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पीयूः सिंडिकेट चुनाव में पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभा सकते हैं वाइस चांसलर, एंटी ग्रुप नहीं
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 07 Dec 2018 09:46 AM IST
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पीयू वीसी राजकुमार
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पंजाब विश्वविद्यालय के सिंडिकेट के चुनाव में वाइस चांसलर पर्दे के पीछे से अहम भूमिका अदा कर सकते हैं, क्योंकि कोई एंटी ग्रुप नहीं है। वैसे वीसी का कोई डायरेक्ट रोल नहीं होता है, लेकिन इस बार स्थिति कुछ और है। अभी तक देखा गया है कि सिंडिकेट चुनाव में दो गुट हावी होते रहे हैं। एक गुट वीसी तो दूसरा उनके एंटी होता था। लेकिन इस बार दोनों ही गुट वीसी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि वीसी दोनों गुटों के प्रमुखों से बात करके 50-50 सदस्य इस चुनाव में शामिल करवाने की बात रख सकते हैं ताकि चुनाव शांति से निपट जाए और गुटबाजी को आगे बढ़ावा न मिले। हालांकि चुनाव परिणाम ही इसकी पूरी स्थिति साफ करेंगे।
पिछले चुनावों पर गौर फरमाया जाए तो सिंडिकेट के चुनाव में दो गुट हावी होते रहे हैं। एक गुट प्रो. नवदीप गोयल तो दूसरा प्रो. अशोक गोयल। इसमें एक गुट के सदस्य वीसी के हमेशा करीबी रहे तो दूसरा गुट विरोध में उतरता रहा है। पहली बार ऐसा है कि वीसी के विरोध में कोई गुट नजर नहीं आ रहा है। बताया जाता है कि वीसी ने सिंडिकेट व सीनेट की जितनी बैठकें हुई हैं उसमें किसी भी गुट को अधिक तरजीह नहीं दी। दोनों को समान रूप से लेकर चले। तीन माह में जांच को बनाई गई कमेटी हो या फिर अन्य बैठकें हुई हों, उसमें दोनों ही गुटों के सदस्यों को शामिल किया है। किसी एक पक्ष को बढ़ावा नहीं दिया।
चुनाव पर रहेगा ध्यान, आसानी से निपट जाएगी बैठक
इस बार सीनेट की बैठक 15 दिसंबर को होने जा रही है। इसके अगले दिन सिंडिकेट का चुनाव होगा। कई साल बाद ऐसा हुआ कि पहले बैठक होगी और बाद में चुनाव। सूत्र कहते हैं कि पिछले बार सीनेट की बैठक में हंगामा हो गया था। इस बार बैठक आसानी से निपट जाए, इसलिए ऐसा किया गया है। कारण, सदस्यों का ध्यान चुनाव पर होगा और बैठक आसानी से निपट जाएगी।
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91 सदस्य डालेंगे वोट
सिंडिकेट के 15 सदस्यों के लिए चुनाव होगा। इसमें सीनेट के 91 सदस्य वोट करेंगे। दिनभर यह प्रक्रिया चलती है और शाम तक रिजल्ट आ जाता है। अब तक सिंडिकेट में प्रो. नवदीप गोयल पक्ष का दबदबा रहा है। इस बार भी वह बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं प्रो. अशोक गोयल भी दबदबा कायम करने के लिए तैयारी में जुटे हैं।
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पिछले चुनावों पर गौर फरमाया जाए तो सिंडिकेट के चुनाव में दो गुट हावी होते रहे हैं। एक गुट प्रो. नवदीप गोयल तो दूसरा प्रो. अशोक गोयल। इसमें एक गुट के सदस्य वीसी के हमेशा करीबी रहे तो दूसरा गुट विरोध में उतरता रहा है। पहली बार ऐसा है कि वीसी के विरोध में कोई गुट नजर नहीं आ रहा है। बताया जाता है कि वीसी ने सिंडिकेट व सीनेट की जितनी बैठकें हुई हैं उसमें किसी भी गुट को अधिक तरजीह नहीं दी। दोनों को समान रूप से लेकर चले। तीन माह में जांच को बनाई गई कमेटी हो या फिर अन्य बैठकें हुई हों, उसमें दोनों ही गुटों के सदस्यों को शामिल किया है। किसी एक पक्ष को बढ़ावा नहीं दिया।
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चुनाव पर रहेगा ध्यान, आसानी से निपट जाएगी बैठक
इस बार सीनेट की बैठक 15 दिसंबर को होने जा रही है। इसके अगले दिन सिंडिकेट का चुनाव होगा। कई साल बाद ऐसा हुआ कि पहले बैठक होगी और बाद में चुनाव। सूत्र कहते हैं कि पिछले बार सीनेट की बैठक में हंगामा हो गया था। इस बार बैठक आसानी से निपट जाए, इसलिए ऐसा किया गया है। कारण, सदस्यों का ध्यान चुनाव पर होगा और बैठक आसानी से निपट जाएगी।
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91 सदस्य डालेंगे वोट
सिंडिकेट के 15 सदस्यों के लिए चुनाव होगा। इसमें सीनेट के 91 सदस्य वोट करेंगे। दिनभर यह प्रक्रिया चलती है और शाम तक रिजल्ट आ जाता है। अब तक सिंडिकेट में प्रो. नवदीप गोयल पक्ष का दबदबा रहा है। इस बार भी वह बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं प्रो. अशोक गोयल भी दबदबा कायम करने के लिए तैयारी में जुटे हैं।