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सिंडीकेट मीटिंग: चांसलर को नोटिस भेजने संबंधी मामले की जांच करेगी कमेटी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 13 Feb 2017 12:37 AM IST
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Punjab University Professor Arun Kumar Grover
- फोटो : File Photo
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सिंडीकेट ने प्रोफेसर वीके चोपड़ा रीइंप्लाइमेंट के मामले में कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। यह कमेटी वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर की अध्यक्षता में काम करेगी। कमेटी गठन का फैसला रविवार को बुलाई गई स्पेशल सिंडीकेट की बैठक में लिया गया।
यह कमेटी प्रो. चोपड़ा का पुराना रिकॉर्ड भी जांचेगी। बैठक में इस बात पर भी जमकर चर्चा हुई कि सीधे चांसलर को नोटिस भेजने जैसे मामलों में सख्त नियम बनाए जाएं। इसके लिए अलग से कोड ऑफ कंडक्ट बने। ऐसा करने से पहले पीयू प्रशासन अनौपचारिक तौर पर टीचर्स संगठनों से हर पहलू पर चर्चा भी करेगा। मीटिंग से पहले यह भी चर्चा थी कि चांसलर को लीगल नोटिस दिए जाने के मामले में पीयू प्रशासन हाईकोर्ट जाने का रास्ता भी चुन सकता है। लेकिन रविवार की मीटिंग में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई।
पंजाब यूनिवर्सिटी के इवनिंग स्टडीज विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर वीके चोपड़ा ने अपनी रीइंप्लाइमेंट के मामले में सीधे पीयू चांसलर कम देश के उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी को लीगल नोटिस भिजवाया था। पीयू प्रशासन ने इस बात पर खासी नाराजगी व्यक्त की। 2013 में 60 साल पूरे होने पर रिटायरमेंट के बाद पीयू नियमों के तहत प्रो. चोपड़ा को रीइंप्लाइमेंट दी गई थी। प्रो. चोपड़ा ने अपनी दूसरी पारी में पीयू की वित्तीय अनियमितताओं की पोल पट्टी खोलनी शुरू कर दी। प्रो. चोपड़ा ने कुछ समय पहले ही प्रशासन पर आरोप लगाया था कि पीयू के ग्रांट को लेकर हाईकोर्ट में जो केस लंबित है उसमें यूजीसी और एमएचआरडी हॉस्टल घोटाले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इस घोटाले में पीयू के पूर्व डीएसडब्ल्यू के भाई को गलत तरीके से हॉस्टल के ठेके देने के आरोप लगाए गए थे।
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यह कमेटी प्रो. चोपड़ा का पुराना रिकॉर्ड भी जांचेगी। बैठक में इस बात पर भी जमकर चर्चा हुई कि सीधे चांसलर को नोटिस भेजने जैसे मामलों में सख्त नियम बनाए जाएं। इसके लिए अलग से कोड ऑफ कंडक्ट बने। ऐसा करने से पहले पीयू प्रशासन अनौपचारिक तौर पर टीचर्स संगठनों से हर पहलू पर चर्चा भी करेगा। मीटिंग से पहले यह भी चर्चा थी कि चांसलर को लीगल नोटिस दिए जाने के मामले में पीयू प्रशासन हाईकोर्ट जाने का रास्ता भी चुन सकता है। लेकिन रविवार की मीटिंग में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई।
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पंजाब यूनिवर्सिटी के इवनिंग स्टडीज विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर वीके चोपड़ा ने अपनी रीइंप्लाइमेंट के मामले में सीधे पीयू चांसलर कम देश के उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी को लीगल नोटिस भिजवाया था। पीयू प्रशासन ने इस बात पर खासी नाराजगी व्यक्त की। 2013 में 60 साल पूरे होने पर रिटायरमेंट के बाद पीयू नियमों के तहत प्रो. चोपड़ा को रीइंप्लाइमेंट दी गई थी। प्रो. चोपड़ा ने अपनी दूसरी पारी में पीयू की वित्तीय अनियमितताओं की पोल पट्टी खोलनी शुरू कर दी। प्रो. चोपड़ा ने कुछ समय पहले ही प्रशासन पर आरोप लगाया था कि पीयू के ग्रांट को लेकर हाईकोर्ट में जो केस लंबित है उसमें यूजीसी और एमएचआरडी हॉस्टल घोटाले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इस घोटाले में पीयू के पूर्व डीएसडब्ल्यू के भाई को गलत तरीके से हॉस्टल के ठेके देने के आरोप लगाए गए थे।
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आज बोर्ड ऑफ फाइनेंस मीटिंग
Panjab University
- फोटो : amar ujala
तीन साल के बाद पीयू प्रशासन ने 2016 में प्रो. चोपड़ा का रीइंप्लाइमेंट इस आधार पर रद्द कर दिया कि इस पीरियड के दौरान वह निर्धारित शैक्षणिक पैमानों पर खरा नहीं उतर पाए। पीयू सीनेट ने भी रीइंप्लाइमेंट रद्द कर दिया। इसके खिलाफ प्रो. चोपड़ा हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने मामले में स्टे कर दिया। 14 फरवरी को इस मामले में आगे सुनवाई होनी है।
नोटिस की तकनीकी पहलुओं पर चर्चा
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि पीयू के चासंलर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को प्रोटोकाल को देखते हुए पार्टी नहीं बनाया जा सकता और न ही कोई लीगल नोटिस उन्हें दिया जा सकता है। इस पहलू को लेकर सिंडीकेट सदस्यों ने प्रो. नीलम पॉल मामले का उदाहरण याद दिलवाते हुए कहा कि उनके केस में हाईकोर्ट ने उपराष्ट्रपति को नोटिस नहीं दिए जा सकने की बात कही थी। वहीं दूसरी तरफ नोटिस भेजने वाले प्रो. चोपड़ा पहले ही तर्क दे चुके हैं कि उन्होंने यूनिवर्सिटी के चांसलर को नोटिस भेजा है न कि देश के उपराष्ट्रपति को।
आज बोर्ड ऑफ फाइनेंस मीटिंग
पीयू के बोर्ड ऑफ फाइनेंस की बैठक 13 फरवरी को होगी। जिसमें बजट व अन्य वित्तीय पहलुओं पर चर्चा होगी। इस प्रस्ताव में बजट से जुड़े कई प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है।
नोटिस की तकनीकी पहलुओं पर चर्चा
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि पीयू के चासंलर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को प्रोटोकाल को देखते हुए पार्टी नहीं बनाया जा सकता और न ही कोई लीगल नोटिस उन्हें दिया जा सकता है। इस पहलू को लेकर सिंडीकेट सदस्यों ने प्रो. नीलम पॉल मामले का उदाहरण याद दिलवाते हुए कहा कि उनके केस में हाईकोर्ट ने उपराष्ट्रपति को नोटिस नहीं दिए जा सकने की बात कही थी। वहीं दूसरी तरफ नोटिस भेजने वाले प्रो. चोपड़ा पहले ही तर्क दे चुके हैं कि उन्होंने यूनिवर्सिटी के चांसलर को नोटिस भेजा है न कि देश के उपराष्ट्रपति को।
आज बोर्ड ऑफ फाइनेंस मीटिंग
पीयू के बोर्ड ऑफ फाइनेंस की बैठक 13 फरवरी को होगी। जिसमें बजट व अन्य वित्तीय पहलुओं पर चर्चा होगी। इस प्रस्ताव में बजट से जुड़े कई प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है।