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फरमानः पीयू स्टूडेंट 15 दिन में करें री-अपीयर के लिए आवेदन, जल्दी आए नतीजा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 Mar 2018 05:34 PM IST
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दाखिला
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब यूनिवर्सिटी में री-अपीयर की परीक्षा देने वालों के लिए सबसे बड़ी समस्या आती है नतीजे में देरी। इससे निपटने के लिए नया नियम बनाया गया है। एक तो परीक्षा दोबारा दो, उस पर से परिणाम के लिए इंतजार करो। ऐसे में समय और पैसे की बर्बादी होती है।
अब परीक्षा का नतीजा आने के बाद 15 दिन के अंदर री-अपीयर का आवेदन कर सकेंगे। जबकि पहले यह प्रक्रिया 21 दिन के बाद शुरू होती थी। साथ ही स्टूडेंट का पेपर दोबारा से चैक करने के लिए संबंधित कॉलेज, विभाग या चैकर के घर में नहीं भेजा जाएगा। बल्कि एग्जामिनेशन ब्रांच में ही उसकी चेकिंग कराई जाएगी।
इससे री-अपीयर के नतीजे जल्द आने की उम्मीद है। री-अपीयर के नतीजे देर से आने के चलते अक्सर स्टूडेंट्स शिकायत करते थे। कुछ समय पहले पीयू स्टूडेंट काउंसिल की सचिव वानी सूद ने भी पीयू प्रबंधन को एक मांग पत्र दिया था, जिसमें मांग की गई थी कि इस समस्या से निपटने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
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दरअसल जो स्टूडेंट मुख्य परीक्षा में पास नहीं हो पाते उनके पास रिअपियर या रिवेल्यूएशन का जरिया होता है ताकि परीक्षा पास हो सके। लेकिन इनका परिणाम इतनी देर से आता है कि स्टूडेंट का कोर्स खत्म हो जाता है। रिअपियर के नंबर के चक्कर में डिग्री लटकी रहती है। इसके चलते अगले कोर्स में दाखिला लेने में भी दिक्कत आती है।
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अब परीक्षा का नतीजा आने के बाद 15 दिन के अंदर री-अपीयर का आवेदन कर सकेंगे। जबकि पहले यह प्रक्रिया 21 दिन के बाद शुरू होती थी। साथ ही स्टूडेंट का पेपर दोबारा से चैक करने के लिए संबंधित कॉलेज, विभाग या चैकर के घर में नहीं भेजा जाएगा। बल्कि एग्जामिनेशन ब्रांच में ही उसकी चेकिंग कराई जाएगी।
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इससे री-अपीयर के नतीजे जल्द आने की उम्मीद है। री-अपीयर के नतीजे देर से आने के चलते अक्सर स्टूडेंट्स शिकायत करते थे। कुछ समय पहले पीयू स्टूडेंट काउंसिल की सचिव वानी सूद ने भी पीयू प्रबंधन को एक मांग पत्र दिया था, जिसमें मांग की गई थी कि इस समस्या से निपटने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
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दरअसल जो स्टूडेंट मुख्य परीक्षा में पास नहीं हो पाते उनके पास रिअपियर या रिवेल्यूएशन का जरिया होता है ताकि परीक्षा पास हो सके। लेकिन इनका परिणाम इतनी देर से आता है कि स्टूडेंट का कोर्स खत्म हो जाता है। रिअपियर के नंबर के चक्कर में डिग्री लटकी रहती है। इसके चलते अगले कोर्स में दाखिला लेने में भी दिक्कत आती है।