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फीस पर फसादः वीसी ने गवर्नर को सौंपी रिपोर्ट, आर्थिक संकट पर जताई चिंता
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 18 Apr 2017 12:32 PM IST
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Punjab University Professor Arun Kumar Grover
पीयू में फीस वृद्धि के मसले पर वीसी अरुण ग्रोवर ने पंजाब के गवर्नर एवं यूटी के प्रशासक बीपी बदनौर से मिलकर पीयू की वित्तीय रिपोर्ट सौंप दी है। साथ ही उन्होंने इस बाबत हाईकोर्ट में हुई कार्यवाही से भी गवर्नर को अवगत कराया। रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि यदि यूजीसी, पंजाब और केंद्र सरकार की बेरुखी इसी तरह बरकरार रही तो इस वित्त वर्ष में भी पंजाब यूनिवर्सिटी का आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।
इसके पीछे तर्क दिया गया कि जहां पीयू का प्रस्तावित खर्च काफी बढ़ गया है, वहीं आंतरिक आय में उतना इजाफा नहीं दिख रहा है। लिहाजा पीयू को पंजाब, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन और केंद्र सरकार के अतिरिक्त बजट पर ही आश्रित रहना पड़ेगा। पीयू की इस वित्त वर्ष की प्रस्तावित आय 271.33 करोड़ है जबकि खर्च 515.61 करोड़ है। जबकि पिछले साल पीयू ने 260 करोड़ कमाए थे, लेकिन खर्च हुआ 473.73 करोड़। अब तक यह कमी यूजीसी और पंजाब सरकार अपने निर्धारित बजट से पूरा करती आई है।
पीयू की सारी वित्तीय स्थिति गर्वनर महोदय के समक्ष रख दी है। पीयू का घाटा तो केंद्र, पंजाब और यूजीसी को ही पूरा करना पड़ेगा। वरना हालात और ज्यादा बिगड़ जाएंगे। गवर्नर से आग्रह किया गया है कि वे एक प्रतिनिधिमंडल लेकर तुरंत पीयू चांसलर एवं उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर उनसे हस्तक्षेप की मांग करें।
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- अरुण ग्रोवर, वाइस चांसलर, पंजाब यूनिवर्सिटी
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इसके पीछे तर्क दिया गया कि जहां पीयू का प्रस्तावित खर्च काफी बढ़ गया है, वहीं आंतरिक आय में उतना इजाफा नहीं दिख रहा है। लिहाजा पीयू को पंजाब, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन और केंद्र सरकार के अतिरिक्त बजट पर ही आश्रित रहना पड़ेगा। पीयू की इस वित्त वर्ष की प्रस्तावित आय 271.33 करोड़ है जबकि खर्च 515.61 करोड़ है। जबकि पिछले साल पीयू ने 260 करोड़ कमाए थे, लेकिन खर्च हुआ 473.73 करोड़। अब तक यह कमी यूजीसी और पंजाब सरकार अपने निर्धारित बजट से पूरा करती आई है।
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पीयू की सारी वित्तीय स्थिति गर्वनर महोदय के समक्ष रख दी है। पीयू का घाटा तो केंद्र, पंजाब और यूजीसी को ही पूरा करना पड़ेगा। वरना हालात और ज्यादा बिगड़ जाएंगे। गवर्नर से आग्रह किया गया है कि वे एक प्रतिनिधिमंडल लेकर तुरंत पीयू चांसलर एवं उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर उनसे हस्तक्षेप की मांग करें।
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- अरुण ग्रोवर, वाइस चांसलर, पंजाब यूनिवर्सिटी