फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab University, PU, University Grant Commission, UGC

पीयू में नए शिक्षकों की भर्ती पर रोक से बढ़ेंगी मुश्किलें

Wed, 21 Dec 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 21 Dec 2016 11:05 PM IST
विज्ञापन
Punjab University, PU, University Grant Commission, UGC
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़। - फोटो : डेमो फोटो
रैंकिंग में देश की नंबर वन पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सौंपी रिपोर्ट में यूजीसी ने पंजाब यूनिवर्सिटी में नए शिक्षकों की भर्ती पर भी रोक लगा दी है। ऐसे में पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से भर्ती के लिए जारी प्रोसेस को भी रोक दिया है। यूजीसी निर्देशों के तहत पंजाब यूनिवर्सिटी को किसी भी तरह की रेगुलर, कॉन्ट्रैक्ट या गेस्ट पदों पर भर्ती न करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों की भर्ती न होने से कई विभागों में पढ़ाई पर काफी असर पड़ सकता है। 
विज्ञापन


नैक रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 सत्र में पीयू के विभिन्न विभागों में करीब 42 फीसदी शिक्षकों के पद खाली हैं। इन पर कांट्रैक्ट, गेस्ट और रिसोर्स पर्सन से काम चलाया जा रहा है। पीयू के लॉ, इंजीनियरिंग, भूगोल, फिलॉस्फी, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (यूसोल) और इवनिंग डिपार्टमेंट में अधिकतर रेगुलर पद खाली हैं। पीयू प्रशासन ने करीब 200 पदों को भरने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन यूजीसी के निर्देशों के बाद भर्ती प्रक्रिया रुक गई है।
विज्ञापन


पिछले दो सालों में ही पीयू के 40 से अधिक प्रोफेसर रिटायर हो चुके हैं। इन पदों को भी अभी भरा नहीं गया है। पीयू में एसोसिएट और प्रोफेसर पदों को भरने की प्लानिंग भी अधर में लटक गई है । आर्थिक तंगी के कारण पीयू ने फिलहाल कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम(कैश) की प्रक्रिया भी रोक रखी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

कर्मचारियों को रेगुलर और प्रमोशन पर लगा ब्रेक

Punjab University, PU, University Grant Commission, UGC
VC Arun Grover On PU - फोटो : File Photo
कर्मचारियों को रेगुलर और प्रमोशन पर लगा ब्रेक 
यूजीसी ने पीयू प्रशासन को सभी तरह के खर्चों में कटौती के निर्देश दिए हैं। पीयू प्रशासन को एक महीने के भीतर इस संबंध में जानकारी यूजीसी के पास भेजनी होगी। प्रोफेसर और नॉन टीचिंग स्टाफ का ऑडिट करने को भी कहा है। पीयू प्रशासन ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। यूजीसी के निर्देश के बाद टीचिंग के साथ नॉन टीचिंग पर भी तलवार लटक सकती है। पीयू के 300 से अधिक सी और डी ग्रुप के कर्मचारी कई वर्षों से रेगुलर किए जाने की मांग कर रहे हैं। आर्थिक तंगी से प्रमोशन के मामले भी लटक गए हैं।  

पीयू के लिए मौजूदा हालात अच्छे नहीं हैं। आर्थिक तंगी में यूनिवर्सिटी को अधिक समय तक चला पाना आसान नहीं होगा। मामले में पीयू प्रोफेसर- कर्मचारियों के साथ शहरवासियों को भी एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। यूजीसी के नए निर्देशों से पीयू की ऑटोनॉमी को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। देश की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी में शामिल पीयू के लिए ऐसे हालात से गुजरना काफी दुखद है। 
-प्रो. खालिद मोहम्मद, पूर्व पूटा प्रेसिडेंट पंजाब यूनिवर्सिटी 

यूजीसी ने जिस तरह की चिट्ठी जारी की है, यह चिंता का विषय है। यूनिवर्सिटी से जुड़े हर वर्ग को अब मिलकर आर्थिक संकट से उबरने के लिए प्लानिंग के साथ काम करना होगा। पूटा जल्द ही मामले में मीटिंग बुलाए। 
-प्रो. अक्षय कुमार, पूर्व पूटा प्रेसिडेंट पंजाब यूनिवर्सिटी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed