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पीयूः सीनेट मीटिंग में सदस्य बोले- कॉलेजों को मान्यता के नाम पर हो रहा ‘बड़ा खेल’, जांच कराएं

Mon, 16 Dec 2019 01:28 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 16 Dec 2019 01:28 PM IST
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Punjab University Senate Meeting, Discussion on Colleges Affiliation
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
पंजाब यूनिवर्सिटी में हुई सीनेट की बैठक में कॉलेजों को मान्यता देने के लिए बनाई गई कमेटी को सदस्यों ने कटघरे में खड़ा कर दिया। इस मामले को लेकर जहां घंटों गहमागहमी बनी रही, वहीं कुछ देर के लिए हंगामा भी हुआ। सदस्यों ने कहा कि कॉलेजों को मान्यता देने के नाम पर ‘बड़ा खेल’ हो रहा है। लगातार शोषण बढ़ रहा है। नियमों की जांच करने वाले खुद ही नियमों का ज्ञान नहीं रखते। किसी कॉलेजों को मानक पूरे न करने पर मान्यता दे दी जाती है तो कुछ को पूरे होने के बाद भी नहीं दी जाती।
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उन्होंने वीसी से कमेटी के कार्यों की जांच करवाए जाने की मांग की। सभी सदस्यों के आरोपों को सुनने के बाद वीसी एवं सीनेट चेयरमैन प्रो. राजकुमार ने कहा कि वह किसी का हरासमेंट नहीं होने देंगे। इसके लिए जल्द ही कुछ रास्ता निकाला जाएगा। मेंबर सुभाष शर्मा ने कहा, सीनेट के मेंबरों की एक कमेटी बनाई जाए जो मान्यता देने पर लगे आरोपों की जांच कर सके। साथ ही कॉलेजों को मानक पूरे करने के लिए समय दिया जाए और उसके बाद ही मानकों की जांच के लिए कमेटी को भेजा जाना चाहिए।
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मान्यता देने के नाम पर कमीशन का खेल: वीरेंद्र गिल
वीरेंद्र गिल ने कहा कि मान्यता देने के नाम पर कमीशन का खेल हो रहा है। कॉलेजों को अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ रही है। इसको लेकर कुछ मेंबर्स ने हंगामा किया। उसके बाद डीएवी की ओर से भी यह मामला उठाया गया। उन्होंने कहा कि कॉलेज की ओर से पूरे मानक हैं, लेकिन एमबीए की मान्यता देने के लिए रोड़ा अटका दिया गया। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सिंडिकेट के मेंबर्स को ही इसमें शामिल कर दिया गया। साथ ही जांच करने वालों में भी वही मेंबर हैं। यह मेंबर अलग-अलग किए जाएं।
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इस दौरान कहा गया कि कमेटी के कई लोगों को नियमों का ज्ञान नहीं है। इस पर भी विचार किया जाए। आरोप यह भी लगाया गया कि हर कमेटी में गिने-चुने वही चेहरे लिए जाते हैं जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। मेंबर अनु चतरथ, डॉ. नवदीप गोयल ने भी अपना पक्ष रखा।

बैठक में क्या खास...

- 586 करोड़ रुपये का वर्ष 2020-21 के लिए बजट पास
- यूआईएएमएस विभाग को एमबीए कैपिटल मार्केट कोर्स शुरू करने की अनुमति मिली
- जियोलॉजी विभाग को वेस्ट चीजों को बाहर करने की भी अनुमति मिली
- तकनीकी अधिकारियों के प्रमोशन को भी मिली हरी झंडी

शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर डॉ. अजय रंगा ने की लंबी बहस
शिक्षकों को प्रमोशन देने का प्रस्ताव आया तो मेंबर डॉ. अजय रंगा ने कहा कि यूजीसी की पुरानी गाइड लाइन के मुताबिक शिक्षकों को प्रमोशन दिया गया था, लेकिन अब नई गाइड लाइन से आवेदन करने को कहा जा रहा है जो की गलत है और इससे प्रमोशन प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, इस व्यवस्था से तमाम शिक्षकों को पद तो मिला तो लेकिन उन्हें बढ़ा वेतनमान नहीं दिया गया। उन्होंने इस बात पर विरोध किया कि जब प्रमोशन के अभिलेख जांचने के लिए विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई है तो फिर उसके ऊपर रिव्यू कमेटी क्यों बनाई गई। उन्होंने आरोप लगाया यह केवल राजनीति के लिए किया गया है। इस कमेटी को हटाया जाना चाहिए। कई अन्य शिक्षकों ने भी यह प्रकरण उठाया।
वीसी का इस पर जवाब.. इस पर मंथन चल रहा है, बीच का रास्ता निकाला जाएगा।

डीपीएस रंधावा ने गर्मजोशी से उठाया हॉस्टलों का मुद्दा

मेंबर डीपीएस रंधावा ने हॉस्टल की फीस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, जिस दिन विद्यार्थी को हॉस्टल की सुविधा मिले, उसी दिन से उसका चार्ज लेना चाहिए, न कि पूरे साल का। गर्ल्स हॉस्टल 10 का किराया भी सामान्य करना चाहिए।

डॉ. गुरमीत बोले- पीयू हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को करे स्वीकार
मेंबर डॉ. गुरमीत सिंह ने कहा, पीयू की फाइनेंशियल पॉजिशन को देखते हुए हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए। वह अंबाला आदि के कॉलेजों को पीयू से जोड़ने के लिए तैयार हैं। यह प्रस्ताव अच्छा है इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 270 करोड़ रुपये दे रही है, ऐसे में निर्णय भी वैसा ही लिया जाना चाहिए ताकि पीयू को आगे ले जाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने की मांग पुटा चुनाव में की जाती है, लेकिन दमदारी से यह मांग सीनेट या सिंडिकेट में नहीं उठाई जाती।
इस पर पुटा अध्यक्ष डॉ. राजेश गिल ने दिया तीखा जवाब... कहा, पुटा पर कोई आरोप न लगाएं, अपनी बात रखें।
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