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पंजाब यूनिवर्सिटी: 'पुटा' पर उठा सवाल, एसोसिएशन शिक्षकों की, मेंबर प्रोग्रामर व लाइब्रेरियन क्यों?

Fri, 02 Aug 2019 11:14 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 02 Aug 2019 11:14 AM IST
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questions raised on punjab university teachers association
फाइल फोटो
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन (पुटा) एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। कुछ टीचरों ने सवाल उठाया है कि पुटा शिक्षकों की एसोसिएशन है तो इसके मेंबर प्रोग्रामर और लाइब्रेरियन क्यों बनाए गए हैं। यही नहीं स्पोर्ट्स विभाग के अधिकारी भी सदस्य हैं। इस बार फिर से इनको सदस्यता दी जा रही है। कई शिक्षकों को यह बात हजम नहीं हो रही है और उन्होंने पुटा अधिकारियों से इसका जवाब मांगा है। कुछ सदस्यों ने यहां तक कह दिया है कि राजनीतिक लाभ के लिए समय समय पर इन लोगों को संगठन में किया जा रहा हे।
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वहीं, पुटा के पुराने पदाधिकारियों ने कहा है कि यूजीसी ने इन्हें एकेडमिक का दर्जा दिया है, इसलिए उन्हें शामिल किया गया है। इसके जवाब में शिक्षकों ने कहा है कि शिक्षक, प्रोग्रामर व लाइब्रेरी की परिभाषाएं अलग-अलग हैं। हर मानक अलग हैं। इस पर पुटा को फिर से विचार करने की जरूरत है। बता दें कि पुटा में 650 से अधिक सदस्य हैं। इनमें 70 से अधिक सदस्य प्रोग्रामर, लाइब्रेरियन व स्पोर्ट्स विभाग के अधिकारी हैं। जब चुनाव होते हैं तो यह संख्या किसी भी पक्ष को आसमान में पहुंचाने के लिए काफी है। यानी उनकी जीत पक्की।
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कुछ पुराने शिक्षकों का मानना है कि केवल अपने लाभ केलिए उन्हें संगठन में लिया गया है। संगठन का नाम पुटा से कुछ ओर कर दिया जाना चाहिए। बताते हैं कि लाइब्रेरियन, प्रोग्राम व शिक्षक की परिभाषा अलग-अलग हैं। केवल एक या दो बिंदुओं का तर्क देकर उन्हें शिक्षक संगठन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षकों ने यह भी कहा है कि लाइब्रेरियन, प्रोग्राम व स्पोर्ट्स के नेशनल व स्थानीय लेवल पर संगठन अलग से होते हैं। ऐसे में उन्हें अपने संगठन में शामिल किया जाना चाहिए।
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आरोप है कि पुटा रीजनल सेंटरों के शिक्षकों को इस हक से दूर रख रही है जबकि वह भी सदस्यता की मांग करते चले आ रहे हैं। यह भी जानकार कहते हैं कि केवल वोट बैंक के लिए खेल चल रहा है। सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी इसके कारण ही संगठन में शामिल किया जा रहा है। हालांकि पुटा के अपने अलग-अलग तर्क हैं।

शिक्षक किसी चीज से न डरें

पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल व सचिव प्रो. जेके गोस्वामी ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि पुटा एक निडर संगठन माना जाता है। वर्तमान में कुछ लोग घेराबंदी में हैं जो अधिकारियों के निकट होने का दावा कर रहे हैं। यह चीज गलत है। कहा है कि सबसे बुरी बात यह है कि प्रशासन की बड़े पैमाने पर विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए अलग रास्ता अपना रहा है। कुछ चुने हुए व्यक्ति हैं जो यूनिवर्सिटी के हर कार्यालय पर कब्जा करना चाहते हैं जबकि पुटा ने वरिष्ठता के आधार को तवज्जो दी है। आरोप लगाया कि जूनियर व सीनियर शिक्षकों को विभाजित करना चाहते हैं। पुटा ने कहा कि सभी सदस्य निडर हों और एकजुट रहें।

ये दिखता है फर्क
- शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थी को मास्टर डिग्री के अलावा नेट व पीएचडी होना चाहिए।
- टीचर पर क्लास का लोड यूजीसी से निर्धारित है।
- पेपर सेट करने से लेकर पेपर लेने व वैल्यूएड का काम वह करते हैं।
- क्लास वन के आसपास होते हैं।
- शिक्षक चार, छह व आठ अभ्यर्थियों को पीएचडी करवाते हैं।
- खुद ग्रहण किए ज्ञान को अगली जनरेशन को बांट रहे हैं जो समाज तक पहुंच रहा है।
- शिक्षक को प्रमोशन के लिए रिसर्च पेपर पब्लिश करने होते हैं।

क्या कहते हैं पदाधिकारी

पुटा के संविधान के मुताबिक ही प्रोग्रामर, लाइब्रेरियन मेंबर बने गए हैं।
- प्रो. राजेश गिल, पुटा अध्यक्ष

यूजीसी ने इन्हें एकेडमिक कैटेगरी में शामिल किया है। कोच भी एक तरह से बच्चों को गाइड करते हैं।
- प्रो. मुहम्मद खालिद, पूर्व अध्यक्ष पुटा

लाइब्रेरियन, प्रोग्रामर व स्पोटर्स के लोग टीचिंग में इनवोल्ड हैं और इनका पे स्केल भी बराबर है इसलिए सदस्य हैं।
- प्रो. रजत संधीर, पूर्व अध्यक्ष पुटा

लाइब्रेरियन आदि का सलेक्शन यूजीसी के मुताबिक होता है। प्रमोशन की प्रक्रिया भी एक जैसी ही हैं।
-प्रो. रोनकी राम, पूर्व अध्यक्ष पुटा
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