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पीयू में डीएसडब्ल्यू की कुर्सी पर स्थायी तौर पर विराजमान होंगे तोमर, गोयल ग्रुप की हरी झंडी
Mon, 22 Jun 2020 10:40 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 22 Jun 2020 10:40 AM IST
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प्रोफेसर एसके तोमर
- फोटो : फाइल फोटो
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पीयू सिंडिकेट की बैठक 25 जून को डीएसडब्ल्यू प्रकरण को निपटाने के लिए आयोजित की जा रही है, लेकिन पीयू ने एजेंडे में यह प्रस्ताव शामिल नहीं किया है। हालांकि एक टेबल एजेंडा आएगा। उसी में यह प्रस्ताव शामिल होगा।
माना जा रहा है कि वीसी प्रो. राजकुमार की ओर से वरिष्ठ प्रो. एसके तोमर का नाम डीएसडब्ल्यू के लिए प्रस्तावित किया जाएगा। इस नाम पर गोयल ग्रुप को भी आपत्ति नहीं है। उन्होंने प्रथम दृष्टया हरी झंडी दे दी है। इस तरह प्रो. तोमर का डीएसडब्ल्यू बनना लगभग तय है। वहीं दूसरी ओर गोयल ग्रुप ने कहा है कि प्रो. तोमर को डीएसडब्ल्यू बनाने का प्रस्ताव एजेंडे में होना चाहिए था, जो दिखा नहीं।
डीएसडब्ल्यू कुर्सी को लेकर इस तरह रहा विवाद
पीयू के लिए डीएसडब्ल्यू का पद एक राजा की कुर्सी की तरह हो गया। हर किसी को इस कुर्सी पर बैठने कोई ग्रुप नहीं देखना चाहता। पिछले साल प्रो. इमैनुअल नाहर को इस पद से हटाया गया और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। हालांकि प्रो. नाहर की जीत हुई। उनका कार्यकाल इस साल मई में पूरा हुआ तो फिर डीएसडब्ल्यू बनाया जाना था। प्रो. देवेंद्र सिंह का नाम प्रस्तावित किया गया, लेकिन सिंडिकेट ने अनुभवी न होने की बात कहकर इस नाम से इंकार कर दिया।
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वार्डन होना इस पद के लिए जरूरी है, यह भी सिंडिकेट ने कहा जबकि पीयू का कैलेंडर यह बात नहीं करता। यह कैलेंडर पीयू के लिए संविधान है। पर उसमें लिखी बातों को नहीं माना गया। पिछली सिंडिकेट में सदस्यों ने वीसी को पावर दे दी कि वह 27 जून तक किसी को भी चार्ज दे सकते हैं। उसी दिन बैठक होनी चाहिए और यदि बैठक किसी कारणवश नहीं होती है तो इसका चार्ज डीयूआई को दे दिया जाए।
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माना जा रहा है कि वीसी प्रो. राजकुमार की ओर से वरिष्ठ प्रो. एसके तोमर का नाम डीएसडब्ल्यू के लिए प्रस्तावित किया जाएगा। इस नाम पर गोयल ग्रुप को भी आपत्ति नहीं है। उन्होंने प्रथम दृष्टया हरी झंडी दे दी है। इस तरह प्रो. तोमर का डीएसडब्ल्यू बनना लगभग तय है। वहीं दूसरी ओर गोयल ग्रुप ने कहा है कि प्रो. तोमर को डीएसडब्ल्यू बनाने का प्रस्ताव एजेंडे में होना चाहिए था, जो दिखा नहीं।
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डीएसडब्ल्यू कुर्सी को लेकर इस तरह रहा विवाद
पीयू के लिए डीएसडब्ल्यू का पद एक राजा की कुर्सी की तरह हो गया। हर किसी को इस कुर्सी पर बैठने कोई ग्रुप नहीं देखना चाहता। पिछले साल प्रो. इमैनुअल नाहर को इस पद से हटाया गया और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। हालांकि प्रो. नाहर की जीत हुई। उनका कार्यकाल इस साल मई में पूरा हुआ तो फिर डीएसडब्ल्यू बनाया जाना था। प्रो. देवेंद्र सिंह का नाम प्रस्तावित किया गया, लेकिन सिंडिकेट ने अनुभवी न होने की बात कहकर इस नाम से इंकार कर दिया।
