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पीयू सीनेट चुनाव: उम्मीदवारों से बोले शिक्षक- पहले चार साल का हिसाब दें, फिर वोट की बात करें
Sat, 25 Jul 2020 10:38 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 25 Jul 2020 10:38 AM IST
सार
- सीनेट चुनाव के लिए मुद्दे तमाम
- ग्रुपबाजी से किनारा कर रहे शिक्षक
- चार सीटों से शिक्षक जाएंगे सीनेट में
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट चुनाव में उम्मीदवारों से शिक्षक यही सवाल पूछ रहे हैं कि पहले वह अपना चार साल का हिसाब दें, उसके बाद वोट की बात करें। इस बार शिक्षक ग्रुपबाजी से दूर हटते नजर आ रहे हैं। वह चाहते हैं कि पीयू को आगे ले जाने वाले सदस्य सीनेट में चुनकर जाएं न कि अपना हित साधने वाले। अब तक तमाम सदस्य चुनकर पहुंचे, लेकिन पीयू की बेहतरी के लिए कम काम किया। इस बार वोटर्स भी मन बना चुके हैं कि पीयू कैंपस की चार सीटों से वही सदस्य सीनेट में पहुंचेंगे जो पीयू के शिक्षकों के लिए कार्य करेंगे।
क्या चाहते हैं प्रोफेसर्स..
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क्या चाहते हैं प्रोफेसर्स..
- इस बार प्रोफेसरों के वोट ग्रुपबाजी पर नहीं पड़ेंगे।
- वोट मांगने वाले उम्मीदवारों को बताना होगा कि उनके पास पीयू को आगे ले जाने का क्या विजन है।
- यदि वह पहले से सीनेट में गए हैं तो उनको जवाब देना होगा कि चार साल में क्या किया।
- इस बार रिसर्च को बढ़ावा देने पर जोर होगा। इसके लिए वह चाहते हैं कि काबिल लोगों को कुर्सी मिले।
- जिन प्रोफेसरों के टॉप के जर्नल्स में आर्टिकल प्रकाशित होते हैं उनको आगे बढ़ाया जाए।
- उम्मीदवार पीयू में एक रोल मॉडल के रूप में कार्य करें।
यह है खास मुद्दा
सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सीनियॉरिटी लिस्ट का है, जो अभी तक पीयू में बनी ही नहीं। जो बनी है उसमें कई खामियां हैं। कुछ प्रोफेसरों का कहना है कि बिना वरिष्ठता के ही लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है जबकि काबिल लोग पिछड़ रहे हैं।
एसोसिएट-असिस्टेंट प्रोफेसर्स का ये है मुद्दा
एसोसिएट-असिस्टेंट प्रोफेसर्स का ये है मुद्दा
- पीयू में 100 से अधिक शिक्षक ऐसे हैं जो पास्ट सर्विस काउंट का लाभ नहीं ले पाए हैं। उन्हें ऐसा उम्मीदवार चाहिए जो इसका लाभ दिलाए।
- वर्ष 2014 के बाद से जिन शिक्षकों को नौकरी मिली उनको आवास तक पीयू में मुहैया नहीं हो पाए। वे चाहते हैं आवास मिले।
- कुछ शिक्षकों को आवास मिले भी हैं तो वह टपक रहे हैं। वह चाहते हैं जल्द इन्हें ठीक करवाया जाए
- मेडिकल पॉलिसी की लंबी प्रक्रिया से यह शिक्षक खुश नहीं हैं। यदि पीजीआई में किसी को इलाज मिला तो उसका रिफंड एक साल में जाकर मिलता है।
- इसके लिए औपचारिकताएं भी कई करनी पड़ती हैं। रिफंड भी 40 से 50 फीसदी तक कटकर मिलता है। शिक्षक चाहते हैं इसका हल।
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सीनेट बन गई राजनीति का अखाड़ा, शिक्षक दिखाएं असली ताकत
कुछ शिक्षकों ने साफ कहा है कि सीनेट राजनीति का अखाड़ा बन गई है। यहां केवल ग्रुपबाजी, विचारधाराओं की लड़ाई रह गई है। यदि सीनेट इन चार सालों में पीयू की बेहतरी के लिए कार्य करती तो पीयू की रैंकिंग में बड़ा उछाल आता। हंगामे के सिवाय यहां कुछ नहीं होता। एक दूसरे को श्रेष्ठ साबित करने के लिए लड़ाई होती है। शिक्षकों का कहना है कि उनका समाज पढ़ा लिखा कहा जाता है।
इसलिए शिक्षक इस बार अपनी ताकत का अहसास कराएं और उन लोगों को सीनेट तक पहुंचाएं जो वाकई काबिल हैं और पीयू के लिए उनके पास कुछ विजन है। कुछ शिक्षकों की तो राय तो यह है कि जो लोग सीनेट में एक बार पहुंच चुके हैं उनसे किनारा किया जाए। बार बार सीनेट में जाने की इच्छा बताती है कि उनके कुछ न कुछ हित छिपे हुए हैं।
इसलिए शिक्षक इस बार अपनी ताकत का अहसास कराएं और उन लोगों को सीनेट तक पहुंचाएं जो वाकई काबिल हैं और पीयू के लिए उनके पास कुछ विजन है। कुछ शिक्षकों की तो राय तो यह है कि जो लोग सीनेट में एक बार पहुंच चुके हैं उनसे किनारा किया जाए। बार बार सीनेट में जाने की इच्छा बताती है कि उनके कुछ न कुछ हित छिपे हुए हैं।