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पंजाब यूनिवर्सिटी में बड़ा 'खेल', वीसी हो गए 'पावर लेस', 10 फीसदी फीस बढ़ गई
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 May 2018 03:33 PM IST
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Punjab University VC Arun Grover
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पंजाब यूनिवर्सिटी में एक बड़ा खेल खेला गया है। दरअसल, सिंडिकेट ने मौजूदा वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर को पावर लेस कर दिया है। सिंडिकेट अपनी जो भी शक्तियां वीसी को सौंपता है, उन्हें वापस ले लिया गया है। 15 सदस्यों की सिंडिकेट में से 14 ने इस प्रस्ताव को पास किया। अब यह प्रस्ताव सीनेट में जाएगा। हालांकि सिंडिकेट ने वीसी को तो पावर लेस किया ही, साथ ही छात्रों पर भी फीस का बोझ बढ़ा दिया है। नए सेशन से नई एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न कोर्स की मौजूदा ट्यूशन फीस से 10 फीसदी अतिरिक्त फीस देनी होगी।
जबकि पहले से पढ़ रहे छात्रों पर पांच फीसदी अतिरिक्त बोझ आएगा। बढ़ी हुई फीस पीयू कैंपस और पंजाब में विभिन्न जगह स्थित छह कांस्टीट्यूट कॉलेजों पर लागू होगी। फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी देते वक्त कहा गया कि पीयू के हालात सुधारने के लिए यह बेहद जरूरी है। फीस कमेटी ने हर साल 10 से 12 फीसदी फीस बढ़ाने का प्रस्ताव दिया हुआ है। बता दें कि पिछले साल फीस बढ़ोतरी पर पीयू में जबरदस्त घमासान हुआ था। नौबत छात्रों की भूख हड़ताल और उसके बाद पथराव और लाठीचार्ज तक आ गई थी।
कुछ इस तरह की पावर होती हैं सिंडिकेट की तरफ से
- रिजल्ट तय करना
- एडमिशन प्रक्रिया जारी करना
- थिसिस के लिए परीक्षक नियुक्त करना
- विभिन्न मसलों की जांच के लिए कमेटियां बनाना
- कॉलेज इंस्पेक्शन कमेटियां बनाना
किस बात पर है वीसी और सिंडिकेट में ठनी
दरअसल वीसी प्रो. ग्रोवर ने हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र दिया है कि पीयू में गवर्निंग काउंसिल में बदलाव लाने की जरूरत है। यानी सीनेट और सिंडिकेट चुने जाने की प्रक्रिया बदली जानी चाहिए। यह शपथ पत्र वीसी ने हाईकोर्ट की तरफ से पीयू के लिए स्वत संज्ञान केस में दायर किया था। सिंडिकेट चाहती है कि वीसी इस शपथ पत्र को वापस लें, जबकि वीसी इस बात को नहीं मान रहे। पिछली सिंडिकेट में वीसी ने कहा था कि उन्होंने निजी सोच के तहत यह शपथ पत्र दिया है। वहीं सिंडिकेट का कहना है कि पीयू के वकीलों के जरिए और पीयू के चल रहे केस में यह शपथ पत्र दिया गया है तो यह निजी कैसे हो सकता है। हालांकि पिछली सिंडिकेट में सिर्फ इसी मसले पर बवाल हुआ और कोई फैसला नहीं हुआ था। अब रविवार को हुई सिंडिकेट शुरू होते ही वीसी को पावर लेस करने का प्रस्ताव लाकर फीस बढ़ोतरी व कुछ अन्य प्रस्ताव पास किए गए।
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नहीं किया वाक आउट
सूत्रों के मुताबिक पावर लेस प्रस्ताव पास होने के बावजूद वीसी ने सिंडिकेट से वाक आउट नहीं किया। जबकि वे सीनेट और सिंडिकेट से अक्सर वाक आउट कर लेते हैं। बैठक में अंत तक वे सिंडिकेट के सदस्यों के साथ रहे। 14 सदस्य उनकी खिलाफत में आए, जबकि एक सिंडिकेट सदस्य ने उनका साथ दिया।
पूर्व वीसी पुरी के खिलाफ भी आया था ऐसा प्रस्ताव
पीयू के पूर्व वीसी प्रो. एमएम पुरी के समय में भी करीब 20 साल पहले सिंडिकेट में पावर लेस प्रस्ताव पास हुआ था। नियुक्तियों और बिल को लेकर कुछ आरोप लगे थे। किसी वीसी के खिलाफ इस तरह का यह दूसरा मसला है।
फीस बढ़ोतरी पर पीयू काउंसिल का ही विरोध
जैसे ही कैंपस में बात फैली की सिंडिकेट ने फीस बढ़ोतरी का एजेंडा पास कर दिया है, उसी के साथ विरोध शुरू हो गया। पीयू स्टूडेंट काउंसिल की सचिव वाणी सूद ने भी इस फैसले का विरोध किया। वाणी ने कहा कि फीस पहले 20 फीसदी बढ़नी थी, जिसके विरोध में काउंसिल रही। भले ही कम करके, लेकिन फीस बढ़ाई है, जिसका विरोध किया जाता है। फीस बढ़ोतरी आधार रहित है। अब तो पंजाब ने भी पीयू को बजट देना शुरू कर दिया है।
