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छात्र संघ चुनावः पीयू में सन्नाटे ने बढ़ाई नेताओं की धड़कनें, वोटरों का मूड नहीं भांप पा रहे संगठन
Thu, 05 Sep 2019 12:31 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 05 Sep 2019 12:31 PM IST
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छात्र संघ चुनाव प्रचार करते नेता
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में इस बार छात्रों की भागीदारी कम होने के चलते प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। जिन जगहों पर छात्र खड़े होकर अपने प्रत्याशियों के फेवर में नारे लगाते थे, आज वह जगह सूनी हैं, वहां पर कई दिनों से सन्नाटा छाया हुआ है। विद्यार्थी के जो झुंड चुनावी सीजन में दिखते थे, वह नजर नहीं आ रहे हैं। कक्षाओं में भी छात्रों की उपस्थिति 40 फीसदी ही नजर आ रही है। ऐसे में वोटरों का मूड कोई नहीं भांप पा रहा है। चिंता लगातार प्रत्याशियों की बढ़ रही है। जानकार बता रहे हैं कि यह सन्नाटा खतरे का भी संकेत हो सकता है।
पीयू में 15 अगस्त तक भीड़ इतनी थी कि स्टूडेंट सेंटर पर खड़े होने के लिए जगह कम पड़ती थी। सैकड़ों विद्यार्थी यहां नजर आते थे लेकिन जैसे ही 22 अगस्त को सीनेट की बैठक हुई तो उसके बाद से माहौल पीयू का बदलता गया। चुनावी घोषणा जैसे ही हुई तो अगस्त के आखिरी सप्ताह में विद्यार्थियों की संख्या कम होेने लगी और पुलिस ने डेरा डालना शुरू कर दिया। प्रत्याशियों ने अपने अपने पैनल उतार दिए। चुनाव प्रचार आज चरम पर है, लेकिन सुनसानी है। न रैली निकाली जा रही हैं और न अन्य कार्यक्रम हो रहे हैं। कक्षाओं में वन टू वन प्रचार हो रहा है।
वहां भी छात्र उन्हें पूरे नजर नहीं आ रहे हैं। कुछ कक्षाओं के दरवाजे भी बंद मिल रहे हैं। इससे प्रत्याशी परेशान हैं। वह समझ नहीं पा रहे कि इस बार आखिर हो क्या रहा है? कुछ संगठनों ने छात्रों को कसौली आदि जगहों पर भ्रमण के लिए भेजा है, लेकिन उसमें भी अधिकांश वह छात्र शामिल हैं जिनके वोट उन्हीं संगठनों के नाम पर पड़ने हैं। वोटर इस बार संगठनों के हाथ नहीं लग रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह सन्नाटा बहुत कुछ बदल सकता है।
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पीयू में 15 अगस्त तक भीड़ इतनी थी कि स्टूडेंट सेंटर पर खड़े होने के लिए जगह कम पड़ती थी। सैकड़ों विद्यार्थी यहां नजर आते थे लेकिन जैसे ही 22 अगस्त को सीनेट की बैठक हुई तो उसके बाद से माहौल पीयू का बदलता गया। चुनावी घोषणा जैसे ही हुई तो अगस्त के आखिरी सप्ताह में विद्यार्थियों की संख्या कम होेने लगी और पुलिस ने डेरा डालना शुरू कर दिया। प्रत्याशियों ने अपने अपने पैनल उतार दिए। चुनाव प्रचार आज चरम पर है, लेकिन सुनसानी है। न रैली निकाली जा रही हैं और न अन्य कार्यक्रम हो रहे हैं। कक्षाओं में वन टू वन प्रचार हो रहा है।
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वहां भी छात्र उन्हें पूरे नजर नहीं आ रहे हैं। कुछ कक्षाओं के दरवाजे भी बंद मिल रहे हैं। इससे प्रत्याशी परेशान हैं। वह समझ नहीं पा रहे कि इस बार आखिर हो क्या रहा है? कुछ संगठनों ने छात्रों को कसौली आदि जगहों पर भ्रमण के लिए भेजा है, लेकिन उसमें भी अधिकांश वह छात्र शामिल हैं जिनके वोट उन्हीं संगठनों के नाम पर पड़ने हैं। वोटर इस बार संगठनों के हाथ नहीं लग रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह सन्नाटा बहुत कुछ बदल सकता है।
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बेस वोट को तोड़ने में जुटे नेता
एबीवीपी, एसएफएस, एनएसयूआई व सोई के अपने-अपने बेस वोट हैं। उन्हीं में जोड़-तोड़ संगठन कर रहे हैं। इसके लिए थिंक टैंक में शामिल नेता रातोंरात बैठकें कर रहे हैं और हर दिन पांच से दस ऐसे छात्रों को बुलाया जा रहा है जो दूसरे संगठनों के वोट बैंक हैं। अब इसमें कितनी कामयाबी मिल रही है यह तो अभी सामने नहीं आ रहा है लेकिन थिंक टैंक व प्रत्याशियों के चेहरे बहुत कुछ बयां कर रहे हैं।
शुक्रवार को चुनाव, घट सकता है चुनावी प्रतिशत
इस बार चुनाव का दिन शुक्रवार तय किया गया है। पीयू में शनिवार व रविवार की छुट्टी रहती है। ऐसे में विद्यार्थी शुक्रवार को अपने घर जा सकते हैं, क्योंकि तीन दिन के अवकाश का वह उपयोग करेंगे। जानकारों का कहना है कि ऐसा हुआ तो वोट प्रतिशत पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार घट जाएगा। चुनाव प्रतिशत घटेगा तो इससे छात्र संगठनों को भी नुकसान होगा।
शुक्रवार को चुनाव, घट सकता है चुनावी प्रतिशत
इस बार चुनाव का दिन शुक्रवार तय किया गया है। पीयू में शनिवार व रविवार की छुट्टी रहती है। ऐसे में विद्यार्थी शुक्रवार को अपने घर जा सकते हैं, क्योंकि तीन दिन के अवकाश का वह उपयोग करेंगे। जानकारों का कहना है कि ऐसा हुआ तो वोट प्रतिशत पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार घट जाएगा। चुनाव प्रतिशत घटेगा तो इससे छात्र संगठनों को भी नुकसान होगा।