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पीयू में बन गया ओजोनाइजर, जो स्वीमिंग पूल के साथ पीने के पानी को भी करेगा शुद्ध
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Jun 2018 12:52 PM IST
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ओजोनाइजर
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पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों ने ओजोनाइजर बनाया है। यह न सिर्फ पीने के पानी को शुद्ध करेगा, बल्कि स्वीमिंग पूल में क्लोरिन का असर भी त्वचा पर नहीं होने देगा। मार्केट में यह ओजोनाइजर कब तक आएगा, अभी तय नहीं है। लेकिन पीयू इसे आर्मी के लेह क्षेत्र में देने की योजना पर काम कर रही है, ताकि आर्मी के जवानों को ऑक्सीजन युक्त पानी मिल सके, क्योंकि वहां पानी में आक्सीजन की कमी है और ओजोनाइजर पानी में ऑक्सीजन छोड़ता है।
ओजोनाइजर से ओजोन निकलती है, जो पानी को शुद्ध करती है। इसे फिलहाल फिजिक्स विभाग के टैंक के अलावा लाइब्रेरी में भी लगाया गया है। साथ ही आने वाले कुछ दिनों में पीयू के स्वीमिंग पूल में भी लगाया जाएगा, ताकि पानी से त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे। यह बिजली से चलता है और एक घंटे में सिर्फ पांच मिनट के लिए चलाना होगा और पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और आयरन को खत्म करके उसमें ऑक्सीजन देगा।
घर के टैंक के लिए एक ओजोनाइजर काफी है, जबकि स्वीमिंग पूल में चार से पांच लगाने होंगे। इसे बनाने में करीब तीन हजार रुपये की लागत आई। इस ओजोनाइजर को भाविका बंसल ने राहुल सचदेवा और मलकीत सिंह के साथ मिलकर तैयार किया है। फिजिक्स विभाग के चेयरमैन प्रो. नवदीप गोयल ने ओजोनाइजर के अलावा विभाग के अन्य कार्यों के बारे में भी बताया, जिन पर काम चल रहा है।
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सस्ते मेडिकल इमेज डिटेक्टर पर चल रहा काम
फिजिक्स विभाग में मेडिकल इमेज डिटेक्टर बनाने पर काम चल रहा है, जो सस्ते होंगे। फिलहाल इनकी कीमत करोड़ों रुपये है। यह सस्ते मेडिकल इमेज डिटेक्टर पोर्टेबल तो होंगे ही साथ ही इनकी लागत कई गुणा कम होगी।
बीई इलेक्ट्रानिक्स से एमएससी में मिलेगा दाखिला
पंजाब यूनिवर्सिटी से बीई इलेक्ट्रोनिक्स के छात्रों के पास होने के बाद एमएससी फिजिक्स में दाखिला मिल सकेगा। क्योंकि फिजिक्स का दायरा काफी बड़ा है। छात्र इलेक्ट्रानिक्स का प्रयोग कर लाइफ साइंस पर काम कर सकेंगे।
फेलो बनेंगे प्रोफेसर के असिस्टेंट
फिजिक्स विभाग पीयू का पहला ऐसा विभाग होगा, जहां के फेलो प्रोफेसर के असिस्टेंट बनेंगे। प्रोफेसर के विभिन्न कार्य जैसे पेपर बनाना, चेक करना, विषय वस्तु तैयार करने में हाथ बटाएंगे। किसी भी फेलो के लिए सप्ताह में छह घंटे पढ़ाना तो जरूरी है ही, अब इसमें नए सेशन से असिटेंट की भूमिका भी जोड़ी जाएगी।
पहली बार रूसा से मिल सकती है 50 करोड़ की ग्रांट
प्रो. नवदीप गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से पीयू को पहली बार 50 करोड़ रुपये की ग्रांट मिल सकती है। हालांकि, रूसा से कॉलेजों को ग्रांट मिलती है, लेकिन पहली बार रूसा रिसर्च के लिए पैसा देने जा रहा है। अब पीयू का रिसर्च में बड़ा नाम है, ऐसे में लाइफ साइंस पर शोध के लिए पैसा मिले, इसके लिए पीयू ने अपना प्रपोजल दे दिया है। पीयू के बॉयो और फिजिक्स विभाग मिलकर इस ग्रांट से शोध करेंगे।
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ओजोनाइजर से ओजोन निकलती है, जो पानी को शुद्ध करती है। इसे फिलहाल फिजिक्स विभाग के टैंक के अलावा लाइब्रेरी में भी लगाया गया है। साथ ही आने वाले कुछ दिनों में पीयू के स्वीमिंग पूल में भी लगाया जाएगा, ताकि पानी से त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे। यह बिजली से चलता है और एक घंटे में सिर्फ पांच मिनट के लिए चलाना होगा और पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और आयरन को खत्म करके उसमें ऑक्सीजन देगा।
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घर के टैंक के लिए एक ओजोनाइजर काफी है, जबकि स्वीमिंग पूल में चार से पांच लगाने होंगे। इसे बनाने में करीब तीन हजार रुपये की लागत आई। इस ओजोनाइजर को भाविका बंसल ने राहुल सचदेवा और मलकीत सिंह के साथ मिलकर तैयार किया है। फिजिक्स विभाग के चेयरमैन प्रो. नवदीप गोयल ने ओजोनाइजर के अलावा विभाग के अन्य कार्यों के बारे में भी बताया, जिन पर काम चल रहा है।
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सस्ते मेडिकल इमेज डिटेक्टर पर चल रहा काम
फिजिक्स विभाग में मेडिकल इमेज डिटेक्टर बनाने पर काम चल रहा है, जो सस्ते होंगे। फिलहाल इनकी कीमत करोड़ों रुपये है। यह सस्ते मेडिकल इमेज डिटेक्टर पोर्टेबल तो होंगे ही साथ ही इनकी लागत कई गुणा कम होगी।
बीई इलेक्ट्रानिक्स से एमएससी में मिलेगा दाखिला
पंजाब यूनिवर्सिटी से बीई इलेक्ट्रोनिक्स के छात्रों के पास होने के बाद एमएससी फिजिक्स में दाखिला मिल सकेगा। क्योंकि फिजिक्स का दायरा काफी बड़ा है। छात्र इलेक्ट्रानिक्स का प्रयोग कर लाइफ साइंस पर काम कर सकेंगे।
फेलो बनेंगे प्रोफेसर के असिस्टेंट
फिजिक्स विभाग पीयू का पहला ऐसा विभाग होगा, जहां के फेलो प्रोफेसर के असिस्टेंट बनेंगे। प्रोफेसर के विभिन्न कार्य जैसे पेपर बनाना, चेक करना, विषय वस्तु तैयार करने में हाथ बटाएंगे। किसी भी फेलो के लिए सप्ताह में छह घंटे पढ़ाना तो जरूरी है ही, अब इसमें नए सेशन से असिटेंट की भूमिका भी जोड़ी जाएगी।
पहली बार रूसा से मिल सकती है 50 करोड़ की ग्रांट
प्रो. नवदीप गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से पीयू को पहली बार 50 करोड़ रुपये की ग्रांट मिल सकती है। हालांकि, रूसा से कॉलेजों को ग्रांट मिलती है, लेकिन पहली बार रूसा रिसर्च के लिए पैसा देने जा रहा है। अब पीयू का रिसर्च में बड़ा नाम है, ऐसे में लाइफ साइंस पर शोध के लिए पैसा मिले, इसके लिए पीयू ने अपना प्रपोजल दे दिया है। पीयू के बॉयो और फिजिक्स विभाग मिलकर इस ग्रांट से शोध करेंगे।