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पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव सितंबर में, शुरू हुआ जोड़-तोड़, इस बार गोयल ग्रुप का पलड़ा भारी
Sun, 23 Feb 2020 11:41 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 23 Feb 2020 11:41 AM IST
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डॉ. नवदीप, अशोक गोयल
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट का चुनाव भले ही सितंबर में हो, लेकिन इसकी तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। वोटरों की जोड़-तोड़ शुरू हो गई। इस बार भी गोयल ग्रुप चुनाव में भारी पड़ सकता है। एक तरह चुनाव वाली सीटों पर जहां गोयल ग्रुप प्रभाव रखता है। वहीं मनोनीत होने वाली सीटें सुभाष शर्मा ग्रुप के पक्ष में जाती नजर आ रही हैं।
कुल मिलाकर मुकाबला इस बार भी कड़ा है। राजनीति पंडितों का कहना है कि दोनों ग्रुप की सीटें लगभग बराबर रहेंगी, लेकिन गोयल ग्रुप या सुभाष शर्मा ग्रुप में कोई भी ग्रुप टूटता है तो फिर परिणाम अलग होंगे और चौंकाने वाले भी। इस बार सुभाष शर्मा ग्रुप ने पूरी ताकत झोंक दी है कि वह सीनेट में अपना दबदबा बनाएंगे। उसी के मुताबिक तैयारियां भी चल रही हैं।
ये है सीटों का गणित
सीनेट का चुनाव हर चार साल बाद होता है। इस बार सितंबर में होने जा रहा है। सीनेट में 90 सदस्य होते हैं। इनमें से 45 सीटों के लिए चुनाव होता है और 35 सीट के सदस्य चांसलर की ओर से मनोनीत किए जाते हैं। 45 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में 15 सीटें स्नातक विद्यार्थियों की ओर दिए जाने वाले वोट से भरेंगे। बाकी अन्य कोटे के भरी जाएंगी।
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सीटों के मुताबिक सभी ग्रुप वोटों का गणित लगाने के लिए जुट गए हैं। फिलहाल वोटर्स का नामांकन चल रहा है। कई राज्यों में चुनाव बूथ बनेंगे। बैलेट पेपर के जरिये चुनाव होता है। यह चुनाव अपने में अलग होता है। इस चुनाव की 10 सीटें एक्स ऑफिसियो के नाम होती हैं। इसमें अफसर, जज, मंत्री, विधायक आदि शामिल होते हैं। यह सीटें पदेन होती हैं।
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कुल मिलाकर मुकाबला इस बार भी कड़ा है। राजनीति पंडितों का कहना है कि दोनों ग्रुप की सीटें लगभग बराबर रहेंगी, लेकिन गोयल ग्रुप या सुभाष शर्मा ग्रुप में कोई भी ग्रुप टूटता है तो फिर परिणाम अलग होंगे और चौंकाने वाले भी। इस बार सुभाष शर्मा ग्रुप ने पूरी ताकत झोंक दी है कि वह सीनेट में अपना दबदबा बनाएंगे। उसी के मुताबिक तैयारियां भी चल रही हैं।
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ये है सीटों का गणित
सीनेट का चुनाव हर चार साल बाद होता है। इस बार सितंबर में होने जा रहा है। सीनेट में 90 सदस्य होते हैं। इनमें से 45 सीटों के लिए चुनाव होता है और 35 सीट के सदस्य चांसलर की ओर से मनोनीत किए जाते हैं। 45 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में 15 सीटें स्नातक विद्यार्थियों की ओर दिए जाने वाले वोट से भरेंगे। बाकी अन्य कोटे के भरी जाएंगी।
