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पीयू में छात्र संघ चुनाव में पहली बार नहीं जीती छात्राएं, हार के कई अलग-अलग कारण, यहां जानिए
Sat, 07 Sep 2019 10:47 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 07 Sep 2019 10:47 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी में जश्न
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ कि छात्राएं नहीं जीतीं। वहीं चुनाव में हार के कई अलग-अलग कारण सामने आए हैं। अध्यक्ष पद के लिए एसएफएस से प्रिया, वाइस प्रेसीडेंट के लिए एबीवीपी से दिव्या चोपड़ा, ज्वाइंट सेक्रेटरी के लिए निर्दलीय तानिया भट्टी मैदान में थी। उम्मीद थी कि इनमें से कोई न कोई उम्मीदवार जीत दर्ज करेगा लेकिन इस बार जीत हासिल नहीं हो पाई।
सहजप्रीत ने नहीं मांगे वोट, फिर भी मिले 256
सथ संगठन के सहजप्रीत ने क्लास रिप्रजेंटेटिव के लिए नामांकन किया था लेकिन गलती से सचिव के लिए हो गया। उसके बाद सहजप्रीत ने कहा था कि छात्र उन्हें वोट न दें, बावजूद इसके उन्हें 256 वोट मिले।
एनएसयूआई ने बनाया रिकॉर्ड
इस बार एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने तीन हजार से अधिक वोट पाकर जीत दर्ज की। यह रिकॉर्ड जीत मानी जा रही है। सबसे अधिक वोटों से ज्वाइंट सेक्रेटरी मनप्रीत सिंह महाल जीते। उन्हें 3796 वोट मिले। वहीं वाइस प्रेसीडेंट उम्मीदवार राहुल कुमार को 3520 व सचिव के लिए तेगबीर सिंह को 3188 मतद मिले।
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सहजप्रीत ने नहीं मांगे वोट, फिर भी मिले 256
सथ संगठन के सहजप्रीत ने क्लास रिप्रजेंटेटिव के लिए नामांकन किया था लेकिन गलती से सचिव के लिए हो गया। उसके बाद सहजप्रीत ने कहा था कि छात्र उन्हें वोट न दें, बावजूद इसके उन्हें 256 वोट मिले।
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एनएसयूआई ने बनाया रिकॉर्ड
इस बार एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने तीन हजार से अधिक वोट पाकर जीत दर्ज की। यह रिकॉर्ड जीत मानी जा रही है। सबसे अधिक वोटों से ज्वाइंट सेक्रेटरी मनप्रीत सिंह महाल जीते। उन्हें 3796 वोट मिले। वहीं वाइस प्रेसीडेंट उम्मीदवार राहुल कुमार को 3520 व सचिव के लिए तेगबीर सिंह को 3188 मतद मिले।
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डीएसडब्ल्यू प्रकरण नहीं आया काम, हार के कारण अलग-अलग
- इस बार चुनावी भिड़ंत काफी थी। चुनाव से पहले घमासान उसी दिन मच गया था जिस दिन सीनेट ने डीएसडब्ल्यू इमैनुअल नाहर का एक्सटेंशन नहीं किया था। सभी 12 संगठनों ने धरना-प्रदर्शन किया। इसको लीड एसएफएस व एनएसयूआई ने किया। कोर्ट में प्रकरण पहुंचा और डीएसडब्ल्यू प्रो. नाहर को बहाल कर दिया गया। सभी को लगा कि एसएफएस की अब जीत पक्की है या फिर एनएसयूआई सत्ता में आएगी लेकिन हुआ इसके उलट। एबीवीपी एसएफएस से अधिक मत पाकर दूसरे स्थान पर रही। हालांकि अध्यक्ष पद पर जीत नहीं मिली लेकिन एबीवीपी की हार का बड़ा कारण आपसी फूट रही। बताया जाता है कि इन्हीं के पदाधिकारियों ने चुनाव नहीं लड़ाया। उनका मानना था कि विक्रांत खंडेलवाल ने जिस चेहरे का चयन किया है वह सही नहीं है।
- एसएफएस की हार के भी दो कारण बताए जा रहे हैं। इसमें लॉ विभाग में एक पोस्टर लगाने का रहा है। इसको लेकर पूरे कैंपस में विरोध दर्ज हुआ था और दूसरा मुद्दा खालिस्तान का सपोर्ट करना व कश्मीर प्रकरण पर विरोध दर्ज कराना रहा है। हालांकि एसएसएफ ने अपने बेस वोट पूरे लिए हैं। साथ ही अन्य छात्रों ने भी वोट दिया है।
