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पंजाब यूनिवर्सिटी में हर साल खाली रह जाती हैं पांच फीसदी सीटें, वीसी के आदेश- रास्ता निकालें
Sat, 28 Dec 2019 02:28 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 28 Dec 2019 02:28 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी
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पंजाब यूनिवर्सिटी में हर साल एडमिशन के लिए खाली रहने वाली सीटों को भरने की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। इसके लिए वीवी प्रो. राजकुमार ने सभी विभाग अध्यक्षों को आदेश दिए हैं। शुरू से लेकर सेशन के मध्य में यह सीटें किन नियमों से भरी जा सकती हैं और स्टूडेंट्स कैसे आ सकते हैं। इस पर चेयरमैन फैसला लें, ताकि आने वाले एडमिशन सेशन में यह सीटें खाली न रहने पाएं। पीयू में अगर आंकड़ों पर गौर करें तो यहां 15 हजार सीटें हैं। इन सीटों पर हर साल एडमिशन जुलाई से शुरू होकर अगस्त-सितंबर तक चलते हैं।
पिछले कई साल में दो से पांच फीसदी सीटें खाली भी रही हैं तो कुछ स्टूडेंट दाखिला लेने के बाद बीच में छोड़ गए। ऐसे में खाली सीटें रहने से पीयू को भी नुकसान है और इन सीटों पर जरूरतमंद और मानक पूरे करने वाले स्टूडेंट्स को दाखिला दिया जा सकता है। पिछले साल भी दो फीसदी सीटें खाली रही थीं। दो दर्जन से अधिक स्टूडेंट सेशन के बीच में ही पढ़ाई छोड़ गए थे और सीटें खाली हो गई थी। अब इन खाली सीटों को भरने के लिए वीसी प्रो. राजकुमार ने योजना बनाई है।
उन्होंने सभी विभाग अध्यक्षों से कहा है कि खाली सीटों को भरने के रास्ते वह खुद निकालें। अपने-अपने विभाग में सीटें खाली न रहें, इस पर ध्यान दें। सीट खाली नहीं रहेगी तो रैंकिंग आदि में भी उसका लाभ मिलेगा और पीयू को भी फीस आने से ज्यादा लाभ होगा, जिससे बजट में बढ़ोतरी हो सकेगी। इसके लिए वीसी ने फरवरी तक का समय सभी विभाग अध्यक्षों को दिया है।
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कॉलेजों में भी खाली न रहें सीटें
जिस तरह पीयू योजना बना रहा है, उसी तरह पीयू से संबद्घ 192 कॉलेज भी इसी तरह रास्ता निकाल सकते हैं ताकि उनके यहां भी एडमिशन के दौरान सीटें खाली न रहें। मालूम हो कि पीयू और उससे संबद्ध इन कॉलेजों में हर साल करीब 2.50 लाख स्टूडेंट्स शिक्षा पाते हैं। इनकेअलावा 35 से 40 हजार स्टूडेंट हर साल प्राइवेट फार्म भरकर पढ़ाई करते हैं। इन सभी के परीक्षा नियंत्रक विभाग कराता है। इस साल यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में सीटें बढ़ने की उम्मीद है।
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पिछले कई साल में दो से पांच फीसदी सीटें खाली भी रही हैं तो कुछ स्टूडेंट दाखिला लेने के बाद बीच में छोड़ गए। ऐसे में खाली सीटें रहने से पीयू को भी नुकसान है और इन सीटों पर जरूरतमंद और मानक पूरे करने वाले स्टूडेंट्स को दाखिला दिया जा सकता है। पिछले साल भी दो फीसदी सीटें खाली रही थीं। दो दर्जन से अधिक स्टूडेंट सेशन के बीच में ही पढ़ाई छोड़ गए थे और सीटें खाली हो गई थी। अब इन खाली सीटों को भरने के लिए वीसी प्रो. राजकुमार ने योजना बनाई है।
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उन्होंने सभी विभाग अध्यक्षों से कहा है कि खाली सीटों को भरने के रास्ते वह खुद निकालें। अपने-अपने विभाग में सीटें खाली न रहें, इस पर ध्यान दें। सीट खाली नहीं रहेगी तो रैंकिंग आदि में भी उसका लाभ मिलेगा और पीयू को भी फीस आने से ज्यादा लाभ होगा, जिससे बजट में बढ़ोतरी हो सकेगी। इसके लिए वीसी ने फरवरी तक का समय सभी विभाग अध्यक्षों को दिया है।
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कॉलेजों में भी खाली न रहें सीटें
जिस तरह पीयू योजना बना रहा है, उसी तरह पीयू से संबद्घ 192 कॉलेज भी इसी तरह रास्ता निकाल सकते हैं ताकि उनके यहां भी एडमिशन के दौरान सीटें खाली न रहें। मालूम हो कि पीयू और उससे संबद्ध इन कॉलेजों में हर साल करीब 2.50 लाख स्टूडेंट्स शिक्षा पाते हैं। इनकेअलावा 35 से 40 हजार स्टूडेंट हर साल प्राइवेट फार्म भरकर पढ़ाई करते हैं। इन सभी के परीक्षा नियंत्रक विभाग कराता है। इस साल यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में सीटें बढ़ने की उम्मीद है।