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सीटों के मुताबिक सभी ग्रुप वोटों का गणित लगाने के लिए जुट गए हैं। फिलहाल वोटर्स का नामांकन चल रहा है। कई राज्यों में चुनाव बूथ बनेंगे। बैलेट पेपर के जरिये चुनाव होता है। यह चुनाव अपने में अलग होता है। इस चुनाव की 10 सीटें एक्स ऑफिसियो के नाम होती हैं। इसमें अफसर, जज, मंत्री, विधायक आदि शामिल होते हैं। यह सीटें पदेन होती हैं।
ये हैं ग्रुप
पीयू की सिंडिकेट हो या सीनेट, इन दोनों में गोयल ग्रुप का दबदबा रहा है। सिंडिकेट के चुनाव में भी 11 सीटें लेकर गोयल ग्रुप ने अपनी धाक दिखाई। अब सीनेट के चुनाव सामने हैं। इस चुनाव में भी गोयल ग्रुप किसी से पीछे नहीं है। कहा जा रहा है कि मनोनीत होने वाली 35 सीटें भाजपा ग्रुप के हिस्से में जाएंगी।
लेकिन राजनीतिक पंडितों ने एक बात और साफ कर दी है कि यदि 35 सीटें भाजपा के खाते में जाएंगी तो फिर वोटरों का प्रभाव अलग होगा। सर्वाधिक वोटर पंजाब क्षेत्र से हैं जो गोयल ग्रुप से जुड़ा है। ऐसे में 45 सीटों में से अधिकांश सीटें गोयल ग्रुप अपने कब्जे में कर सकते हैं। हालांकि सुभाष ग्रुप भी चुनाव में दमखम दिखाएगा। डीएवी भी इनके साथ है। वहीं गोयल ग्रुप में चार ग्रुप समाहित हैं।
ग्रुपों को तोड़ने की भी तैयारी
गोयल ग्रुप में चार ग्रुप जुड़े हुए हैं। यह पिछली सिंडिकेट के चुनाव के दौरान ही एक हुए थे, जो अब तक एक बने हुए हैं। सीनेट का चुनाव भी मिलकर लड़ने के वायदे किए गए हैं। वही सुभाष शर्मा ग्रुप के साथ डीएवी जुड़ा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों प्रमुख ग्रुपों में से कोई भी ग्रुप टूटा तो फिर रिजल्ट अलग होंगे। गोयल ग्रुप डीएवी को अपने पाले में लाने के लिए कोशिश कर सकता है। वहीं गोयल ग्रुप में से किसी एक ग्रुप को सुभाष शर्मा ग्रुप अपने हिस्से में कर सकता है। हालांकि यह मुमकिन नहीं दिख रहा है।
लेकिन राजनीतिक पंडितों ने एक बात और साफ कर दी है कि यदि 35 सीटें भाजपा के खाते में जाएंगी तो फिर वोटरों का प्रभाव अलग होगा। सर्वाधिक वोटर पंजाब क्षेत्र से हैं जो गोयल ग्रुप से जुड़ा है। ऐसे में 45 सीटों में से अधिकांश सीटें गोयल ग्रुप अपने कब्जे में कर सकते हैं। हालांकि सुभाष ग्रुप भी चुनाव में दमखम दिखाएगा। डीएवी भी इनके साथ है। वहीं गोयल ग्रुप में चार ग्रुप समाहित हैं।
ग्रुपों को तोड़ने की भी तैयारी
गोयल ग्रुप में चार ग्रुप जुड़े हुए हैं। यह पिछली सिंडिकेट के चुनाव के दौरान ही एक हुए थे, जो अब तक एक बने हुए हैं। सीनेट का चुनाव भी मिलकर लड़ने के वायदे किए गए हैं। वही सुभाष शर्मा ग्रुप के साथ डीएवी जुड़ा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों प्रमुख ग्रुपों में से कोई भी ग्रुप टूटा तो फिर रिजल्ट अलग होंगे। गोयल ग्रुप डीएवी को अपने पाले में लाने के लिए कोशिश कर सकता है। वहीं गोयल ग्रुप में से किसी एक ग्रुप को सुभाष शर्मा ग्रुप अपने हिस्से में कर सकता है। हालांकि यह मुमकिन नहीं दिख रहा है।