- एनएसयूआई के निखिल साउथ से आते हैं, वहां से विद्यार्थी यहां पीयू कम पढ़ने पहुंचे हैं। इसके अलावा एनएसयूआई को लगा था कि निखिल यूआईईटी का विद्यार्थी है, वहां के अधिकांश वोट उनके होंगे, लेकिन वहां के वोटों पर काम करने में यह संगठन पीछे रहा। यह भी बताया जा रहा है कि सीनेटरों ने एनएसयूआई के चार ग्रुपों में से एक को तोड़कर दूसरे ग्रुप में शामिल कर दिया। साथ ही आपसी फूट भी इसमें नजर आ रही थी।
- एसएफएस की हार के भी दो कारण बताए जा रहे हैं। इसमें लॉ विभाग में एक पोस्टर लगाने का रहा है। इसको लेकर पूरे कैंपस में विरोध दर्ज हुआ था और दूसरा मुद्दा खालिस्तान का सपोर्ट करना व कश्मीर प्रकरण पर विरोध दर्ज कराना रहा है। हालांकि एसएसएफ ने अपने बेस वोट पूरे लिए हैं। साथ ही अन्य छात्रों ने भी वोट दिया है।
- एनएसयूआई के निखिल साउथ से आते हैं, वहां से विद्यार्थी यहां पीयू कम पढ़ने पहुंचे हैं। इसके अलावा एनएसयूआई को लगा था कि निखिल यूआईईटी का विद्यार्थी है, वहां के अधिकांश वोट उनके होंगे, लेकिन वहां के वोटों पर काम करने में यह संगठन पीछे रहा। यह भी बताया जा रहा है कि सीनेटरों ने एनएसयूआई के चार ग्रुपों में से एक को तोड़कर दूसरे ग्रुप में शामिल कर दिया। साथ ही आपसी फूट भी इसमें नजर आ रही थी।
चुनावी गणित में माहिर निकले चेतन
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष चेतन चौधरी का चुनावी गणित इतना फिट था कि उन्होंने रिजल्ट आए बिना ही अपनी जीत घोषित कर दी और समर्थकों के साथ विजयी जुलूस निकाला। मतगणना स्थल जिमभनेजियम में बैठे सभी शिक्षक व अन्य लोग भी हैरत थे, क्योंकि उस समय तक यूआईईटी विभाग का रिजल्ट नहीं आया था जहां सर्वाधिक 2638 वोट थे। वह शुरू से उदास थे, क्योंकि प्रारंभिक चरण में एसएफएस व एबीवीपी आगे चल रही थी। उतार-चढ़ाव हो रहा था।
जैसे ही यूआईएलएस व लॉ विभाग का रिजल्ट आया उसी के साथ चेतन चौधरी रिजल्ट स्थल से उठे और सभी का आशीर्वाद लेने लगे। समर्थकों ने बाहर से नारेबाजी कर दी। सभी ने कहा, रिजल्ट अभी बाकी है। वहां बैठे लोगों को यह लगा कि वह चुनाव हार रहे हैं इसलिए जा रहे हैं, लेकिन किसी को पता नहीं था कि वह पहले ही वोटों का गणित चला चुके थे। यूआईईटी के वोटों के जरिये उन्हें जीत हासिल नहीं, क्योंकि वह यूआईएलएस व लॉ विभाग के रिजल्ट आने के बाद भी सबसे आगे चल रहे थे।
यूआईईटी ने सर्वाधिक वोट दिए लेकिन वह बड़ी जीत के लिए, केवल जीत के लिए नहीं। चेतन जैसे ही बाहर आए तो समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया और हवा में पंफलेट उछाले और नारेबाजी शुरू कर दी। पीयू कैंपस में विजयी जुलूस निकाला गया। जुलूस निकालने के एक घंटे बाद डीएसडब्ल्यू इमैनुअल नाहर ने रिजल्ट की घोषणा की।
जैसे ही यूआईएलएस व लॉ विभाग का रिजल्ट आया उसी के साथ चेतन चौधरी रिजल्ट स्थल से उठे और सभी का आशीर्वाद लेने लगे। समर्थकों ने बाहर से नारेबाजी कर दी। सभी ने कहा, रिजल्ट अभी बाकी है। वहां बैठे लोगों को यह लगा कि वह चुनाव हार रहे हैं इसलिए जा रहे हैं, लेकिन किसी को पता नहीं था कि वह पहले ही वोटों का गणित चला चुके थे। यूआईईटी के वोटों के जरिये उन्हें जीत हासिल नहीं, क्योंकि वह यूआईएलएस व लॉ विभाग के रिजल्ट आने के बाद भी सबसे आगे चल रहे थे।
यूआईईटी ने सर्वाधिक वोट दिए लेकिन वह बड़ी जीत के लिए, केवल जीत के लिए नहीं। चेतन जैसे ही बाहर आए तो समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया और हवा में पंफलेट उछाले और नारेबाजी शुरू कर दी। पीयू कैंपस में विजयी जुलूस निकाला गया। जुलूस निकालने के एक घंटे बाद डीएसडब्ल्यू इमैनुअल नाहर ने रिजल्ट की घोषणा की।