इधर विपक्ष ने भी घेरा
एबीवीपी के वरिष्ठ नेता हरमनजोत सिंह के मुताबिक शिक्षा बेचने के लिए नहीं है। फीस बढ़ोतरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फीस बढ़ना स्टूडेंट काउंसिल की नाकामी है, जिनका पीयू प्रबंधन पर इतना भी प्रभाव नहीं है कि वे छात्र विरोधी फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास होने से नहीं रोक पाए।
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जबकि पहले से पढ़ रहे छात्रों पर पांच फीसदी अतिरिक्त बोझ आएगा। बढ़ी हुई फीस पीयू कैंपस और पंजाब में विभिन्न जगह स्थित छह कांस्टीट्यूट कॉलेजों पर लागू होगी। फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी देते वक्त कहा गया कि पीयू के हालात सुधारने के लिए यह बेहद जरूरी है। फीस कमेटी ने हर साल 10 से 12 फीसदी फीस बढ़ाने का प्रस्ताव दिया हुआ है। बता दें कि पिछले साल फीस बढ़ोतरी पर पीयू में जबरदस्त घमासान हुआ था। नौबत छात्रों की भूख हड़ताल और उसके बाद पथराव और लाठीचार्ज तक आ गई थी।
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कुछ इस तरह की पावर होती हैं सिंडिकेट की तरफ से
- रिजल्ट तय करना
- एडमिशन प्रक्रिया जारी करना
- थिसिस के लिए परीक्षक नियुक्त करना
- विभिन्न मसलों की जांच के लिए कमेटियां बनाना
- कॉलेज इंस्पेक्शन कमेटियां बनाना
किस बात पर है वीसी और सिंडिकेट में ठनी
दरअसल वीसी प्रो. ग्रोवर ने हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र दिया है कि पीयू में गवर्निंग काउंसिल में बदलाव लाने की जरूरत है। यानी सीनेट और सिंडिकेट चुने जाने की प्रक्रिया बदली जानी चाहिए। यह शपथ पत्र वीसी ने हाईकोर्ट की तरफ से पीयू के लिए स्वत संज्ञान केस में दायर किया था। सिंडिकेट चाहती है कि वीसी इस शपथ पत्र को वापस लें, जबकि वीसी इस बात को नहीं मान रहे। पिछली सिंडिकेट में वीसी ने कहा था कि उन्होंने निजी सोच के तहत यह शपथ पत्र दिया है। वहीं सिंडिकेट का कहना है कि पीयू के वकीलों के जरिए और पीयू के चल रहे केस में यह शपथ पत्र दिया गया है तो यह निजी कैसे हो सकता है। हालांकि पिछली सिंडिकेट में सिर्फ इसी मसले पर बवाल हुआ और कोई फैसला नहीं हुआ था। अब रविवार को हुई सिंडिकेट शुरू होते ही वीसी को पावर लेस करने का प्रस्ताव लाकर फीस बढ़ोतरी व कुछ अन्य प्रस्ताव पास किए गए।
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नहीं किया वाक आउट
सूत्रों के मुताबिक पावर लेस प्रस्ताव पास होने के बावजूद वीसी ने सिंडिकेट से वाक आउट नहीं किया। जबकि वे सीनेट और सिंडिकेट से अक्सर वाक आउट कर लेते हैं। बैठक में अंत तक वे सिंडिकेट के सदस्यों के साथ रहे। 14 सदस्य उनकी खिलाफत में आए, जबकि एक सिंडिकेट सदस्य ने उनका साथ दिया।
पूर्व वीसी पुरी के खिलाफ भी आया था ऐसा प्रस्ताव
पीयू के पूर्व वीसी प्रो. एमएम पुरी के समय में भी करीब 20 साल पहले सिंडिकेट में पावर लेस प्रस्ताव पास हुआ था। नियुक्तियों और बिल को लेकर कुछ आरोप लगे थे। किसी वीसी के खिलाफ इस तरह का यह दूसरा मसला है।
फीस बढ़ोतरी पर पीयू काउंसिल का ही विरोध
जैसे ही कैंपस में बात फैली की सिंडिकेट ने फीस बढ़ोतरी का एजेंडा पास कर दिया है, उसी के साथ विरोध शुरू हो गया। पीयू स्टूडेंट काउंसिल की सचिव वाणी सूद ने भी इस फैसले का विरोध किया। वाणी ने कहा कि फीस पहले 20 फीसदी बढ़नी थी, जिसके विरोध में काउंसिल रही। भले ही कम करके, लेकिन फीस बढ़ाई है, जिसका विरोध किया जाता है। फीस बढ़ोतरी आधार रहित है। अब तो पंजाब ने भी पीयू को बजट देना शुरू कर दिया है।
इधर विपक्ष ने भी घेरा
एबीवीपी के वरिष्ठ नेता हरमनजोत सिंह के मुताबिक शिक्षा बेचने के लिए नहीं है। फीस बढ़ोतरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फीस बढ़ना स्टूडेंट काउंसिल की नाकामी है, जिनका पीयू प्रबंधन पर इतना भी प्रभाव नहीं है कि वे छात्र विरोधी फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास होने से नहीं रोक पाए।