर्क दिए जाएंगे।
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मिलेगा प्रशिक्षण
स्टूडेंट लंबे समय से मांग करते चले आ रहे हैं कि कैंटीन के वर्कर अपने कार्य में पारंगत हों। इसी को ध्यान में रखते हुए नई खाद्य सूची लागू करने के साथ ही इनको ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसका जिम्मा भी यूनिवर्सिटी की ओर से यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट को दिया जा रहा है।


नॉनवेज बनाया जाए
नॉनवेज की मांग आइसा ने की है। उन्होंने कुलपति व रजिस्ट्रार को पत्र दिया है। कहा है कि नॉनवेज में अधिक प्रोटीन होता है। इसमें मस्तिष्क का विकास भी तेज होता है। इसी कैंटीन में बनाने की अनुमति मांगी है।
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