फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab University Rules Against Paper Wasting

पीयू में सख्तीः अब कागज बर्बाद किया तो लगेगा जुर्माना, लिखें दोनों ओर, वरना...

Fri, 11 Jan 2019 02:09 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 11 Jan 2019 02:09 PM IST
विज्ञापन
Punjab University Rules Against Paper Wasting
paper wasting - फोटो : डेमो
कई शिक्षण संस्थानों में पेपर लैस व्यवस्था लागू हो गई है। पंजाब यूनिवर्सिटी ने भी इस तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। इस पर तेजी से काम चल रहा है। लेकिन इससे पहले पंजाब यूनिवर्सिटी कागज की बर्बादी रोकने जा रहा है। अब कागज के दोनों ओर लिखा जाना अनिवार्य होगा। यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया तो जुर्माना भी देना होगा। अगले माह तक यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसका खाका लगभग तैयार हो गया है। पीयू में 78 विभाग हैं। इसके अलावा 15 अन्य छोटे-बड़े कार्यालय हैं। पीयू से हर दिन लगभग 800 से 900 पेज के पत्र निकलते हैं।
विज्ञापन


इसमें अधिकांश कागजों के पीछे का हिस्सा प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इससे कागज की बर्बादी हो रही है। कई बार अधिकारियों ने कर्मचारियों व विभाग के अन्य लोगों को सलाह भी दी है, लेकिन उस पर पूरा काम नहीं हो पाया। अब इस दिशा में काम किया जा रहा है। ब्लैंक पेपर के दोनों ओर लिखा जाना अनिवार्य किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है इस व्यवस्था की मॉनीटरिंग भी होगी। यदि कागज की बर्बादी आदेश के बाद भी की गई तो कार्रवाई निश्चित है। जुर्माना दस रुपये से लेकर 100 रुपये तक संबंधित व्यक्ति पर पड़ेगा।
विज्ञापन


सीनेट एजेंडे पर खर्च होते हैं 50 लाख
आंकड़ों को देखें तो पीयू में कागजों पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च आता है। इसमें 60 लाख रुपये तो सिंडिकेट व सीनेट पर ही खर्च हो जाते हैं। सदस्यों को एजेंडा दिया जाता है। एक एजेंडे में 500 पेज तक पहुंच जाते हैं। बैठक से पूर्व सदस्य इंडेक्स देखकर ही अपनी कार्रवाई आगे की शुरू कर देते हैं। मूल किताब की जरूरत ही नहीं पड़ती। कुछ सदस्य जरूरत सीनेट की बैठक में मामला उठाते समय उनको देख लेते हैं, लेकिन अधिकांश के पास बुक ऐसे ही रखी रह जाती है। जानकारों का कहना है कि यह कागजों की बर्बादी है। लाखों रुपये को बचाया जा सकता है। बची रकम अन्य कार्यों पर खर्च होगी तो और बेहतर कार्य होगा। कुछ सीनेट सदस्यों ने खुद ही कहा है कि इस एजेंडे की हार्ड कॉपी की जगह यदि मेल पर सूचना दे दी जाए तो पैसे की बचत हो सकती है। हालांकि पीयू के अधिकारी अब इस दिशा में भी काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
पीएचडी की थिसिस के लिए जारी हुए नियम
पीएचडी की थिसिस के लिए पहले दस सेट जमा होते थे, लेकिन अब चार ही कर दिए गए हैं ताकि कागज अधिक बर्बाद न हो। इसके अलावा थिसिस शिक्षक तभी स्वीकार करेंगे जब कागज के आगे व पीछे लिखा होगा। यह भी अनिवार्य कर दिया गया है।


कागज की बर्बादी न हो, इसके लिए नई योजना बनाई जा रही है। नियमों का यदि उल्लंघन किया गया तो कार्रवाई या जुर्माने का भी प्रावधान होगा। इसके अलावा पेपर लैस व्यवस्था की ओर भी हम आगे बढ़ रहे हैं।
- करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed