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छात्र संघ चुनाव कल, पीयू व कॉलेजों में थम गया प्रचार अभियान, पहली बार नहीं हुई कोई रैली

Thu, 05 Sep 2019 12:13 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 05 Sep 2019 12:13 PM IST
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Punjab University Student Council Elections Campaign Stopped
छात्र संघ चुनाव प्रचार करते नेता - फोटो : अमर उजाला
पंजाब यूनिवर्सिटी व 12 कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव का शोर थम गया है। चुनाव से 48 घंटे पहले प्रचार पर रोक लग गई है। 6 सितंबर को चुनाव से पहले पीयू में 75 डिपार्टमेंट रिप्रजेंटेटिव (डीआर) निर्विरोध चुने गए। बाकी 23 विभागों में 53 डीआर के लिए चुनाव होंगे। इस बार चुनाव प्रचार बंद होने से पहले  किसी भी संगठन ने रैली नहीं निकाली और न ही चुनाव कमेटी से किसी प्रकार की कोई अनुमति ली गई। इसको लेकर सभी छात्र भी हैरत में हैं। माना जा रहा है कि इस बार मुकाबला कड़ा है।
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रैली में भीड़ को भांपकर यह पता कर लिया जाता है कि इस बार किसका जोर है। इस कारण रैली नहीं निकाली गई। बुधवार को छात्र संगठनों ने प्रचार बंद होने से पहले हर आखिरी विद्यार्थी तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की। इसमें एबीवीपी, एसएफएस, एनएसयूआई, सोई आदि संगठन जुटे रहे। एसएफएस ने नाटक के जरिये छात्रों से वोट मांगे। इस बीच धमकियों का दौर भी जारी हो गया है।  एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार निखिल नर्मेता ने आरोप लगाया कि उनके परिवार को अज्ञात नंबर से धमकी दी गई।
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डीआर जिसके जितने, उतने वोट पक्के
छात्र संगठनों का सबसे अधिक जोर डीआर बनाने पर होता है। माना जाता है कि जिसके जितने डीआर उतने ही संगठन मजबूत होते हैं और उन्हें वोट मिलते हैं। इस बार डीआर के 128 पद हैं। इसमें से 53 पर ही चुनाव होगा। बाकी निर्विरोध चुने गए। माना जा रहा है कि निर्विरोध जो डीआर चुने गए हैं उसमें सभी छात्र संगठनों के लगभग बराबर आंकड़े हैं। इसके अलावा क्लास रिप्रजेंटेटिव भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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ऐसे चला प्रचार

आखिरी दिन पीयू के छात्र संगठनों ने यूआईईटी, यूआईएलएस, लॉ, डेंटल कॉलेज, यूआईएएमएस आदि विभागों पर अधिक जोर दिया। यहां सर्वाधिक वोटर हैं। हर विद्यार्थी से छात्र संगठनों ने संपर्क किया और अपने घोषणा पत्रों की कॉपियां उनको दी। वहीं साइंस स्कूल के विद्यार्थियों से एसएफएस ने वोट मांगे,  दूसरी ओर एबीवीपी ने लॉ विभाग से अधिक वोट देने की मांग की। तर्क दिया कि अध्यक्ष पद उम्मीदवार उन्हीं कक्षाओं से हैं। वहीं एनएसयूआई ने यूआईईटी में ताकत झोंकी। यहीं पर सोई के अध्यक्ष पद उम्मीदवार व पैनल ने वोट मांगे। वहीं कॉलेजों में छात्र संगठनों के उम्मीदवारों ने हर विद्यार्थी तक पहुंच बनाई और अपनी घोषणाओं के नाम पर वोट मांगे।
 
धमकियों का दौर भी चला
यूआईईटी में दो दिन हुए हंगामे के बाद सभी छात्र संगठनों के अध्यक्ष पद उम्मीदवारों व अन्य पैनल के सदस्यों को धमकियां दी गईं। इसका विरोध भी सभी ने जताया। पुलिस तक भी यह मामले पहुंचे। बताया जाता है कि कुछ छात्र संगठनों ने अपनी सुरक्षा की मांग भी की है। वहीं पुलिस भी धमकियों को लेकर पूरी तरह मुस्तैद रही। साथ ही छात्र नेताओं से धमकी वाले नंबर भी लिए। बताया जाता है कि उनके नंबर सर्विलांस पर लगा दिए हैं। एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार निखिल नर्मेता ने आरोप लगाया कि उनके परिवार को अज्ञात नंबर से धमकी दी गई। धमकी में कहा गया कि अपने बेटे को चुनाव से अलग करवा दो वरना अंजाम ठीक नहीं होगा।

वाहनों की चेकिंग, प्रिंटेड प्रचार सामग्री जब्त, जाम लगा
पीयू में पुलिस ने गेटों पर चेकिंग अभियान चलाया। हर गाड़ी की डिक्की चेक की। बड़ी संख्या में प्रिंटेड प्रचार सामग्री मिली और बैनर, झंडे भी, सभी को पुलिस ने जब्त कर लिया। गेट नंबर दो पर चेकिंग के कारण लंबा जाम लगा रहा। कुछ छात्र नेताओं ने चेकिंग का विरोध भी किया तो पुलिस ने नोकझोंक भी हुई।

 

अब सोशल मीडिया पर कह रहे छात्र नेता- ये दिल मांगे मोर

पंजाब यूनिवर्सिटी समेत शहर के सभी कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है। छात्र नेता अब सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। हर युवा की जेब में आए मोबाइल ने चुनाव प्रचार का तरीका बदल कर रख दिया है। हाल ही हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जिस तरह से सोशल मीडिया और राजनीतिक दलों की आईटी सैल ने कमान संभाली थी, ठीक उसी तरह छात्र नेताओं की चुनाव मंडली आईटी का कार्य संभाल रही है।

छात्रसंघ चुनाव में हाईटेक प्रचार-प्रसार का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि छात्र दल वोट के लिए म्यूजिक वीडियो, मीम्स, पोस्टर-मोशन पोस्टर, डिजिटल स्टीकर और शॉर्ट फिल्म आदि का सहारा ले रहे हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी की एनएसयूआई ने कुछ शॉर्ट फिल्में बनाई हैं। वीडियो में तीन पात्र हैं, जो एक दूसरे से सवाल पूछते नजर आते हैं। एक पात्र पूछता है कि पार्टी कौन कराता है, तो दूसरा जवाब देता है जो पूरे साल स्टूडेंट्स के लिए काम नहीं करता।

आखिर में तीनों एनएसयूआई को वोट देने की अपील करते हैं। वहीं, एसडी कॉलेज की एसडीसीयू और एसडीएचयू ने प्रेसिडेंट नाम से एक म्यूजिक ऑडियो लांच किया है। यू-ट्यूब पर अपलोड किए वीडियो को अभी तक तीन हजार से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। गाने में एसडी कालेज का भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा छात्र नेता फेसबुक अकाउंट, वाट्सऐप ग्रुप और इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से अपनी बात छात्र-छात्राओं तक पहुंचा रहे हैं।

अलग-अलग ग्रुप

छात्र संगठन और छात्र नेता सोशल मीडिया पर अलग-अलग कॉलेजों के वाट्सऐप और एफबी ग्रुप बनाकर छात्रों को संगठन से जुड़ने व समर्थन देने की अपील कर रहे हैं। इन ग्रुपों में क्रिएटिव पोस्ट के साथ ऑडियो और वीडियो पोस्ट डाली जा रही है।

चुनाव के लिए बन रहे पैरोडी गीत
विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तर्ज पर छात्रसंघ चुनाव में भी प्रत्याशियों व छात्र संगठनों के पैरोडी गीतों की बहार आ गई है। सोशल मीडिया पर इन गीतों को वायरल कर छात्र नेता अपना प्रचार कर रहे है। इनमें एबीवीपी, एनएसयूआई, सोई और सोपू शामिल हैं।

प्रचार-प्रसार के लिए बनाई टीमें
मतदान नजदीक आते ही प्रचार में भी तेजी आ गई है। उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया में विशेष प्रचार-प्रसार के लिए एक टीम भी बना रखी है जो अपने नेता की फोटो, वीडियो शेयर करने में जुटी रहती है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पक्ष में कमेंट और लाइक करवाकर दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं।

छात्र बोले- कम खर्च में प्रचार का अच्छा माध्यम
छात्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रचार चुनाव का अहम हिस्सा बन चुका है। इसमें युवा शक्ति छात्रसंघ प्रतिनिधि का जोश और उत्साह बढ़ाती है। सोशल मीडिया से नई ऊर्जा मिलती है। छात्र नेता अपना विजन सबके सामने रखता है। यह कम खर्च और अधिक युवाओं तक बात पहुंचाने का अच्छा माध्यम है।

लिंगदोह की सिफारिशों में सोशल मीडिया का जिक्र नहीं
लिंगदोह समिति 2010 की बनी, उस समय सोशल मीडिया पर ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं होता था। इसलिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर लिगदोह की सिफारिशों में कोई जिक्र  नही है। इसलिए स्टूडेंट्स सोशल मीडिया को प्रचार के हर तरह से इस्तेमाल करते हैं। कॉलेजों में सख्ती के कारण अब सोशल मीडिया का उपयोग सबसे अधिक होने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में इसके लिए नियम बनाने की आवश्यकता है।
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