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सिंडिकेट ने पीयू संविधान दरकिनार कर दर्जनों प्राचार्यों को दिया एक्सटेंशन, आदेश पलटने की मांग

Mon, 07 Jan 2019 03:42 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 07 Jan 2019 03:42 PM IST
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Punjab University Syndicate Decision Against Constitution about College Principals
punjab university
वर्ष 2014 में संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए पीयू सिंडिकेट ने नियम लागू कर दिया कि 60 साल के बाद भी एडेड कॉलेजों के प्राचार्य उपयुक्तता के आधार पर प्रिंसिपल बने रहेंगे। जबकि कहा जाता है कि पंजाब यूनिवर्सिटी अपने खुद के संविधान व कैलेंडर से चलता है। उसी के मुताबिक निर्णय लिए जाते हैं। संविधान सर्वोपरि माना गया है। लेकिन वर्ष 2014 में संविधान की धज्जियां उड़ाई गईं। दर्जनों कॉलेजों में ऐसे ही प्राचार्य काम कर रहे हैं।
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इसके कारण न तो नए लोगों को नौकरी का मौका मिल रहा है और न ही पीयू संविधान का पालन हो पा रहा है। इसको लेकर सीनेट सदस्य डॉ. सुभाष शर्मा ने चांसलर वेंकैया नायडू को खत लिखा है। उन्होंने कहा है कि पीयू का अपना कैलेंडर है। उसी के मुताबिक नियम बनाए जाते हैं। कई एडेड कॉलेजों में सेवानिवृत्त प्राचार्य काम कर रहे हैं जबकि यह कैलेंडर के खिलाफ है। 24 सितंबर 2017 व 16 दिसंबर 2017 को सिंडिकेट के बनाए नियम का विरोध सीनेट की बैठक में किया गया, लेकिन उसे बदला नहीं गया।
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उन्होंने कहा कि 60 साल सेवानिवृत्ति के बाद उसी पद पर बने रहने की याचिकाओं को हरियाणा व पंजाब हाईकोर्ट ने भी खारिज किया है। यूजीसी भी प्रिंसिपल की नौकरी के लिए 60 साल को ही मान्य करती है। ऐसे नियम को बदला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि आखिर सेवानिवृत्त प्राचार्यों को एक्सटेंशन देने के मुख्य कारण क्या हैं, इसकी भी पड़ताल की जाए और साथ ही जारी सिंडिकेट के पत्र व नियमों को शून्य घोषित किया जाए।
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व्यक्तिगत लाभ के लिए घालमेल
जानकार कहते हैं कि बेरोजगारी बहुत है। कुछ अनुभवी लोग भी नौकरी की तलाश में हैं। यदि इन एडेड कॉलेजों के प्रबंधन ने वैकेंसी प्राचार्य के निकाली होती तो जरूर पात्र लोग मिलते, लेकिन उनकी मंशा ऐसी नहीं मानी जा रही। सूत्रों का कहना है कि व्यक्तिगत लाभ इसमें अधिक दिख रहा है। कहा गया कि कॉलेज प्रबंधन ने अपना लाभ देखा तो पीयू की सिंडिकेट को तो उसे ध्यान रखना चाहिए था। 65 साल की उम्र में भी सेवानिवृत्त प्राचार्य कॉलेजों में बैठे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।


सीनेट में इस बार होगा इस मुद्दे पर घमासान
सीनेट की बैठक में इस बार इस मुद्दे पर घमासान होगा। सूत्रों का कहना है कि सीनेट में वह पक्ष भी भारी हो गया जिसके सदस्य इस बार सिंडिकेट में नहीं हैं। वह इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। दावा किया जा रहा है कि सीनेट पूर्व में जारी सिंडिकेट के उस पत्र को पलटने की तैयारी कर रही है। हालांकि दूसरा पक्ष भी अपने निर्णय को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत के साथ तैयारी में जुटा हुआ है।
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