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वार्डन होना इस पद के लिए जरूरी है, यह भी सिंडिकेट ने कहा जबकि पीयू का कैलेंडर यह बात नहीं करता। यह कैलेंडर पीयू के लिए संविधान है। पर उसमें लिखी बातों को नहीं माना गया। पिछली सिंडिकेट में सदस्यों ने वीसी को पावर दे दी कि वह 27 जून तक किसी को भी चार्ज दे सकते हैं। उसी दिन बैठक होनी चाहिए और यदि बैठक किसी कारणवश नहीं होती है तो इसका चार्ज डीयूआई को दे दिया जाए।
प्रो. तोमर के पास है डीएसडब्ल्यू का चार्ज
वीसी प्रो. राजकुमार ने यह चार्ज वरिष्ठ प्रोफेसर एसके तोमर को दे दिया। वह हर मानक को पूरा करते हैं। एक सीनियर्टी में सबसे आगे हैं। वहीं वार्डन भी रहे हैं। कई अन्य पदों पर भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। 25 जून को पीयू सिंडिकेट की बैठक होने जा रही है। सूत्रों का कहना है कि प्रो. तोमर का ही नाम स्थाई डीएसडब्ल्यू के लिए बढ़ाया जाएगा। इस नाम पर गोयल ग्रुप भी लगभग राजी है। सूत्रों का कहना है कि गोयल ग्रुप इसलिए भी विरोध नहीं कर सकता क्योंकि उन पर भी फिर टैग लग सकता है कि वह केवल विरोध करना जानते हैं, अपनी मनमानी करते हैं। वीसी की ओर से लाने वाले हर व्यक्ति को नकारते हैं।
एडीएसडब्ल्यू का चार्ज भी किसी अन्य को दिया जाए
एडीएसडब्ल्यू का पद भी महत्वपूर्ण होता है। डीएसडब्ल्यू की गैर हाजिरी में वही काम देखते हैं। वर्तमान में तैनात प्रो. रंजन कुमार दो साल से एडीएसडब्ल्यू हैं लेकिन वह विदेश में हैं। उनकी सेवाएं इस पद के लिए नहीं ली जा सकती हैं। जानकारों का कहना है कि विदेश में जो व्यक्ति है उसकी सेवाएं नहीं ली जा रही हैं तो ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति को चार्ज दिया जाना चाहिए ताकि बेहतर कार्य हो सके। साथ ही एक नए व्यक्ति को अनुभव भी उस पद का मिल सकेगा। जानकारों ने कहा कि एडीएसडब्ल्यू के लिए कई नाम हैं। उनमें प्रो. अशोक कुमार, प्रो. एमसी सिद्दू आदि शामिल हैं।
प्रो. एसके तोमर मेरे साथ ही वार्डन बने थे। मुझे नहीं लगता कि डीएसडब्ल्यू उनको बनाए जाने को लेकर कोई विरोध दर्ज करेगा। मानकों को वह पूरा करते हैं, लेकिन इस नाम को बाकायदा एजेंडे में लेकर आना चाहिए था। जब नाम सामने आएगा तभी बात बनेगी।
- प्रो. नवदीप गोयल, सिंडिकेट मेंबर एवं गोयल ग्रुप के संचालक
एडीएसडब्ल्यू का चार्ज भी किसी अन्य को दिया जाए
एडीएसडब्ल्यू का पद भी महत्वपूर्ण होता है। डीएसडब्ल्यू की गैर हाजिरी में वही काम देखते हैं। वर्तमान में तैनात प्रो. रंजन कुमार दो साल से एडीएसडब्ल्यू हैं लेकिन वह विदेश में हैं। उनकी सेवाएं इस पद के लिए नहीं ली जा सकती हैं। जानकारों का कहना है कि विदेश में जो व्यक्ति है उसकी सेवाएं नहीं ली जा रही हैं तो ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति को चार्ज दिया जाना चाहिए ताकि बेहतर कार्य हो सके। साथ ही एक नए व्यक्ति को अनुभव भी उस पद का मिल सकेगा। जानकारों ने कहा कि एडीएसडब्ल्यू के लिए कई नाम हैं। उनमें प्रो. अशोक कुमार, प्रो. एमसी सिद्दू आदि शामिल हैं।
प्रो. एसके तोमर मेरे साथ ही वार्डन बने थे। मुझे नहीं लगता कि डीएसडब्ल्यू उनको बनाए जाने को लेकर कोई विरोध दर्ज करेगा। मानकों को वह पूरा करते हैं, लेकिन इस नाम को बाकायदा एजेंडे में लेकर आना चाहिए था। जब नाम सामने आएगा तभी बात बनेगी।
- प्रो. नवदीप गोयल, सिंडिकेट मेंबर एवं गोयल ग्रुप के संचालक