{"_id":"5d51029d8ebc3e6cfb088bc0","slug":"puta-elections-in-punjab-university-chandigarh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'पुटा' चुनाव को लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी में मचा घमासान, दोनों ग्रुपों ने जारी कर दिया घोषणा पत्र","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
'पुटा' चुनाव को लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी में मचा घमासान, दोनों ग्रुपों ने जारी कर दिया घोषणा पत्र
Mon, 12 Aug 2019 11:39 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 12 Aug 2019 11:39 AM IST
विज्ञापन
पंजाब यूनिवर्सिटी
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव को लेकर घमासान शुरू हो गया है। चुनाव जीतने के लिए हर हथकंडा अपनाया जा रहा है। प्रत्याशियों में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी शुरू हो चुकी है। इस बीच चुनाव में खड़े दोनों ग्रुपों ने घोषणा पत्र जारी कर दिए हैं। डॉ. जयंती दत्ता का प्रो टीचर्स ग्रुप फ्रेश और न्यू पुटा व ऑफ द फैकल्टी, बाय द फैकल्टी, फॉर द फैकल्टी के नाम पर वोट मांग रहा है।
वहीं प्रो. राजेश गिल ग्रुप फीयरलेस पुटा के नाम पर शिक्षकों से वोट देने की मांग कर रहा है। साथ ही पिछले वर्षों में शिक्षकों के लिए किए गए कामों को भी सामने रखा जा रहा है। बताया जाता है कि दोनों ही ग्रुपों में टक्कर है। इन ग्रुपों की जीत-हार अधिक वोटों से नहीं होगी। प्रो टीचर्स ग्रुप के मेंबर्स ने रविवार को सभी शिक्षकों के पास जाकर घोषणा पत्र दिया और वोट मांगे। शिक्षकों ने भी उन्हें आश्वासन दिया। वहीं दूसरे ग्रुप ने भी वोट मांगना शुरू कर दिए हैं।
विज्ञापन
वहीं प्रो. राजेश गिल ग्रुप फीयरलेस पुटा के नाम पर शिक्षकों से वोट देने की मांग कर रहा है। साथ ही पिछले वर्षों में शिक्षकों के लिए किए गए कामों को भी सामने रखा जा रहा है। बताया जाता है कि दोनों ही ग्रुपों में टक्कर है। इन ग्रुपों की जीत-हार अधिक वोटों से नहीं होगी। प्रो टीचर्स ग्रुप के मेंबर्स ने रविवार को सभी शिक्षकों के पास जाकर घोषणा पत्र दिया और वोट मांगे। शिक्षकों ने भी उन्हें आश्वासन दिया। वहीं दूसरे ग्रुप ने भी वोट मांगना शुरू कर दिए हैं।
विज्ञापन
प्रो टीचर्स ग्रुप की प्रमुख घोषणाएं
- सातवां वेतनमान का लाभ शिक्षकों को दिलाना।
- शिक्षकों के खाली पदों का भरवाना।
- शिक्षकों के प्रमोशन समय से और जल्द से जल्द करना।
- शिक्षकों को आवास की सुविधा दिलाना।
- पिछली सर्विस काउंट करने के बाद शिक्षकों को प्रमोशन का लाभ दिलाना।
- डेंटल कॉलेज शिक्षकों की समस्याओं का निस्तारण करके उन्हें फिर से पुटा में लाना।
- यूनिवर्सिटी को सेंट्रल मोड में ले जाना।
- पुरानी पेंशन योजना के लिए प्रयास करना।
- हर चीज में पारदर्शिता के लिए काम करना।
- विभागों के अलावा कैंपस में सफाई व्यवस्था
- वेस्ट मैनेजमेंट के लिए काम करना।
- शिक्षकों के खाली पदों का भरवाना।
- शिक्षकों के प्रमोशन समय से और जल्द से जल्द करना।
- शिक्षकों को आवास की सुविधा दिलाना।
- पिछली सर्विस काउंट करने के बाद शिक्षकों को प्रमोशन का लाभ दिलाना।
- डेंटल कॉलेज शिक्षकों की समस्याओं का निस्तारण करके उन्हें फिर से पुटा में लाना।
- यूनिवर्सिटी को सेंट्रल मोड में ले जाना।
- पुरानी पेंशन योजना के लिए प्रयास करना।
- हर चीज में पारदर्शिता के लिए काम करना।
- विभागों के अलावा कैंपस में सफाई व्यवस्था
- वेस्ट मैनेजमेंट के लिए काम करना।
बढ़ती जा रही हैं मृत्युंजय की मुश्किलें
पीयू प्रो. मुहम्मद खालिद समेत कई शिक्षकों के सवाल उठाने के बाद वाइस प्रेसीडेंट पद के उम्मीदवार मृत्युंजय कुमार की मुश्किल बढ़ती जा रही है। शिक्षकों का आरोप है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत कई जगह असिस्टेंट आर्काविस्ट की पोस्ट जहां भी निकलीं है वहां इस पद को मिनिस्टीरियल स्टाफ की श्रेणी में रखा गया है। ग्रुप ए में नहीं माना गया है।
शिक्षकों ने रविवार को यूजीसी समेत कई विश्वविद्यालयों का रिकॉर्ड खंगाला। उनका दबाव है कि चुनाव आयोजक इस मामले में निर्णय लें। आखिर वाइस प्रेसीडेंट का नामांकन कैसे पास हुआ। यह भी सवाल उठाया कि आखिर उनका वोट क्यों बना। एकेडमिक या यूजीसी ग्रेड में वह शामिल होते तो वह चुनाव लड़ सकते थे। शिक्षकों में इसको लेकर आक्रोश है।
आखिर पुटा चुनाव का मजाक क्यों बनाया जा रहा है। पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। आखिर एक व्यक्ति के लिए सभी नियम क्यों तोड़े गए। क्यों नहीं नियमों को देखकर नामांकन पत्रों की जांच की गई।
शिक्षकों ने रविवार को यूजीसी समेत कई विश्वविद्यालयों का रिकॉर्ड खंगाला। उनका दबाव है कि चुनाव आयोजक इस मामले में निर्णय लें। आखिर वाइस प्रेसीडेंट का नामांकन कैसे पास हुआ। यह भी सवाल उठाया कि आखिर उनका वोट क्यों बना। एकेडमिक या यूजीसी ग्रेड में वह शामिल होते तो वह चुनाव लड़ सकते थे। शिक्षकों में इसको लेकर आक्रोश है।
आखिर पुटा चुनाव का मजाक क्यों बनाया जा रहा है। पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। आखिर एक व्यक्ति के लिए सभी नियम क्यों तोड़े गए। क्यों नहीं नियमों को देखकर नामांकन पत्रों की जांच की गई।