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बढ़ी तनख्वाह का बोझ पीयू के स्टूडेंट्स पर क्यों आए: वीसी

Thu, 02 Nov 2017 09:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 02 Nov 2017 09:09 AM IST
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Punjab University to implement the recommendations of the Seventh Pay Commission
VC Arun Grover On PU - फोटो : File Photo
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी में मंथन शुरू हो गया है। इसके लिए एक कमेटी भी बनाई गई जो बोर्ड ऑफ फाइनेंस में अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगी। पीयू के पास इतना पैसा नहीं है कि सातवें वेतन आयोग के मुताबिक दो साल का एरियर और आगे की तनख्वाह दी जा सके।
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वहीं वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने सवाल उठाया है कि बढ़ी हुई तनख्वाह का बोझ पीयू के स्टूडेंट्स पर क्यों आए, क्योंकि डीयू सहित अन्य यूनिवर्सिटीज को केंद्र ने पैसा दिया है। सातवां वेतन आयोग केंद्र से जारी हुआ है, तो इसके लिए जो अतिरिक्त पैसों की जरूरत है वह भी केंद्र को ही देने चाहिए, जैसे की अन्य यूनिवर्सिटीज में दिए जाएंगे। पीयू प्रबंधन को आयोग की सिफारिशें लागू करना फिलहाल के बजट में पीयू पर भारी पड़ रहा है। हालांकि वीसी इस हक में नहीं हैं कि स्टूडेंट्स पर बोझ पड़े। पीयू इस बारे में यूजीसी में अपना पक्ष रखेगी।
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पीयू के टीचर्स को यूजीसी स्केल मिलता है। ऐसे में उन्हें सातवें आयोग की सिफारिशों पर तनख्वाह और अन्य मद देने होंगे। वित्तीय बोझ से जूझ रही पीयू को बचाने के लिए जब हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया तो केंद्र और पंजाब से बजट बढ़ाया गया। केंद्र से अब पीयू के लिए 208 करोड़ रुपये तय किए गए हैं, जिस पर करीब छह फीसदी सालाना बढ़ोतरी भी है। वहीं सातवें वेतन आयोग के बाद इस बजट से काम नहीं चल पाएगा। प्राथमिक तौर पर अंदाजा लगाया गया है कि पीयू को करीब 250 करोड़ रुपये चाहिए। हालांकि अभी गठित की गई कमेटी सभी पहलु परखने के बाद तय करेगी कि एरियर देने के लिए कितना पैसा और आगे की तनख्वाहें देने के लिए कितने सालाना बजट की जरूरत पड़ेगी।
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