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UGC पेपरलेस छात्रसंघ चुनाव करवाने को राजी, आखिरी फैसला पीयू को लेना है
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 28 May 2018 02:55 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के स्टूडेंट काउंसिल चुनाव पूरी तरह से पेपरलेस किए जाने की मांग पर अब यूजीसी ने भी अपनी सहमति दे दी है। यूजीसी ने कहा है कि वह इसके लिए सहमत है लेकिन इस पर पीयू ही अंतिम निर्णय ले सकती है। जहां तक पेपरलेस चुनावी प्रक्रिया का मामला है। यूजीसी पहले ही सभी यूनिवर्सिटी को निर्देश जारी पर लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू करने को कह चुका है। इस वजह से प्रिंट चुनाव सामग्री पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है
इस जानकारी के बाद पीयू की ओर से बताया गया कि इसके लिए पीयू कमेटी गठित कर चुकी है। लिहाजा उन्हें कुछ समय दिया जाए। एक्टिंग चीफ जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस तजिंदर सिंह ढींढसा की खंडपीठ ने इस जानकारी के बाद सुनवाई 2 अगस्त तक स्थगित कर दी है। इस मामले को लेकर एडवोकेट प्रद्युम्न गर्ग द्वारा दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि, पीयू स्टूडेंट काउंसिल के चुनाव में छात्र संगठन और नेता अपने चुनाव प्रचार के लिए प्रिंटेड पोस्टर्स और पंफलेट्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे बड़े पैमाने पर कागज का इस्तेमाल होता है।
एक तो इससे जगह-जगह पोस्टर लगाकर शहर को बदसूरत कर दिया जाता है, बल्कि चुनावों के दौरान और बाद में ये पोस्टर और पंफलेट्स आदि जगह-जगह फेंके मिलते हैं। अगर पूरा चुनाव प्रचार यह नेता और छात्र संगठन पेपर के पोस्टर और पंफलेट्स की बजाय व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिये करें तो, इससे बड़े पैमाने कागजों की बर्बादी रोकने के साथ-साथ साफ-सफाई और पर्यावरण को भी फायदा होगा।
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याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि पूरे विश्व में जंगलों और पेड़ों की कटाई का 40 प्रतिशत हिस्सा कागज बनाए जाने पर लगाया जाता है। तय है कि, कागज बनाए जाने में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती है। वहीं कागज बनाए जाने की पूरी प्रक्रिया में पानी भी काफी बर्बाद होता है। लिहाजा स्टूडेंट काउंसिल के चुनाव के प्रचार को अगर पेपरलेस कर दिया जाए तो इससे पर्यावरण को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
लिंगदोह कमेटी भी पोस्टर पर लगा चुकी है पाबंदी
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया स्टूडेंट काउंसिल के चुनाव के लिए लिंगदोह कमेटी ने जो दिशा-निर्देश तय किये हैं। उनमें यह भी तय किया गया है कि, इन चुनाव में प्रिंटेड पोस्टर्स और पंफलेट्स इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। यहां तक भी निर्देश जारी किए गए हैं की एक कैंपस में प्रत्येक छात्र संगठन के लिए अपने पोस्टर्स लगाए जाने की जगह निर्धारित की जाएगी। इस जगह के सिवा किसी अन्य जगह पर पोस्टर लगाए नहीं जा सकते हैं।
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इस जानकारी के बाद पीयू की ओर से बताया गया कि इसके लिए पीयू कमेटी गठित कर चुकी है। लिहाजा उन्हें कुछ समय दिया जाए। एक्टिंग चीफ जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस तजिंदर सिंह ढींढसा की खंडपीठ ने इस जानकारी के बाद सुनवाई 2 अगस्त तक स्थगित कर दी है। इस मामले को लेकर एडवोकेट प्रद्युम्न गर्ग द्वारा दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि, पीयू स्टूडेंट काउंसिल के चुनाव में छात्र संगठन और नेता अपने चुनाव प्रचार के लिए प्रिंटेड पोस्टर्स और पंफलेट्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे बड़े पैमाने पर कागज का इस्तेमाल होता है।
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एक तो इससे जगह-जगह पोस्टर लगाकर शहर को बदसूरत कर दिया जाता है, बल्कि चुनावों के दौरान और बाद में ये पोस्टर और पंफलेट्स आदि जगह-जगह फेंके मिलते हैं। अगर पूरा चुनाव प्रचार यह नेता और छात्र संगठन पेपर के पोस्टर और पंफलेट्स की बजाय व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिये करें तो, इससे बड़े पैमाने कागजों की बर्बादी रोकने के साथ-साथ साफ-सफाई और पर्यावरण को भी फायदा होगा।
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याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि पूरे विश्व में जंगलों और पेड़ों की कटाई का 40 प्रतिशत हिस्सा कागज बनाए जाने पर लगाया जाता है। तय है कि, कागज बनाए जाने में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती है। वहीं कागज बनाए जाने की पूरी प्रक्रिया में पानी भी काफी बर्बाद होता है। लिहाजा स्टूडेंट काउंसिल के चुनाव के प्रचार को अगर पेपरलेस कर दिया जाए तो इससे पर्यावरण को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
लिंगदोह कमेटी भी पोस्टर पर लगा चुकी है पाबंदी
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया स्टूडेंट काउंसिल के चुनाव के लिए लिंगदोह कमेटी ने जो दिशा-निर्देश तय किये हैं। उनमें यह भी तय किया गया है कि, इन चुनाव में प्रिंटेड पोस्टर्स और पंफलेट्स इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। यहां तक भी निर्देश जारी किए गए हैं की एक कैंपस में प्रत्येक छात्र संगठन के लिए अपने पोस्टर्स लगाए जाने की जगह निर्धारित की जाएगी। इस जगह के सिवा किसी अन्य जगह पर पोस्टर लगाए नहीं जा सकते हैं।