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पंजाब यूनिवर्सिटी में साइकिल आवंटन के लिए नहीं बनेगा मोबाइल ऐप, ये तरीका अपनाया जाएगा
Tue, 22 Oct 2019 10:57 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 22 Oct 2019 10:57 AM IST
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पंजाब विश्वविद्यालय में साइकिलों के संचालन के लिए कोई ऐप नहीं तैयार किया जाएगा। इंजीनियरों की टीम ने डीएसडब्ल्यू कार्यालय को प्रस्ताव भेजा है कि ऐप बनाने में तीन लाख रुपये तक खर्च होंगे, जबकि इसकी जरूरत महसूस नहीं हो रही है। साइकिलों पर लगाए गए नंबर के आधार पर विद्यार्थियों को यह आवंटित कर दी जाएं। यदि साइकिल बाहर भी जाएंगी तो विद्यार्थियों को उनकी क्लास आईडी के आधार पर पकड़ा जा सकेगा। कंट्रोलिंग आसानी से हो सकती है।
यह भी कहा है कि ऐप पर खर्च होने वाली रकम से यदि और साइकिलें कैंपस में खरीदी जाएंगी तो उसका लाभ अन्य विद्यार्थियों को मिलेगा। बता दें कि पीयू कैंपस को ईको फ्रेंडली बनाने के लिए वाहनों की संख्या लगातार कम किए जाने की योजना बन रही है। नो पार्किंग जोन बनाए जा रहे हैं। शिक्षकों व विद्यार्थियों से कहा गया है कि वह एक-दूसरे विभागों में जाते समय कार का प्रयोग न करें, इसके लिए साइकिल का प्रयोग किया जा सकता है। उसी क्रम में पीयू में 240 साइकिलें लाई गईं।
20 हॉस्टलों में 160 साइकिलें आवंटित की गईं। हर हॉस्टल के हिस्से में आठ साइकिलें आई हैं। बाकी साइकिलें विभागों को आवंटित की गई हैं। कुछ पार्किंग में भी रखी गई हैं। इन साइकिलों की कंट्रोलिंग के लिए यूआईईटी विभाग के प्रो. नरेश कुमार के नेतृत्व में ऐप तैयार किया जाना था। इसके लिए इस टीम ने ऐप तैयार किया। पंचकूला में साइकिल शेयरिंग के लिए जो तरीका अपनाया जा रहा है उसको भी फोलो किया लेकिन इस प्रक्रिया पर लगभग तीन लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
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यह प्रस्ताव तैयार कर डीएसडब्ल्यू कार्यालय भेजा गया। इसके अलावा एक अन्य प्रस्ताव भी भेजा गया, जिसमें कोई रकम खर्च नहीं होगी। इसके लिए साइकिलों पर आवंटित नंबर व छात्रों की आईडी के आधार पर उन्हें साइकिलें आवंटित की जाएंगी। यदि साइकिल पीयू से बाहर भी जाएगी तो छात्र को पकड़ा जा सकेगा। यह प्रस्ताव सभी को रास आ रहा है। बताया जाता है कि दीपावली के बाद इसको लागू कर दिया जाएगा।
पंचकूला में जिस तरह साइकिलों की निगरानी ऐप के जरिए हो रही है, यदि यह प्रक्रिया पीयू में लागू करेंगे तो इस पर अधिक खर्च आएगा। हमने दूसरा प्रस्ताव तैयार करके भेजा है। उसमें साइकिलों पर पड़े नंबरों के आधार पर छात्रों को आईडी के साथ साइकिलें आवंटित कर दी जाएंगी। ऐप पर खर्च होने वाली रकम से और साइकिलें पीयू खरीद सकेगा।
- प्रो. नरेश कुमार, यूआईईटी विभाग पीयू
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यह भी कहा है कि ऐप पर खर्च होने वाली रकम से यदि और साइकिलें कैंपस में खरीदी जाएंगी तो उसका लाभ अन्य विद्यार्थियों को मिलेगा। बता दें कि पीयू कैंपस को ईको फ्रेंडली बनाने के लिए वाहनों की संख्या लगातार कम किए जाने की योजना बन रही है। नो पार्किंग जोन बनाए जा रहे हैं। शिक्षकों व विद्यार्थियों से कहा गया है कि वह एक-दूसरे विभागों में जाते समय कार का प्रयोग न करें, इसके लिए साइकिल का प्रयोग किया जा सकता है। उसी क्रम में पीयू में 240 साइकिलें लाई गईं।
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20 हॉस्टलों में 160 साइकिलें आवंटित की गईं। हर हॉस्टल के हिस्से में आठ साइकिलें आई हैं। बाकी साइकिलें विभागों को आवंटित की गई हैं। कुछ पार्किंग में भी रखी गई हैं। इन साइकिलों की कंट्रोलिंग के लिए यूआईईटी विभाग के प्रो. नरेश कुमार के नेतृत्व में ऐप तैयार किया जाना था। इसके लिए इस टीम ने ऐप तैयार किया। पंचकूला में साइकिल शेयरिंग के लिए जो तरीका अपनाया जा रहा है उसको भी फोलो किया लेकिन इस प्रक्रिया पर लगभग तीन लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
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यह प्रस्ताव तैयार कर डीएसडब्ल्यू कार्यालय भेजा गया। इसके अलावा एक अन्य प्रस्ताव भी भेजा गया, जिसमें कोई रकम खर्च नहीं होगी। इसके लिए साइकिलों पर आवंटित नंबर व छात्रों की आईडी के आधार पर उन्हें साइकिलें आवंटित की जाएंगी। यदि साइकिल पीयू से बाहर भी जाएगी तो छात्र को पकड़ा जा सकेगा। यह प्रस्ताव सभी को रास आ रहा है। बताया जाता है कि दीपावली के बाद इसको लागू कर दिया जाएगा।
पंचकूला में जिस तरह साइकिलों की निगरानी ऐप के जरिए हो रही है, यदि यह प्रक्रिया पीयू में लागू करेंगे तो इस पर अधिक खर्च आएगा। हमने दूसरा प्रस्ताव तैयार करके भेजा है। उसमें साइकिलों पर पड़े नंबरों के आधार पर छात्रों को आईडी के साथ साइकिलें आवंटित कर दी जाएंगी। ऐप पर खर्च होने वाली रकम से और साइकिलें पीयू खरीद सकेगा।
- प्रो. नरेश कुमार, यूआईईटी विभाग पीयू