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पंजाब यूनिवर्सिटी में इस साल भी नहीं मिलेगा छात्रों को आरक्षण का लाभ, 10 फीसदी दिया जाना है
Thu, 23 Jul 2020 12:50 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 23 Jul 2020 12:50 PM IST
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दो साल पहले शुरू हुआ 10 फीसदी आरक्षण इस बार भी पंजाब यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध 196 कॉलेजों में लागू होता नहीं दिख रहा है। यह लागू होगा तो 62 हजार सीटें इन शिक्षण संस्थानों में बढ़ जाती और छात्रों को दाखिला आसानी से मिल जाता। साथ ही तमाम विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता।
हालांकि, पहले शिक्षण संस्थान अपने यहां शिक्षकों का बंदोबस्त करेंगे और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की भी योजना बनाएंगे, लेकिन ये तर्क भी दो साल से दिया जा रहा है। इस पर काम नहीं किया गया। केंद्र सरकार ने 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान पिछले साल किया था। उसी के मुताबिक शिक्षण संस्थानों में भी इन विद्यार्थियों के लिए सीटें बढ़ाई जानी थीं।
यूजीसी का भी फरमान पीयू के पास पहुंचा। पीयू ने आगे की तैयारी शुरू की और बैठक की। कहा गया कि विश्वविद्यालय 10 फीसदी व कॉलेज 25 फीसदी सीटें बढ़ाएंगे। सीटें बढ़ाने के लिए सभी संस्थान तैयार थे, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण यह प्रस्ताव परवान नहीं चढ़ सका। प्रस्ताव रखा गया कि शिक्षकों की काफी कमी है।
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यदि सीटें बढ़ा दी गईं तो शिक्षकों पर अतिरिक्त भार आएगा और शिक्षण कार्य प्रभावित होगा। इसके लिए शिक्षकों की व्यवस्था पहले की जाए और विद्यार्थियों के बैठने के लिए भी अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। इस प्रस्ताव पर सभी ने मुहर लगा दी। चालू वर्ष में इसका लाभ नहीं दिया गया। दूसरे साल में उम्मीद थी लेकिन वह भी पूरी नहीं हो पाई।
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हालांकि, पहले शिक्षण संस्थान अपने यहां शिक्षकों का बंदोबस्त करेंगे और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की भी योजना बनाएंगे, लेकिन ये तर्क भी दो साल से दिया जा रहा है। इस पर काम नहीं किया गया। केंद्र सरकार ने 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान पिछले साल किया था। उसी के मुताबिक शिक्षण संस्थानों में भी इन विद्यार्थियों के लिए सीटें बढ़ाई जानी थीं।
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यूजीसी का भी फरमान पीयू के पास पहुंचा। पीयू ने आगे की तैयारी शुरू की और बैठक की। कहा गया कि विश्वविद्यालय 10 फीसदी व कॉलेज 25 फीसदी सीटें बढ़ाएंगे। सीटें बढ़ाने के लिए सभी संस्थान तैयार थे, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण यह प्रस्ताव परवान नहीं चढ़ सका। प्रस्ताव रखा गया कि शिक्षकों की काफी कमी है।
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यदि सीटें बढ़ा दी गईं तो शिक्षकों पर अतिरिक्त भार आएगा और शिक्षण कार्य प्रभावित होगा। इसके लिए शिक्षकों की व्यवस्था पहले की जाए और विद्यार्थियों के बैठने के लिए भी अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। इस प्रस्ताव पर सभी ने मुहर लगा दी। चालू वर्ष में इसका लाभ नहीं दिया गया। दूसरे साल में उम्मीद थी लेकिन वह भी पूरी नहीं हो पाई।
इस साल भी योजना नहीं चढ़ पाई परवान
इस साल भी आरक्षण लागू होना था। पीयू इसकी तैयारी कर रहा था। नए शैक्षिक सत्र से सीटें बढ़ानी थी, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ पाई। सूत्रों का कहना है कि पीयू व कॉलेजों में सीटें 62 हजार बढ़ेंगी तो इन्हें पढ़ाने के लिए 1500 से 2000 शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी। इसी तरह कर्मचारियों का भार भी बढ़ेगा।
ऐसे में 950 से अधिक कर्मचारियों की जरूरत महसूस होगी। साथ ही विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर व भवनों की व्यवस्था की जानी है। स्वीकृत पदों की संख्या को भी बढ़ाना पड़ेगा। इतनी बड़ी संख्या में तो एक साथ व्यवस्था करना संभव नहीं दिख रहा। ऐसे में अब पीयू निर्णय लेने में हिचक रहा है। साथ ही कोरोना भी कारण बना हुआ है।
ये करेगा पीयू
सूत्रों का कहना है कि प्रथम चरण में पीयू व कुछ कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। वहां व्यवस्था बेहतर चलती है तो फिर अन्य कॉलेजों में शुरू कर दी जाएगी। यदि एक साथ वजन बढ़ता है तो शिक्षा गुणवत्ता से लेकर कई चीजें प्रभावित होंगी। इसका असर फिर रैंकिंग पर पड़ेगा। साथ ही रिजल्ट भी प्रभावित हो सकता है। यह योजना अगले साल शुरू हो सकती है। हालांकि पीयू का तर्क है कि इस योजना पर काम चल रहा है, लेकिन इस साल इसका लाभ मिलेगा यह कह पाना जल्दबाजी होगी।
ऐसे में 950 से अधिक कर्मचारियों की जरूरत महसूस होगी। साथ ही विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर व भवनों की व्यवस्था की जानी है। स्वीकृत पदों की संख्या को भी बढ़ाना पड़ेगा। इतनी बड़ी संख्या में तो एक साथ व्यवस्था करना संभव नहीं दिख रहा। ऐसे में अब पीयू निर्णय लेने में हिचक रहा है। साथ ही कोरोना भी कारण बना हुआ है।
ये करेगा पीयू
सूत्रों का कहना है कि प्रथम चरण में पीयू व कुछ कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। वहां व्यवस्था बेहतर चलती है तो फिर अन्य कॉलेजों में शुरू कर दी जाएगी। यदि एक साथ वजन बढ़ता है तो शिक्षा गुणवत्ता से लेकर कई चीजें प्रभावित होंगी। इसका असर फिर रैंकिंग पर पड़ेगा। साथ ही रिजल्ट भी प्रभावित हो सकता है। यह योजना अगले साल शुरू हो सकती है। हालांकि पीयू का तर्क है कि इस योजना पर काम चल रहा है, लेकिन इस साल इसका लाभ मिलेगा यह कह पाना जल्दबाजी होगी।